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टिकरिया में कई प्रसाधन ढहे, कई कगार पर
Amarujala Bureau
Updated Sun, 07 Aug 2016 10:15 PM IST
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लापरवाही का नतीजा उजागर
- फोटो : अमर उजाला
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जिले की पहली प्रसाधन मुक्त ग्राम पंचायत टिकरिया में कई लाभार्थियों के प्रसाधन कक्ष या तो ढह चुके हैं या फिर ढहने की कगार पर हैं। हजारों रुपये की लागत से निर्मित होने के बावजूद ढहे इन प्रसाधन कक्ष ने न सिर्फ निर्माण में बरती गई अनियमितता बल्कि जिला प्रशासन की ओर से गांव को ओडीएफ बताने के दावों की पोल खोल दी है। प्रसाधन कक्ष ढहने से गांव के लोग प्रसाधन के लिए खुले में जाने को विवश हैं।
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केंद्र सरकार के अति महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत बीते दिनों जिले के कुछ गांवों को वाह्य प्रसाधन मुक्त (ओडीएफ) बनाने का लक्ष्य जिला प्रशासन के माध्यम से डीपीआरओ कार्यालय को दिया गया था। लक्ष्य मिलने के बाद डीपीआरओ कार्यालय ने सबसे पहले शहर से सटी टिकरिया ग्राम पंचायत को प्रसाधन से लैस कर लोगों को जागरूक करने का कार्यक्रम शुरू किया। हफ्तों चलाए गए कार्यक्रम के बाद बीते 11 मई को आयोजित समारोह में टिकरिया को ओडीएफ घोषित किया गया था।
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प्रशासन के दावों पर बाहर के लोगों ने तो उसी समय सवाल उठाए थे लेकिन अब यही सवाल गांव के लोग दोहरा रहे हैं। आलम यह है कि टिकरिया ग्राम पंचायत के गांव पूरे हेमनाथ पांडेय के विनोद कुमार, कलावती व शांति देवी के घर शासन के सहयोग से निर्मित प्रसाधन कक्ष ढह चुके हैं। इस गांव के साथ ग्राम पंचायत के कई अन्य गांवों में दर्जनों प्रसाधन कक्ष ढहने के कगार पर हैं।
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हजारों रुपये की लागत से निर्मित इन प्रसाधन कक्ष ने न सिर्फ निर्माण में बरती गई अनियमितता बल्कि प्रशासन की ओर से गांव को वाह्य प्रसाधन मुक्त होने के संबंध में किए जाने वाले दावों की पोल खोल दी है। ऐसा भी नहीं कि जिम्मेदार विभाग को इसकी जानकारी नहीं है। जिन लाभार्थियों के प्रसाधन कक्ष ढह चुके हैं या ढहने के कगार पर हैं वे खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।