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Sultanpur News: आरोपों से घिरते पुलिस थाने, बचाव करते अफसर

Tue, 25 Jun 2024 02:56 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर Updated Tue, 25 Jun 2024 02:56 AM IST
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Police station surrounded by allegations, officers defending
दबंग शोहदे घर में घुसकर तोड़फोड़ करते हैं, बेटी पर तेजाब डालने की धमकी देते हैं और एक दरोगा पीड़ित पिता की तहरीर बदलवाकर मामले को हल्का कर देता है। इससे पीड़ित अपनी पत्नी व बेटी को सुरक्षित स्थान पर भेजने को मजबूर हो जाता है।
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एक युवा व्यापारी राजेश जायसवाल अपने रुपये न लौटाने वालों से मिल रही धमकी की शिकायत करता है, कूरेभार पुलिस खामोश रहती है और व्यापारी की हत्या हो जाती है।
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पीपल वाली गली के पैर से लाचार बुजुर्ग राजेंद्र कुमार वर्मा अपने घर व दुकान पर दबंगों के कब्जे की शिकायत लेकर एसपी दफ्तर से लेकर सीओ और थाने के चक्कर काट रहे हैं। कोई सुनवाई नहीं होती है।
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गोसाईंगंज के वलीपुर खेड़ी निवासी अधिवक्ता वेदांग त्रिपाठी व उनके पिता की जमीन के विवाद में तीन दिन केस दर्ज नहीं हुआ। उल्टे पुलिस पर पीड़ित से ही मारपीट और अभद्रता का आरोप है।



सुल्तानपुर। पुलिस थानों में पीड़ितों के साथ हो रहे बर्ताव और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की यह महज चंद रोज बानगी हैं। हर थाने में ऐसे आधा दर्जन केस जरूर आते हैं। जहां पुलिस त्वरित कार्रवाई करके बड़े अपराध रोक सकती है। किंतु थानों में उल्टी गंगा बह जाती है, अपराधी कुर्सी पा जाते हैं। पीड़ित चक्कर काटता है। एक लाख का इनामी और अधिवक्ता हत्याकांड का फरार आरोपी सिराज अहमद इसका जीवंत उदाहरण है।


पुलिस अफसर भले ही घटनाओं का खुलासा करके अपनी पीठ थपथपाएं, किंतु बढ़ते अपराधों को रोक पाने में पुलिस कामयाब नहीं हो रही है। आए दिन हत्या, लूट और दबंगई के बड़े-बड़े केस सामने आते हैं। ऐसा सिर्फ इसलिए हो रहा है, क्योंकि थानों में पीड़ितों की अनदेखी कर अपराधियों पर मेहरबान पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हो रही है। उल्टे अंतिम क्षण तक उनका बचाव होता है। अधिवक्ता हत्याकांड में तत्कालीन नगर कोतवाल की भूमिका संदिग्ध होने के बावजूद वे तब लाइन हाजिर हुए, जब चिकित्सक हत्याकांड में भी उन्होंने कुछ ऐसा ही कर डाला।


ऐसे अनेक दागी थानों में बैठे हैं जो कमोबेश इसी राह पर चल रहे हैं। इससे असल अपराधी बच जाते हैं, छोटे-छोटे अपराध अनदेखे कर दिए जाते हैं और बड़ी वारदातें सामने आती हैं। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक व अपर पुलिस अधीक्षक से बात करने का प्रयास किया गया, किंतु उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।







विवेचक कोर्ट में भी करा रहे किरकिरी
- इंस्पेक्टर नीशू तोमर पर महिला आरक्षी से दुष्कर्म के चर्चित मामले में सीओ ने आरोपी इंस्पेक्टर चार्जशीट में दुष्कर्म से क्लीन चिट दे दी थी। सीजेएम कोर्ट ने विवेचना से असंतुष्टि जताते हुए इसे दुष्कर्म का मामला माना और आरोपी इंस्पेक्टर को दुष्कर्म के आरोप में तलब कर लिया था।


- कुड़वार थाने के ग्राम पूरे लेदई मौजा बहमरपुर के नीरज पांडेय पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने सालभर में चार्जशीट नहीं दाखिल नहीं की। पुलिस पर आरोपी से मिलीभगत का आरोप लगा तो एसीजेएम पंचम ने साल भर बाद भी विवेचना पूरी न करने पर एसपी को पत्र भेजा है।




- धनपतगंज थाने के चक तेंदुआ गांव के जौव्वाद अली की बहू से हुई मारपीट में उसका गर्भपात हो गया था। पुलिस ने चार्जशीट में गर्भपात का जिक्र ही नहीं किया। कोर्ट ने मामले की पुलिस काे अग्रिम विवेचना करने का आदेश दिया है।
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