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बच्चों के साथ खेल रहे मासूम के गले में फंस गया लॉकेट
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सुल्तानपुर। बच्चों के साथ खेल रहे एक मासूम ने सोमवार की सुबह जमीन पर पड़े एक लॉकेट मुंह में डाल लिया। मुंह में डालते ही लॉकेट बच्चे के गले में फंस गया।
बच्चे को तड़पता देख परिवारीजन उसे लेकर सीएचसी पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने बच्चे को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। ईएनटी (नाक-कान व गला) सर्जन ने बच्चे के गले में फंसा लॉकेट निकालकर उसकी जान बचा ली।
धनपतगंज क्षेत्र के अतरसुमा गांव निवासी सुरेश कुमार का सात महीने का बेटा शिवराज सोमवार की सुबह साढ़े सात बजे अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इस बीच जमीन पर पड़ा एक लॉकेट उठाकर शिवराज ने मुंह में डाल लिया। शिवराज को लॉकेट डालते हुए अन्य बच्चों ने देखा था।
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लॉकेट मुंह में डालते ही वह गले में फंस गया, जिससे शिवराज तड़पने लगा। शिवराज को तड़पता देखकर उसकी मां गुड़िया और पिता सुरेश उसे उठाकर सीएचसी धनपतगंज पहुंचे, जहां चिकित्सक ने उसकी हालत गंभीर देख जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
परिवारीजन शिवराज को लेकर जिला अस्पताल में तैनात ईएनटी सर्जन डॉ. पंकज पांडेय के पास पहुंचे। डॉ. पंकज ने बच्चे के गले में फंसा लॉकेट निकालकर उसकी जान बचा ली। शिवराज को सकुशल पाकर मां गुड़िया और पिता सुरेश भावुक हो गए और चिकित्सक का आभार जताया।
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बच्चे को तड़पता देख परिवारीजन उसे लेकर सीएचसी पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने बच्चे को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। ईएनटी (नाक-कान व गला) सर्जन ने बच्चे के गले में फंसा लॉकेट निकालकर उसकी जान बचा ली।
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धनपतगंज क्षेत्र के अतरसुमा गांव निवासी सुरेश कुमार का सात महीने का बेटा शिवराज सोमवार की सुबह साढ़े सात बजे अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इस बीच जमीन पर पड़ा एक लॉकेट उठाकर शिवराज ने मुंह में डाल लिया। शिवराज को लॉकेट डालते हुए अन्य बच्चों ने देखा था।
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लॉकेट मुंह में डालते ही वह गले में फंस गया, जिससे शिवराज तड़पने लगा। शिवराज को तड़पता देखकर उसकी मां गुड़िया और पिता सुरेश उसे उठाकर सीएचसी धनपतगंज पहुंचे, जहां चिकित्सक ने उसकी हालत गंभीर देख जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
परिवारीजन शिवराज को लेकर जिला अस्पताल में तैनात ईएनटी सर्जन डॉ. पंकज पांडेय के पास पहुंचे। डॉ. पंकज ने बच्चे के गले में फंसा लॉकेट निकालकर उसकी जान बचा ली। शिवराज को सकुशल पाकर मां गुड़िया और पिता सुरेश भावुक हो गए और चिकित्सक का आभार जताया।