{"_id":"69f4ebc56e154b07c9048197","slug":"lock-in-the-ultrasound-room-deployment-of-radiologist-stuck-in-papers-sultanpur-news-c-103-1-slp1007-155343-2026-05-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sultanpur News: अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला, कागजों में अटकी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sultanpur News: अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला, कागजों में अटकी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती
Fri, 01 May 2026 11:37 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Fri, 01 May 2026 11:37 PM IST
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज का बंद अल्ट्रासाउंड कक्ष। संवाद
सुल्तानपुर। जिले का मेडिकल कॉलेज पिछले तीन साल से स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की कमी से जूझ रहा है। इसका सीधा असर गरीब मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी जांच के लिए निजी केंद्रों पर मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। रोजाना 1,500 से अधिक मरीजों की ओपीडी वाले इस अस्पताल में हर दिन लगभग 200 मरीजों को अल्ट्रासाउंड की जरूरत होती है, लेकिन यह सुविधा हफ्ते में केवल दो दिन ही मिल पाती है।
प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर विरसिंहपुर अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. राधेश्याम यादव को सोमवार और बुधवार के लिए यहां संबद्ध किया है। हालांकि, उनकी ड्यूटी अन्य सरकारी कार्यों में लगने के कारण यह व्यवस्था भी अक्सर चरमरा जाती है। बीते सोमवार को डॉक्टर के कोर्ट ड्यूटी पर होने के कारण पूरे दिन अल्ट्रासाउंड कक्ष बंद रहा और मरीज भटकते रहे। इससे पहले तैनात अस्थायी डॉक्टर ने भी अगस्त 2025 में इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद से संकट और गहरा गया है।
अस्पताल में मुफ्त जांच की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों के लिए यह बदइंतजामी आर्थिक चोट साबित हो रही है। इलाज के लिए आईं रामरती को 900 रुपये और शिव बालक को अपने बेटे की जांच के लिए निजी लैब में 800 रुपये खर्च करने पड़े। सीएमएस डॉ. एससी गुप्ता ने बताया कि स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के लिए शासन को कई बार पत्र लिखा गया है, लेकिन अब तक विभाग को किसी विशेषज्ञ की तैनाती का इंतजार है।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर विरसिंहपुर अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. राधेश्याम यादव को सोमवार और बुधवार के लिए यहां संबद्ध किया है। हालांकि, उनकी ड्यूटी अन्य सरकारी कार्यों में लगने के कारण यह व्यवस्था भी अक्सर चरमरा जाती है। बीते सोमवार को डॉक्टर के कोर्ट ड्यूटी पर होने के कारण पूरे दिन अल्ट्रासाउंड कक्ष बंद रहा और मरीज भटकते रहे। इससे पहले तैनात अस्थायी डॉक्टर ने भी अगस्त 2025 में इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद से संकट और गहरा गया है।
विज्ञापन
अस्पताल में मुफ्त जांच की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों के लिए यह बदइंतजामी आर्थिक चोट साबित हो रही है। इलाज के लिए आईं रामरती को 900 रुपये और शिव बालक को अपने बेटे की जांच के लिए निजी लैब में 800 रुपये खर्च करने पड़े। सीएमएस डॉ. एससी गुप्ता ने बताया कि स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के लिए शासन को कई बार पत्र लिखा गया है, लेकिन अब तक विभाग को किसी विशेषज्ञ की तैनाती का इंतजार है।
विज्ञापन