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देहली मुबारकपुर गांव में खसरा ने पसारे पांव
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दूबेपुर (सुल्तानपुर)। गर्मी बढ़ते ही संक्रामक बीमारियों ने पांव पसार लिए हैं। दूबेपुर ब्लॉक क्षेत्र का देहली मुबारकपुर गांव खसरा की चपेट में है। पिछले कुछ दिनों के भीतर यहां खसरा के सात मरीज मिले हैं। मरीजों की उम्र 10 से 40 वर्ष के बीच है।
दूबेपुर ब्लॉक क्षेत्र के देहली मुबारकपुर गांव निवासी तवक्कल हुसैन की पुत्री ताबिश (8) को एक हफ्ते पहले खसरा हुआ था। परिवारीजन उसका इलाज करवा रहे थे। धीरे-धीरे ताबिश ठीक हो रही थी कि बुधवार को बड़ी बेटी खुशनुमा (11) भी इसकी चपेट में आ गई। इसी गांव के मदरसे के शिक्षक आस मोहम्मद (28) भी आठ दिन से खसरा की चपेट में है। मंगलवार की सुबह आस मोहम्मद की तीन वर्षीय बेटी आरिबा भी इसकी चपेट में आ गई।
गांव के ही सईद अहमद की बेटी सुमैया (8) को एक हफ्ते पहले खसरा हुआ था। सुमैया अब ठीक हो रही है। एक हफ्ते पहले गांव के ही मोहम्मद इरफान की पुत्री साबरीन (7), नफीस की पुत्री इशना (8), नसीम की पुत्री रूबीना (12) भी खसरा की चपेट में आ चुकी है। सीएमएस एससी कौशल ने लक्षण के आधार पर मरीजों में संक्रामक बीमारी की पुष्टि की है।
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डॉ. सुधाकर सिंह बताते हैं कि खसरा एक प्रकार का वायरल इन्फेक्शन है। यह पानी के माध्यम से फैलता है। यह संक्रामक बीमारी है जो एक से दूसरे व्यक्ति को पकड़ती है। अत्यधिक गर्मी में आंत में फोड़ा हो जाता है जो बाद में शरीर में दाने के रूप में उभर आता है। इस बीमारी के दौरान पूरे शरीर पर दाग-धब्बे हो जाते हैं और तेज बुखार, सिरदर्द और ड्राई कफ की समस्या रहती है। अगर ये नियंत्रित न हों तो दिमाग और लीवर तक इससे प्रभावित हो जाता है। इसके बाद दूसरी बीमारियां मरीज को अपनी गिरफ्त में लेने लगती हैं।
डॉ. सुधाकर सिंह ने बताया कि यदि एक बार ये लक्षण दिख जाएं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। दूसरे लोगों को इससे सुरक्षित रखने का प्रयास भी करें। याद रखें कि हवा और खांसी के माध्यम से संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के शरीर तक पहुंच जाता है। बच्चों को विशेष रूप से खसरा के रोगी से दूर रखें। खसरा के रोगी घर से कम से कम निकलें। इससे एक परिवार का संक्रमण दूसरे परिवार तक पहुंचने से रुकेगा। रोगी के पास खूब सफाई रखें।
जिला महिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मानसी तोमर ने बताया कि गर्भावस्था के समय महिला को खसरा होने पर नवजात में संक्रमण का खतरा 70 प्रतिशत बढ़ जाता है। कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को भी यह वायरस आसानी से शिकार बना लेता है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एससी कौशल ने बताया कि खसरा के मरीजों को फैट, मीट, डेयरी प्रोडक्ट्स और अंडे खाने से बचना चाहिए। खसरा के दौरान सिट्रस फूड यानी खट्टे फलों को और उनका जूस पीने से भी बचना चाहिए। साथ ही बहुत अधिक नमक और नमकयुक्त फूड, मसालेदार फूड चॉकलेट, पीनट बटर, मूंगफली जैसी चीजें भी न खाएं। तली-भुनी चीजें और जंक फूड एकदम न खाएं।
खसरा के मरीजों को पानी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। जैसे गाजर का ताजा जूस, तरबूज, कीवी व नाशपाती जैसे फल। दही और ठंडे पानी जैसी चीजें लेने से आराम मिलता है। खसरा के शुरू के तीन दिन दही और चावल ही खिलाना चाहिए।
खसरा के दौरान शुुरुआत में नहाना नजरअंदाज करें लेकिन तीसरे दिन के बाद पानी की बाल्टी में दो से तीन घंटे नीम की पत्तियां डाल लें। चाहे तो एक घंटे के लिए इस पानी को धूप में भी रख सकते हैं। नहाने के बाद पूरे बदन पर हल्दी या नीम का पेस्ट लगाएं।
