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बिना लैब टेक्नीशियन जिले में संचालित हो रही दुग्घ डेरियां

Sun, 15 Sep 2019 10:42 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 15 Sep 2019 10:42 PM IST
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Raid on eight big dairies
सुल्तानपुर। शासन के निर्देश पर दुग्ध डेयरियों के खिलाफ जिले में चार दिनों तक चलाए गए एफएसडीए के अभियान में एक भी डेयरी नियम संगत चलती हुई नहीं पाई गई।
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छापेमारी के दौरान आठ दुग्ध डेयरियों पर एक भी लैब टेक्नीशियन नहीं पाया गया। सभी दुग्ध डेरियों में गंदगी की भरमार थी। टीम ने 12 दूध के नमूने लेकर उसे प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा है।
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जिले में संचालित हो रहीं दुग्ध डेयरियां भी मानक के विपरीत काम कर रही हैं। इसका खुलासा एफएसडीए की छापेमारी में हुआ है। एफएसडीए की टीम ने जिले में संचालित आठ दुग्ध डेयरियों पर चार दिनों के अंदर छापा मारा।
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एफएसडीए की मानें तो 11 सितंबर 2019 को अलीगंज में स्थित बीएमसी मिल्क पोर्ट, 12 सितंबर को दुग्ध अवशीतन केंद्र बगिया चौक, परसुवा तिवारी का पुरवा में स्थित स्वदेश मिल्क, सीपी मिल्क प्राइवेट लिमिटेड, शोभा कोल्ड स्टोरेज शुकुल दुलैचा, 13 सितंबर को चुनहा से रामजी, रमेश दूबे, नफीस और राम प्रकाश से दूध के नमूने लिए गए थे।
इसके साथ ही 14 सितंबर को गिरिराज महराज डेयरी एंड मिल्क प्रोडक्शन नेकराही, स्वदेश मिल्क सपाही बगिया गांव से दूध का नमूना लिया गया। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अभिहीत अधिकारी (डीओ) राजीव मिश्र ने बताया कि किसी भी दुग्ध डेयरी पर लैब टेक्नीशियन नहीं मिला है।
इसकी वजह से डेयरियों पर पहुंचने वाले दूध की जांच नहीं हो पा रही है। चार दिनों में की गई छापेमारी में 12 दूध के नमूने लिए गए हैं। जांच के लिए दूध को प्रयोगशाला भेजा गया है। एक माह में रिपोर्ट मिल जाएगी।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एएन सिंह बताते हैं कि यदि दूध में पेंट मिला हो तो प्रयोग करने वाले के शरीर में इसका व्यापक असर पड़ता है। मिलावटी दूध शरीर में जाकर किडनी, लीवर में एकत्र होता है।
10-15 वर्ष बाद लीवर और तांत्रिका तंत्र काम करना बंद कर देता है। शुरुआत में मिलावटी दूध से उल्टी होती है। कंपन के साथ ही आंख पलट जाती है। चक्कर आते हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने पर मौत भी हो जाती है।

मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजीव मिश्र बताते हैं कि थोड़ी सी जानकारी से दूध में मिलावट से बचा जा सकता है। उन्होंने दूध के सामान्य अपमिश्रण के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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