{"_id":"64c7fde8823b13a69d0cec14","slug":"premchand-was-a-writer-of-deep-humanistic-vision-sultanpur-news-c-103-1-slko1046-1115-2023-08-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"गहरी मानवतावादी दृष्टि के साहित्यकार थे प्रेमचंद : सुरेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गहरी मानवतावादी दृष्टि के साहित्यकार थे प्रेमचंद : सुरेश
Tue, 01 Aug 2023 12:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Tue, 01 Aug 2023 12:01 AM IST
विज्ञापन
सुल्तानपुर। प्रेमचंद गहरी मानवतावादी दृष्टि के सम्मानित साहित्यकार थे। उनकी कहानियां और उपन्यास लोकजीवन के जीवंत दस्तावेज हैं। ये विचार साहित्यकार सुरेश चंद्र शर्मा ने अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से आयोजित प्रेमचंद जयंती समारोह में बतौर मुख्य वक्ता व्यक्त किए। सोमवार को रामरती नन्हकू राम वर्मा महाविद्यालय चांदपुर सैदोपट्टी फरीदीपुर में हुए इस समारोह में विशिष्ट वक्ता डॉ. सुशील कुमार पांडेय साहित्येंदु ने कहा कि प्रेमचंद जैसा बाल और नारी संवेदना का चित्रण कहीं और नहीं दिखता।
डॉ. ओंकारनाथ द्विवेदी ने कहा कि प्रेमचंद ने हिंदी कहानी के कथानक को आम लोगों से जोड़ा था। कथाकार दिनेश कुमार सिंह चित्रेश ने कहा कि यह प्रेमचंद के लेखन की ताकत है कि वे लगातार सर्वाधिक प्रासंगिक हैं। राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह रवि ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य भारतीय सनातन परंपरा का संवाहक है। वे श्रीमद्भागवतगीता और विवेकानंद के विचारों से प्रभावित थे।
संत तुलसीदास पीजी कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. करुणेश भट्ट ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य में वंचितों की वेदना को स्वर दिया था। उनका साहित्य उपेक्षितों के प्रति संवेदना की आवाज है। विशिष्ट अतिथि प्रयागराज के साहित्यकार भगवान प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य विश्व बंधुत्व को बढ़ाने वाला साहित्य है।
विज्ञापन
मुख्य अतिथि हनुमान प्रसाद सिंह अभिषेक ने काव्य पाठ किया। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप व संचालन परिषद के जिलाध्यक्ष आशुकवि मथुरा प्रसाद सिंह जटायु ने किया। अवधी साहित्य अकादमी प्रयागराज ने साहित्यकारों को सम्मान पत्र दिया।
इन्हें मिला सम्मान
मुंशी प्रेमचंद स्मृति कथा सौरभ सम्मान साहित्यकार मथुरा प्रसाद सिंह जटायु, दिनेश प्रताप सिंह चित्रेश, डॉ. राम प्यारे प्रजापति, डॉ. राम लखन चौरसिया वागीश, सुरेश चंद्र शर्मा, सर्वेश कांत वर्मा सरल व अनिल कुमार वर्मा मधुर को दिया गया।
जयशंकर प्रसाद काव्य गौरव सम्मान डॉ. आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप, डॉ. सुशील कुमार पांडेय साहित्येंदु, हनुमान प्रसाद सिंह अभिषेक, डॉ. ओंकारनाथ द्विवेदी, डॉ. करुणेश भट्ट, ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह रवि, सुभाषचंद्र यादव परदेसी, पवन कुमार सिंह, केशव प्रसाद सिंह, श्रीनारायण लाल श्रीश, प्रदीप सिंह, राजबहादुर राना, सुनीता श्रीवास्तव, ब्रजेश कुमार वर्मा, अशोक आचार्य अनंत, रमेश नंदवंशी, नरेंद्र प्रसाद शुक्ल, कर्मराज शर्मा तुकांत, कांति सिंह, अजय जायसवाल अनहद, उदयराज वर्मा, दुर्गा प्रसाद निषाद, सौरभ मिश्र विनम्र, नफीसा खातून व घनश्याम वर्मा को मिला।
विज्ञापन
डॉ. ओंकारनाथ द्विवेदी ने कहा कि प्रेमचंद ने हिंदी कहानी के कथानक को आम लोगों से जोड़ा था। कथाकार दिनेश कुमार सिंह चित्रेश ने कहा कि यह प्रेमचंद के लेखन की ताकत है कि वे लगातार सर्वाधिक प्रासंगिक हैं। राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह रवि ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य भारतीय सनातन परंपरा का संवाहक है। वे श्रीमद्भागवतगीता और विवेकानंद के विचारों से प्रभावित थे।
विज्ञापन
संत तुलसीदास पीजी कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. करुणेश भट्ट ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य में वंचितों की वेदना को स्वर दिया था। उनका साहित्य उपेक्षितों के प्रति संवेदना की आवाज है। विशिष्ट अतिथि प्रयागराज के साहित्यकार भगवान प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य विश्व बंधुत्व को बढ़ाने वाला साहित्य है।
विज्ञापन
मुख्य अतिथि हनुमान प्रसाद सिंह अभिषेक ने काव्य पाठ किया। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप व संचालन परिषद के जिलाध्यक्ष आशुकवि मथुरा प्रसाद सिंह जटायु ने किया। अवधी साहित्य अकादमी प्रयागराज ने साहित्यकारों को सम्मान पत्र दिया।
इन्हें मिला सम्मान
मुंशी प्रेमचंद स्मृति कथा सौरभ सम्मान साहित्यकार मथुरा प्रसाद सिंह जटायु, दिनेश प्रताप सिंह चित्रेश, डॉ. राम प्यारे प्रजापति, डॉ. राम लखन चौरसिया वागीश, सुरेश चंद्र शर्मा, सर्वेश कांत वर्मा सरल व अनिल कुमार वर्मा मधुर को दिया गया।
जयशंकर प्रसाद काव्य गौरव सम्मान डॉ. आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप, डॉ. सुशील कुमार पांडेय साहित्येंदु, हनुमान प्रसाद सिंह अभिषेक, डॉ. ओंकारनाथ द्विवेदी, डॉ. करुणेश भट्ट, ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह रवि, सुभाषचंद्र यादव परदेसी, पवन कुमार सिंह, केशव प्रसाद सिंह, श्रीनारायण लाल श्रीश, प्रदीप सिंह, राजबहादुर राना, सुनीता श्रीवास्तव, ब्रजेश कुमार वर्मा, अशोक आचार्य अनंत, रमेश नंदवंशी, नरेंद्र प्रसाद शुक्ल, कर्मराज शर्मा तुकांत, कांति सिंह, अजय जायसवाल अनहद, उदयराज वर्मा, दुर्गा प्रसाद निषाद, सौरभ मिश्र विनम्र, नफीसा खातून व घनश्याम वर्मा को मिला।