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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sultanpur News ›   Mentally disturbed couple and children deserted.

रैन बसेरा में जुड़वा नवजात, मंद्धबुद्धि दंपती

Fri, 28 Aug 2015 11:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर Updated Fri, 28 Aug 2015 11:08 PM IST
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सुल्तानपुर। मंद्धबुद्धि महिला ने 13 दिन पूर्व जिला महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। दूसरे दिन ही अस्पताल प्रशासन ने महिला को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। नवजात शिशुओं के साथ महिला और उसका मंद्धबुद्धि पति रेन बसेरे में पड़े हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से न तो शिशुओं की देखभाल की जा रही है और न ही प्रसूता की। दंपती अपने जुड़वा बच्चों के साथ अस्पताल के ही रेन बसेरे में फर्श पर रात-दिन गुजार रहे हैं।

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 बीते 14 अगस्त को कोई गर्भवती गीता पत्नी सोनू को जिला अस्पताल में भर्ती कराकर चला गया। अस्पताल में उसका पता सुदनापुर, जयसिंहपुर लिखा गया है। गीता के साथ एक व्यक्ति भी है जो खुद को गीता का पति बताता है। हालांकि उसे यह नहीं पता कि उसका घर कहां है। 14 अगस्त की रात में गीता ने दो नवजात शिशुओं को जन्म दिया। दूसरे दिन जिला महिला अस्पताल के चिकित्सकों ने मंद्धबुद्धि गीता को उसके दोनों नवजात शिशुओं के साथ डिस्चार्ज कर दिया जबकि किसी भी प्रसूता को प्रसव के बाद सात दिनों तक अस्पताल में रखे जाने का नियम है। नवजात शिशुओं के साथ गीता और उसका पति सोनू जिला महिला अस्पताल के अंदर ही बने रेन बसेरे में 13 दिनों से जिंदगी गुजार रहे हैं। जिला महिला अस्पताल ने संवेदनहीनता की हद पार कर दी है।
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 न तो गीता और न ही उसके नवजात शिशुओं को किसी प्रकार की व्यवस्था दी जा रही है। सच्चाई यह है कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन भर्ती होने वाले मरीजों के तीमारदार ही गीता और उसके नवजात शिशुओं की देखरेख कर रहे हैं। दिन प्रतिदिन गीता के दोनों नवजात शिशु कमजोर होते जा रहे हैं।
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मैं क्या कर सकती हूं : डॉ. उर्मिला चौधरी
सुल्तानपुर। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. उमिला चौधरी बताती हैं कि महिला मंद्धबुद्धि है, मुझे ऐसा नहीं लगता है। जब उससे मिलने के लिए मैं गई तो उसका पति चला जाता है। किसी भी प्रसूता को सिर्फ 24 घंटे अस्पताल में रखने की व्यवस्था है। जब पूछा गया कि जुड़वा बच्चों की गंदगी से जान जा सकती है तो बोलीं कि मैं क्या कर सकती हूं।

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