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पंचायतराज विभाग ने चार करोड़ रुपये किया सरेंडर
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सुल्तानपुर। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन विभागीय बजट खपाने के लिए देर रात तक काम चलता रहा। कई विभाग शासन से बजट मिलने का देर शाम तक इंतजार करते रहे।
देर से बजट जारी होने पर विभाग खर्च नहीं हो पाने की आशंका जता रहे हैं, जबकि पंचायतराज विभाग ने करीब चार करोड़ रुपये सफाई कर्मचारियों के वेतन मद का शासन में सरेंडर कर दिया। विभाग में वेतन मद का यह अतिरिक्त बजट आना बताया रहा है।
पंचायतराज विभाग में सफाई कर्मचारियों के वेतन मद के करीब चार करोड़ रुपये बजट अतिरिक्त आ गया था। मार्च माह में अचानक अतिरिक्त बजट आने पर अधिकारियों-कर्मचारियों ने इसकी छानबीन की। वेतन मद के अतिरिक्त बजट को देखते हुए पंचायतराज विभाग ने चार दिन पहले शासन में चार करोड़ रुपये सरेंडर कर दिया।
डीपीआरओ आरके भारती ने इसे सफाई कर्मचारियों के वेतन मद का अतिरिक्त बजट बताया। इधर, वित्तीय वर्ष की समाप्ति के आखिरी दिन विभागों में शासन के बजट को खपाने का काम दिन भर चलता रहा। विभागों की ओर से विभिन्न योजनाएं के स्वीकृत कार्यों पर धनराशि आवंटित करने का कार्य शाम तक चलता रहा। इसे लेकर तकरीबन सभी विभागों में सुबह से देर रात तक चहल-पहल रही।
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कोषागार में भी बजट को क्लीयर कराने के लिए सुबह से भीड़ रही। सूत्रों के मुताबिक कई विभाग कागजों में धनराशि खर्च दिखाकर उसे लैप्स होने से बचाने में लगे रहे। वित्तीय वर्ष समाप्ति को देखते हुए सड़क, सेतु, सिंचाई समेत फरवरी व मार्च माह में अन्य स्वीकृत कार्यों के बजट का इंतजार विभागीय अधिकारी शाम तक करते रहे।
अधिकारियों को देर से बजट जारी होने पर उसके खर्च नहीं होने की आशंका सता रही है। जिलाधिकारी रवीश गुप्ता का कहना है कि अधिकारियों की ओर से वित्तीय वर्ष का लेखा-जोखा दुरुस्त किया जा रहा है। अभी बजट लैप्स होने की जानकारी नहीं मिली है।
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देर से बजट जारी होने पर विभाग खर्च नहीं हो पाने की आशंका जता रहे हैं, जबकि पंचायतराज विभाग ने करीब चार करोड़ रुपये सफाई कर्मचारियों के वेतन मद का शासन में सरेंडर कर दिया। विभाग में वेतन मद का यह अतिरिक्त बजट आना बताया रहा है।
पंचायतराज विभाग में सफाई कर्मचारियों के वेतन मद के करीब चार करोड़ रुपये बजट अतिरिक्त आ गया था। मार्च माह में अचानक अतिरिक्त बजट आने पर अधिकारियों-कर्मचारियों ने इसकी छानबीन की। वेतन मद के अतिरिक्त बजट को देखते हुए पंचायतराज विभाग ने चार दिन पहले शासन में चार करोड़ रुपये सरेंडर कर दिया।
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डीपीआरओ आरके भारती ने इसे सफाई कर्मचारियों के वेतन मद का अतिरिक्त बजट बताया। इधर, वित्तीय वर्ष की समाप्ति के आखिरी दिन विभागों में शासन के बजट को खपाने का काम दिन भर चलता रहा। विभागों की ओर से विभिन्न योजनाएं के स्वीकृत कार्यों पर धनराशि आवंटित करने का कार्य शाम तक चलता रहा। इसे लेकर तकरीबन सभी विभागों में सुबह से देर रात तक चहल-पहल रही।
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कोषागार में भी बजट को क्लीयर कराने के लिए सुबह से भीड़ रही। सूत्रों के मुताबिक कई विभाग कागजों में धनराशि खर्च दिखाकर उसे लैप्स होने से बचाने में लगे रहे। वित्तीय वर्ष समाप्ति को देखते हुए सड़क, सेतु, सिंचाई समेत फरवरी व मार्च माह में अन्य स्वीकृत कार्यों के बजट का इंतजार विभागीय अधिकारी शाम तक करते रहे।
अधिकारियों को देर से बजट जारी होने पर उसके खर्च नहीं होने की आशंका सता रही है। जिलाधिकारी रवीश गुप्ता का कहना है कि अधिकारियों की ओर से वित्तीय वर्ष का लेखा-जोखा दुरुस्त किया जा रहा है। अभी बजट लैप्स होने की जानकारी नहीं मिली है।