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जिले के लोगों ने पेश की सद्भाव की मिसाल
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सुल्तानपुर। अयोध्या पर आए फैसले के दूसरे दिन जनजीवन सामान्य रहा। रविवार को शहर में बाजार बंदी का दिन होने के बाद भी दुकानें खुलीं। लोगों की आवाजाही सामान्य दिनों की तरह रही।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिले वासियों ने एक बार फिर सद्भाव की मिसाल कायम की। हालांकि बारावफात के त्योहार देखते हुए पुलिस सक्रिय रही।
अयोध्या पर आए फैसले के दूसरे दिन रविवार को सुबह से ही शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों का जनजीवन सामान्य दिनों की तरह नजर आया। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक की दुकानें खुली रही।
शहर समेत कस्बों में लोगों की आमदरफ्त तेज रही। सड़क पर रोज की तरह यातायात का संचालन हुआ। हालांकि बारावफात के त्योहार को देखते हुए पुलिस व प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा।
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प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पुलिस अधिकारी व पुलिस टीम कस्बों व शहर में स्थित पर नजर बनाए रही। अपर जिलाधिकारी प्रशासन हर्षदेव पांडेय ने बताया कि जिले में सद्भाव कायम रहा। पुलिस व प्रशासन के अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
वर्ष 1990 में चाहे अयोध्या के ढांचे की ओर बढ़ते कारसेवकों पर चलाई गई गोली की घटना हो या फिर वर्ष 1992 में ढांचे के विध्वंस का। या फिर वर्ष 2010 में आए अयोध्या पर आए हाईकोर्ट के फैसले का मामला।
अयोध्या से सीमा जुड़ी होने के बाद भी जिले के सद्भाव पर कभी कोई आंच नहीं आई। यह जिले की गंगा-जमुनी तहजीब व समझदारी का ही नतीजा है कि अमन के मार्ग को ही लोगों ने इस बार भी तवज्जो दी।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिले वासियों ने एक बार फिर सद्भाव की मिसाल कायम की। हालांकि बारावफात के त्योहार देखते हुए पुलिस सक्रिय रही।
अयोध्या पर आए फैसले के दूसरे दिन रविवार को सुबह से ही शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों का जनजीवन सामान्य दिनों की तरह नजर आया। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक की दुकानें खुली रही।
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शहर समेत कस्बों में लोगों की आमदरफ्त तेज रही। सड़क पर रोज की तरह यातायात का संचालन हुआ। हालांकि बारावफात के त्योहार को देखते हुए पुलिस व प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा।
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प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पुलिस अधिकारी व पुलिस टीम कस्बों व शहर में स्थित पर नजर बनाए रही। अपर जिलाधिकारी प्रशासन हर्षदेव पांडेय ने बताया कि जिले में सद्भाव कायम रहा। पुलिस व प्रशासन के अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
वर्ष 1990 में चाहे अयोध्या के ढांचे की ओर बढ़ते कारसेवकों पर चलाई गई गोली की घटना हो या फिर वर्ष 1992 में ढांचे के विध्वंस का। या फिर वर्ष 2010 में आए अयोध्या पर आए हाईकोर्ट के फैसले का मामला।
अयोध्या से सीमा जुड़ी होने के बाद भी जिले के सद्भाव पर कभी कोई आंच नहीं आई। यह जिले की गंगा-जमुनी तहजीब व समझदारी का ही नतीजा है कि अमन के मार्ग को ही लोगों ने इस बार भी तवज्जो दी।