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भगवान राम को वेदांत दर्शन से ही जाना जा सकता है : स्वामी राम भद्राचार्य
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विजेथुआ महावीरन धाम में कथा कहते स्वामी रामभद्राचार्य महाराज।
- फोटो : विजेथुआ महावीरन धाम में कथा कहते स्वामी रामभद्राचार्य महाराज।
सूरापुर। भगवान राम को वेदांत दर्शन से ही जाना जा सकता है। भगवान को यदि पाना है तो वेदांत की शरण लेनी पड़ेगी। ये बातें चित्रकूट के तुलसी पीठाधीश्वर राम भद्राचार्य ने कहीं। वे विजेथुआ महोत्सव के तीसरे दिन रविवार को वाल्मीकि रामायण की कथा सुना रहे थे।
उन्होंने बताया कि वे त्रिदंडी साधु हैं। त्रिदंडी संन्यासी भिक्षु होते हैं, लेकिन संसार से कोई भिक्षा नहीं मांगते। वे सीतापति भगवान राम और हनुमान से भीख मांगते हैं। जो उनकी आलोचना करते हैं, वे सुन लें। वे चमत्कार के लिए या भोली-भाली जनता को बरगलाने के लिए बाबा नहीं बने। भारतीय वैदिक संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए वे साधु बने हैं। कहा कि वे किसी की निंदा नहीं करते। लोग निंदा शब्द का अर्थ ही नहीं जानते।
दोष नहीं रहने पर भी जब दोष कहा जाए तो उसे निंदा कहते हैं। जब लोग सनातन परंपरा पर आघात करते हैं, तभी वे बोलते हैं। वाल्मीकि रामायण बताता है कि परमात्मा सभी गुणों से युक्त है। संसार में ऐसा कोई नहीं, जिसको राम ने नचाया न हो। रावण ने भी चैत्र रामनवमी को लंका में मांसाहार व मदिरा पर प्रतिबंध लगा दिया था। उन्होंने राम जन्म प्रसंग पर सोहर सुनाया तो श्रद्धालु झूम उठे। अंत में कथा के आयोजक विवेक तिवारी ने अपनी पत्नी के संग व्यास पीठ का पूजन किया। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी, घनश्याम चौहान, प्रमोद मिश्र मुन्ना, डॉ. आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप, विजयधर मिश्र, ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह रवि, महेंद्र मिश्र, रितेश दूबे, उदय प्रताप सिंह चौहान, पवन कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि वे त्रिदंडी साधु हैं। त्रिदंडी संन्यासी भिक्षु होते हैं, लेकिन संसार से कोई भिक्षा नहीं मांगते। वे सीतापति भगवान राम और हनुमान से भीख मांगते हैं। जो उनकी आलोचना करते हैं, वे सुन लें। वे चमत्कार के लिए या भोली-भाली जनता को बरगलाने के लिए बाबा नहीं बने। भारतीय वैदिक संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए वे साधु बने हैं। कहा कि वे किसी की निंदा नहीं करते। लोग निंदा शब्द का अर्थ ही नहीं जानते।
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दोष नहीं रहने पर भी जब दोष कहा जाए तो उसे निंदा कहते हैं। जब लोग सनातन परंपरा पर आघात करते हैं, तभी वे बोलते हैं। वाल्मीकि रामायण बताता है कि परमात्मा सभी गुणों से युक्त है। संसार में ऐसा कोई नहीं, जिसको राम ने नचाया न हो। रावण ने भी चैत्र रामनवमी को लंका में मांसाहार व मदिरा पर प्रतिबंध लगा दिया था। उन्होंने राम जन्म प्रसंग पर सोहर सुनाया तो श्रद्धालु झूम उठे। अंत में कथा के आयोजक विवेक तिवारी ने अपनी पत्नी के संग व्यास पीठ का पूजन किया। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी, घनश्याम चौहान, प्रमोद मिश्र मुन्ना, डॉ. आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप, विजयधर मिश्र, ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह रवि, महेंद्र मिश्र, रितेश दूबे, उदय प्रताप सिंह चौहान, पवन कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
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