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माह भर में विपणन शाखा ने खरीदा सिर्फ साढ़े पांच फीसदी धान
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सुल्तानपुर। सरकार की ओर से किसानों से की जा रही धान खरीद ने शुरुआत में ही दम तोड़ दिया है। विपणन शाखा समेत अन्य एजेंसियों का ताजे आंकड़े इसके गवाह हैं। विपणन शाखा ने माह भर में अपने लक्ष्य का सिर्फ साढ़े पांच फीसदी और मंडी समिति ने तो सिर्फ एक फीसदी धान ही खरीदा है।
अन्य एजेंसियों भी खरीद में औंधे मुंह गिरी हैं। इसके पीछे केंद्रों पर बोरा व धनराशि के अभाव के साथ हाइब्रिड धान की प्रजाति व नमी प्रमुख वजह बनी है। इसकी वजह से खरीद एजेंसिंयां किसानों से धान लेने से कतरा रही हैं।
जिले में 15 अक्तूबर से शुरू हुई धान खरीद में एजेंसियां अभी तक नाकाम साबित हुई हैं। जिला प्रशासन की समीक्षा में आए ताजा आंकड़ों से इसका पता चला है। समीक्षा में पाया गया है कि किसानों से धान खरीद में लगी सरकारी एजेंसियां खरीद में फिसड्डी साबित हुई हैं।
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इसमें नोडल विभाग/विपणन शाखा की हालत सबसे खराब पाई गई है। माह भर में विपणन शाखा ने अपने 47500 मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 2639.04 मीट्रिक टन धान खरीदा है। पीसीएफ ने 1800 मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष 1033.72 मीट्रिक टन धान किसानों से लिया है।
नैफेड ने 1000 के सापेक्ष 120.10 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। मंडी समिति ने 2500 की तुलना में 22.76 मीट्रिक टन व भारतीय खाद्य निगम ने 1000 के सापेक्ष सौ मीट्रिक टन धान की खरीद किसानों से दर्शाई है। कर्मचारी कल्याण निगम की खरीद भी कम मिली है। समीक्षा में धान खरीद की सुस्त रफ्तार डीएम खरीद एजेंसियों पर बिफर पड़े।
जिलाधिकारी रवीश गुप्ता ने एजेंसियों के खिलाफ नाराजगी जताते हुए खरीद बढ़ाने का निर्देश दिया है। लक्ष्य में सुस्ती पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी है। सूत्रों के मुताबिक किसानों से धान खरीद में सुस्ती के पीछे एजेंसियों को धनराशि का नहीं मिलना बताया जा रहा है।
इसके साथ ही क्रय केंद्रों पर बोरों की कमी भी वजह बनी है। क्रय केंद्रों पर हाइब्रिड धान की खरीद में हो रही आनाकानी व धान में नमी दिखाकर वापस किए जाने से भी किसानों के लिए दिक्कत खड़ी हो गई है। हालांकि प्रशासन धनराशि व बोरों के अभाव से इंकार कर रहा है। साथ ही धान खरीद की चौकस व्यवस्था का दावा कर रहा है।
शासन ने किसानों से धान खरीद के लिए छह एजेंसियां नामित की गई है। इन एजेंसियों को शासन की ओर से 70 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य दिया गया है। लक्ष्य को पूरा करने के लिए एजेंसियों ने जिले में कुल 46 क्रय केंद्र स्थापित किए हैं। इसके बाद भी लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
धान खरीद में सुस्ती की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने एजेंसियों पर शिकंजा कस दिया है। डीएम के निर्देश पर बुधवार को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व/नोडल अधिकारी उमाकांत त्रिपाठी ने करीब दर्जन भर क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया।
अपर जिलाधिकारी के निरीक्षण में कई क्रय केंद्रों पर खरीद में सुस्ती पाई गई। साथ ही कुछ केंद्रों पर अव्यवस्था भी मिली। इस पर अपर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए सुधार व खरीद बढ़ाने का निर्देश दिया है। निरीक्षण में एडीएम वित्त ने खरीदे गए धान के भंडारण व्यवस्था का भी जायजा लिया।
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अन्य एजेंसियों भी खरीद में औंधे मुंह गिरी हैं। इसके पीछे केंद्रों पर बोरा व धनराशि के अभाव के साथ हाइब्रिड धान की प्रजाति व नमी प्रमुख वजह बनी है। इसकी वजह से खरीद एजेंसिंयां किसानों से धान लेने से कतरा रही हैं।
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जिले में 15 अक्तूबर से शुरू हुई धान खरीद में एजेंसियां अभी तक नाकाम साबित हुई हैं। जिला प्रशासन की समीक्षा में आए ताजा आंकड़ों से इसका पता चला है। समीक्षा में पाया गया है कि किसानों से धान खरीद में लगी सरकारी एजेंसियां खरीद में फिसड्डी साबित हुई हैं।
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इसमें नोडल विभाग/विपणन शाखा की हालत सबसे खराब पाई गई है। माह भर में विपणन शाखा ने अपने 47500 मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 2639.04 मीट्रिक टन धान खरीदा है। पीसीएफ ने 1800 मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष 1033.72 मीट्रिक टन धान किसानों से लिया है।
नैफेड ने 1000 के सापेक्ष 120.10 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। मंडी समिति ने 2500 की तुलना में 22.76 मीट्रिक टन व भारतीय खाद्य निगम ने 1000 के सापेक्ष सौ मीट्रिक टन धान की खरीद किसानों से दर्शाई है। कर्मचारी कल्याण निगम की खरीद भी कम मिली है। समीक्षा में धान खरीद की सुस्त रफ्तार डीएम खरीद एजेंसियों पर बिफर पड़े।
जिलाधिकारी रवीश गुप्ता ने एजेंसियों के खिलाफ नाराजगी जताते हुए खरीद बढ़ाने का निर्देश दिया है। लक्ष्य में सुस्ती पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी है। सूत्रों के मुताबिक किसानों से धान खरीद में सुस्ती के पीछे एजेंसियों को धनराशि का नहीं मिलना बताया जा रहा है।
इसके साथ ही क्रय केंद्रों पर बोरों की कमी भी वजह बनी है। क्रय केंद्रों पर हाइब्रिड धान की खरीद में हो रही आनाकानी व धान में नमी दिखाकर वापस किए जाने से भी किसानों के लिए दिक्कत खड़ी हो गई है। हालांकि प्रशासन धनराशि व बोरों के अभाव से इंकार कर रहा है। साथ ही धान खरीद की चौकस व्यवस्था का दावा कर रहा है।
शासन ने किसानों से धान खरीद के लिए छह एजेंसियां नामित की गई है। इन एजेंसियों को शासन की ओर से 70 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य दिया गया है। लक्ष्य को पूरा करने के लिए एजेंसियों ने जिले में कुल 46 क्रय केंद्र स्थापित किए हैं। इसके बाद भी लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
धान खरीद में सुस्ती की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने एजेंसियों पर शिकंजा कस दिया है। डीएम के निर्देश पर बुधवार को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व/नोडल अधिकारी उमाकांत त्रिपाठी ने करीब दर्जन भर क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया।
अपर जिलाधिकारी के निरीक्षण में कई क्रय केंद्रों पर खरीद में सुस्ती पाई गई। साथ ही कुछ केंद्रों पर अव्यवस्था भी मिली। इस पर अपर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए सुधार व खरीद बढ़ाने का निर्देश दिया है। निरीक्षण में एडीएम वित्त ने खरीदे गए धान के भंडारण व्यवस्था का भी जायजा लिया।