खसरा के मामले में महिलाएं विशेष सावधानी बरतें। धूप में कपड़ों को सुखाएं तथा हवादार स्थान पर रहने की कोशिश करें। इसके साथ ही नींबू, नारियल व दाल के पानी का भरपूर उपयोग करें। दवाओं का उपयोग कम करें तथा एंटीबॉयोटिक से परहेज करें।
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दूबेपुर ब्लॉक क्षेत्र के देहली मुबारकपुर गांव निवासी तवक्कल हुसैन की पुत्री ताबिश (8) को एक हफ्ते पहले खसरा हुआ था। परिवारीजन उसका इलाज करवा रहे थे। धीरे-धीरे ताबिश ठीक हो रही थी कि बुधवार को बड़ी बेटी खुशनुमा (11) भी इसकी चपेट में आ गई। इसी गांव के मदरसे के शिक्षक आस मोहम्मद (28) भी आठ दिन से खसरा की चपेट में है। मंगलवार की सुबह आस मोहम्मद की तीन वर्षीय बेटी आरिबा भी इसकी चपेट में आ गई।
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गांव के ही सईद अहमद की बेटी सुमैया (8) को एक हफ्ते पहले खसरा हुआ था। सुमैया अब ठीक हो रही है। एक हफ्ते पहले गांव के ही मोहम्मद इरफान की पुत्री साबरीन (7), नफीस की पुत्री इशना (8), नसीम की पुत्री रूबीना (12) भी खसरा की चपेट में आ चुकी है। सीएमएस एससी कौशल ने लक्षण के आधार पर मरीजों में संक्रामक बीमारी की पुष्टि की है।
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डॉ. सुधाकर सिंह बताते हैं कि खसरा एक प्रकार का वायरल इन्फेक्शन है। यह पानी के माध्यम से फैलता है। यह संक्रामक बीमारी है जो एक से दूसरे व्यक्ति को पकड़ती है। अत्यधिक गर्मी में आंत में फोड़ा हो जाता है जो बाद में शरीर में दाने के रूप में उभर आता है। इस बीमारी के दौरान पूरे शरीर पर दाग-धब्बे हो जाते हैं और तेज बुखार, सिरदर्द और ड्राई कफ की समस्या रहती है। अगर ये नियंत्रित न हों तो दिमाग और लीवर तक इससे प्रभावित हो जाता है। इसके बाद दूसरी बीमारियां मरीज को अपनी गिरफ्त में लेने लगती हैं।
डॉ. सुधाकर सिंह ने बताया कि यदि एक बार ये लक्षण दिख जाएं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। दूसरे लोगों को इससे सुरक्षित रखने का प्रयास भी करें। याद रखें कि हवा और खांसी के माध्यम से संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के शरीर तक पहुंच जाता है। बच्चों को विशेष रूप से खसरा के रोगी से दूर रखें। खसरा के रोगी घर से कम से कम निकलें। इससे एक परिवार का संक्रमण दूसरे परिवार तक पहुंचने से रुकेगा। रोगी के पास खूब सफाई रखें।
जिला महिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मानसी तोमर ने बताया कि गर्भावस्था के समय महिला को खसरा होने पर नवजात में संक्रमण का खतरा 70 प्रतिशत बढ़ जाता है। कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को भी यह वायरस आसानी से शिकार बना लेता है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एससी कौशल ने बताया कि खसरा के मरीजों को फैट, मीट, डेयरी प्रोडक्ट्स और अंडे खाने से बचना चाहिए। खसरा के दौरान सिट्रस फूड यानी खट्टे फलों को और उनका जूस पीने से भी बचना चाहिए। साथ ही बहुत अधिक नमक और नमकयुक्त फूड, मसालेदार फूड चॉकलेट, पीनट बटर, मूंगफली जैसी चीजें भी न खाएं। तली-भुनी चीजें और जंक फूड एकदम न खाएं।
खसरा के मरीजों को पानी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। जैसे गाजर का ताजा जूस, तरबूज, कीवी व नाशपाती जैसे फल। दही और ठंडे पानी जैसी चीजें लेने से आराम मिलता है। खसरा के शुरू के तीन दिन दही और चावल ही खिलाना चाहिए।
खसरा के दौरान शुुरुआत में नहाना नजरअंदाज करें लेकिन तीसरे दिन के बाद पानी की बाल्टी में दो से तीन घंटे नीम की पत्तियां डाल लें। चाहे तो एक घंटे के लिए इस पानी को धूप में भी रख सकते हैं। नहाने के बाद पूरे बदन पर हल्दी या नीम का पेस्ट लगाएं।
खसरा के मामले में महिलाएं विशेष सावधानी बरतें। धूप में कपड़ों को सुखाएं तथा हवादार स्थान पर रहने की कोशिश करें। इसके साथ ही नींबू, नारियल व दाल के पानी का भरपूर उपयोग करें। दवाओं का उपयोग कम करें तथा एंटीबॉयोटिक से परहेज करें।