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Sultanpur News: अब आपदा राहत कोष की बारीकियां सीखेंगे जनप्रतिनिधि
Wed, 18 Sep 2024 03:02 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Wed, 18 Sep 2024 03:02 AM IST
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सुल्तानपुर। जनप्रतिनिधियों को आपदा राहत कोष की बारीकियां सिखाई जाएंगी। उन्हें नियमावली और आवेदन के तौर-तरीके बताए जाएंगे। केंद्र व राज्य सरकार की ओर से सूचीबद्ध आपदाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए बाकायदा एक आपदा प्रबंधन पुस्तिका बनाई गई है। उसमें आपदा राहत कोष से मिलने वाली मदद और मानकों की पूरी जानकारी दी गई है।
देश और प्रदेश सरकारों ने प्राकृतिक घटनाओं को आपदा के दायरे में रखा है। इसमें अतिवृष्टि, बेमौसम बारिश से हुए नुकसान, बिजली गिरने समेत अन्य हादसे शामिल हैं। इसके अलावा भी कई घटनाएं हैं, जिन्हें आपदा मानते हुए सरकार ने सूचीबद्ध किया है। आपदा और मदद को लेकर केंद्र और राज्य के अलग-अलग मानक हैं। कभी-कभी जनप्रतिनिधियों के पास मदद के लिए पीड़ित आता है तो वे आपदा राहत कोष के जरिए मदद की सिफारिश कर देते हैं।
मानकों पर खरा न उतरने पर जब मदद नहीं मिल पाती तो उनकी और सरकार की छवि धूमिल होती है। साथ ही पीड़ित को कागजी कोरम पूरा करने में भागदौड़ समेत अन्य परेशानियां उठानी पड़ती है। शासन के निर्देश पर जिला आपदा प्रबंधन की ओर से इस पुस्तिका को तहसीलदारों को माध्यम से जनप्रतिनिधियों को भेसा जा रहा है। डीएम कृत्तिका ज्योत्सना ने बताया कि जन प्रतिनिधियों तक तहसीलदार पुस्तिका पहुंचाएंगे। इसकी मॉनिटरिंग संबंधित एसडीएम करेंगे।
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केंद्र सरकार की ओर से सूचीबद्ध आपदा
बाढ़, सूखा, अग्निकांड, ओलावृष्टि, भूकंप, सुनामी, बादल फटना, कोहरा एवं शीतलहर, भू-स्खलन, कीट-आक्रमण और हिमस्खलन।
यूपी सरकार की ओर से सूचीबद्ध आपदा
बेमौसम भारी बारिश, अतिवृष्टि, बिजली गिरना, आंधी-तूफान, लू प्रकोप, नाव दुर्घटना, सर्पदंश, सीवर सफाई में गैस रिसाव, बोरवेल में गिरना, जंगली जानवरों का हमला, कुआं, नदी, झील, तालाब, नहर, नाला, गड्ढा व जलप्रपात में डूबकर होने वाली मृत्यु, सांड़ एवं नीलगाय के हमले।
ऐसे मिलती है मदद
मृत्यु पर आश्रितों को चार लाख, 40 से 60 प्रतिशत अपंग होने पर 74 हजार, 60 प्रतिशत से अधिक अपंगता पर ढाई लाख रुपये मिलते हैं। इसके अलावा एक हफ्ते से कम अस्पताल में भर्ती होने पर 5400 रुपये और एक हफ्ते से अधिक भर्ती होने पर 16 हजार रुपये। घर पानी में बह जाने, पूर्णरूप से क्षतिग्रस्त हो जाने या दो दिन से अधिक समय तक पानी में डूबे रहने पर परिवार के हर सदस्य को कपड़े के लिए 2500 और बर्तन व घरेलू सामान के लिए 2500 रुपये दिए जाने का प्रावधान है।
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देश और प्रदेश सरकारों ने प्राकृतिक घटनाओं को आपदा के दायरे में रखा है। इसमें अतिवृष्टि, बेमौसम बारिश से हुए नुकसान, बिजली गिरने समेत अन्य हादसे शामिल हैं। इसके अलावा भी कई घटनाएं हैं, जिन्हें आपदा मानते हुए सरकार ने सूचीबद्ध किया है। आपदा और मदद को लेकर केंद्र और राज्य के अलग-अलग मानक हैं। कभी-कभी जनप्रतिनिधियों के पास मदद के लिए पीड़ित आता है तो वे आपदा राहत कोष के जरिए मदद की सिफारिश कर देते हैं।
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मानकों पर खरा न उतरने पर जब मदद नहीं मिल पाती तो उनकी और सरकार की छवि धूमिल होती है। साथ ही पीड़ित को कागजी कोरम पूरा करने में भागदौड़ समेत अन्य परेशानियां उठानी पड़ती है। शासन के निर्देश पर जिला आपदा प्रबंधन की ओर से इस पुस्तिका को तहसीलदारों को माध्यम से जनप्रतिनिधियों को भेसा जा रहा है। डीएम कृत्तिका ज्योत्सना ने बताया कि जन प्रतिनिधियों तक तहसीलदार पुस्तिका पहुंचाएंगे। इसकी मॉनिटरिंग संबंधित एसडीएम करेंगे।
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केंद्र सरकार की ओर से सूचीबद्ध आपदा
बाढ़, सूखा, अग्निकांड, ओलावृष्टि, भूकंप, सुनामी, बादल फटना, कोहरा एवं शीतलहर, भू-स्खलन, कीट-आक्रमण और हिमस्खलन।
यूपी सरकार की ओर से सूचीबद्ध आपदा
बेमौसम भारी बारिश, अतिवृष्टि, बिजली गिरना, आंधी-तूफान, लू प्रकोप, नाव दुर्घटना, सर्पदंश, सीवर सफाई में गैस रिसाव, बोरवेल में गिरना, जंगली जानवरों का हमला, कुआं, नदी, झील, तालाब, नहर, नाला, गड्ढा व जलप्रपात में डूबकर होने वाली मृत्यु, सांड़ एवं नीलगाय के हमले।
ऐसे मिलती है मदद
मृत्यु पर आश्रितों को चार लाख, 40 से 60 प्रतिशत अपंग होने पर 74 हजार, 60 प्रतिशत से अधिक अपंगता पर ढाई लाख रुपये मिलते हैं। इसके अलावा एक हफ्ते से कम अस्पताल में भर्ती होने पर 5400 रुपये और एक हफ्ते से अधिक भर्ती होने पर 16 हजार रुपये। घर पानी में बह जाने, पूर्णरूप से क्षतिग्रस्त हो जाने या दो दिन से अधिक समय तक पानी में डूबे रहने पर परिवार के हर सदस्य को कपड़े के लिए 2500 और बर्तन व घरेलू सामान के लिए 2500 रुपये दिए जाने का प्रावधान है।