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Sultanpur News: पारंपरिक खेती छोड़ की गेंदे की खेती, हो रहा मुनाफा
Mon, 10 Nov 2025 12:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Mon, 10 Nov 2025 12:00 AM IST
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कादीपुर। राईबीगो निवासी किसान आलोक बिसेन पारंपरिक खेती को छोड़कर गेंदे की खेती से मुनाफा कमा रहे हैं। इनके खेत में तैयार होने वाले गेंदे के फूल विजेथुआ महावीरन और अयोध्या धाम, जौनपुर, वाराणसी और लखनऊ तक पहुंच रहे हैं। सहालग शुरू होते ही अब इनके दाम 100-150 रुपये प्रति किग्रा तक पहुंच गए हैं।
आलोक ने खेती में नया प्रयोग करते हुए कम लागत और अधिक मुनाफे वाली फूलों की खेती का चयन किया। आज उनके खेतों में खिले गेंदे के फूल न सिर्फ क्षेत्र की शोभा बढ़ा रहे हैं, बल्कि बाजारों में अच्छी कीमत भी मिल रही है। बताया कि गेंदे के फूल की खेती ने आत्मनिर्भर बनाया। गेहूं एवं धान की फसल से कम लागत में फूलों से ज्यादा मुनाफा कमाया जा रहा है। तीन बीघे में तीन क्वालिटी के गेंदे की खेती की है। जिसमें जाफरी, टेनिस बॉल इंडेक्स और थाईलैंड गेंदा फूल की प्रजाति शामिल है।
फूल की खेती करने में उनकी लगभग डेढ़ लाख रुपये की लागत आई है। सीजन नहीं होने पर 80-100 रुपये किलो गेंदे का फूल बिकता है। इस समय सहालग शुरू हो गई है।
बॉक्स-
बाजार के अभाव में बंद कर दी थी फूल की खेती
आलोक बिसेन ने बताया कि 10 साल पहले उन्होंने फूल की खेती शुरू की थी। तब बाजार का अभाव था। इसलिए फूल की खेती बंद करनी पड़ी थी। इस बार फिर से फूल की खेती शुरू कर दी। बताया कि अब विजेथुआ महावीरन, अयोध्या धाम, जौनपुर, वाराणसी और लखनऊ तक फूल जा रहा है। खास बात यह है कि व्यापारी स्वयं आकर उनके खेत का तैयार फूल खरीदकर ले जा रहे हैं। आलोक बिसेन कहते हैं कि सही चयन और कड़ी मेहनत से किसान खेती में भी अपना भविष्य बना सकते हैं।
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आलोक ने खेती में नया प्रयोग करते हुए कम लागत और अधिक मुनाफे वाली फूलों की खेती का चयन किया। आज उनके खेतों में खिले गेंदे के फूल न सिर्फ क्षेत्र की शोभा बढ़ा रहे हैं, बल्कि बाजारों में अच्छी कीमत भी मिल रही है। बताया कि गेंदे के फूल की खेती ने आत्मनिर्भर बनाया। गेहूं एवं धान की फसल से कम लागत में फूलों से ज्यादा मुनाफा कमाया जा रहा है। तीन बीघे में तीन क्वालिटी के गेंदे की खेती की है। जिसमें जाफरी, टेनिस बॉल इंडेक्स और थाईलैंड गेंदा फूल की प्रजाति शामिल है।
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फूल की खेती करने में उनकी लगभग डेढ़ लाख रुपये की लागत आई है। सीजन नहीं होने पर 80-100 रुपये किलो गेंदे का फूल बिकता है। इस समय सहालग शुरू हो गई है।
बॉक्स-
बाजार के अभाव में बंद कर दी थी फूल की खेती
आलोक बिसेन ने बताया कि 10 साल पहले उन्होंने फूल की खेती शुरू की थी। तब बाजार का अभाव था। इसलिए फूल की खेती बंद करनी पड़ी थी। इस बार फिर से फूल की खेती शुरू कर दी। बताया कि अब विजेथुआ महावीरन, अयोध्या धाम, जौनपुर, वाराणसी और लखनऊ तक फूल जा रहा है। खास बात यह है कि व्यापारी स्वयं आकर उनके खेत का तैयार फूल खरीदकर ले जा रहे हैं। आलोक बिसेन कहते हैं कि सही चयन और कड़ी मेहनत से किसान खेती में भी अपना भविष्य बना सकते हैं।
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