{"_id":"c4f1dceac754ed079cc2574acf183a0c","slug":"race-over-pg-classes-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्नातक कक्षाओं में प्रवेश को मची मारामारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्नातक कक्षाओं में प्रवेश को मची मारामारी
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
Updated Wed, 29 Jul 2015 10:25 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुल्तानपुर। अवध विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से महाविद्यालयों में स्नातक व परास्नातक कक्षाओं में सीटों का नए सिरे से निर्धारण कर दिए जाने से महाविद्यालयों में स्नातक कक्षाओं की सीटें घट गई हैं। बड़े महाविद्यालयों में सीटे आधे से कम हो गई हैं।
विज्ञापन
शहर के अशासकीय सहायता प्राप्त तीनों महाविद्यालयों में अब तक स्नातक कक्षाओं में करीब 15 हजार सीटों पर छात्र-छात्राओं का प्रवेश लिया जाता था लेकिन इस बार तकरीबन पांच हजार छात्र-छात्राओं का ही प्रवेश हो सकता है। ऐसे में अब तक प्रवेश से वंचित छात्र-छात्राएं प्रवेश के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।
विज्ञापन
डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद से संबद्घ जिले में करीब 60 महाविद्यालय संचालित है। अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जीसीआर जायसवाल ने आते ही महाविद्यालयों की मनमानी पर अंकुश लगाना शुरू कर दिया था। पहले तो विश्वविद्यालय की परीक्षाएं सख्ती से संपन्न कराई गईं और अब बोगस छात्रों के प्रवेश पर अंकुश लगाने के लिए कड़ाई की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से विषय, अनुमोदित शिक्षक व बिल्डिंग के हिसाब से सीटों का निर्धारण किया गया है। इस हिसाब से प्रति विषय/सेक्शन 60 छात्रों का प्रवेश लिया जा सकता है।
विज्ञापन
नियम के मुताबिक महाविद्यालयों की बड़ी संख्या में सीटों की कटौती हो गई है। नए सिरे से सीटों के निर्धारण से महाविद्यालयों के सामने प्रवेश के लिए मुसीबत बढ़ गई है। विश्वविद्यालय से सेटिंग करके अधिक से अधिक सीट पाने वाले महाविद्यालयों को कुलपति की सख्ती से तगड़ा झटका लगा है। वहीं, शहर के तीनों महाविद्यालयों में भी सीटों की भारी कटौती हो गई है। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं प्रवेश से वंचित हो रहे हैं। शहर के तीनों महाविद्यालयों में अब तक स्नातक कक्षाओं में करीब 15 हजार स्टूडेंट्स प्रवेश लेते थे लेकिन सीटों के नए निर्धारण से अब मात्र पांच हजार स्टूडेंट्स ही स्नातक कक्षाओं में प्रवेश ले सकते हैं। परिणामस्वरूप प्रवेश को लेकर मारामारी मची है।