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Sultanpur News: पीतल-कांसे के बर्तनों पर चढ़ा लेजर डिजाइन का रंग
Thu, 24 Sep 2026 12:43 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Thu, 24 Sep 2026 12:43 AM IST
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01. बर्तन की दुकान पर कांसे का बर्तन खरीदता ग्राहक। -संवाद
सुल्तानपुर। दीपावली नजदीक आते ही बाजार में पीतल और कांसे के बर्तनों की मांग बढ़ने लगी है। इस बार लेजर डिजाइन वाले बर्तन ग्राहकों को खासा आकर्षित कर रहे हैं। पूजा-पाठ के साथ घरेलू और सजावटी इस्तेमाल के लिए लोग इनकी खरीदारी कर रहे हैं। मांग को देखते हुए दुकानदार थाली, गिलास, कटोरी, लोटा, दीपक और पूजा सामग्री का स्टॉक बढ़ाने में जुट गए हैं।
बर्तन व्यापारी अनिल कुमार कसौधन ने बताया कि लेजर विधि से बने आधुनिक डिजाइन और आकर्षक नक्काशी वाले बर्तनों की मांग इस बार अधिक है। कई परिवार दिवाली पर नए बर्तन खरीदने की परंपरा के तहत पीतल और कांसे के बर्तन पसंद कर रहे हैं। आधुनिक कुकवेयर के दौर में पारंपरिक धातुओं के बर्तनों का आकर्षण बना है।
रीसेल में भी मिलती है अच्छी कीमत
धनपतगंज के चकिया निवासी काली सहाय ने बताया कि पीतल और कांसे के बर्तनों को इस्तेमाल के बाद बेचने पर भी अच्छी कीमत मिल जाती है। धातुओं की कीमत बढ़ने के कारण इनकी रीसेल वैल्यू भी लोगों को आकर्षित कर रही है।
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स्वास्थ्य पर भी बढ़ी जागरूकता
पुनीत पांडेय ने बताया कि लंबे समय से लोग पीतल-कांसे के बर्तनों का इस्तेमाल कम कर रहे थे। अब इनके इस्तेमाल को लेकर जानकारी बढ़ने से लोगों का रुझान फिर इनकी ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कांसे और पीतल के बर्तनों में बने खाद्य पदार्थों को वात-कफ के लिए लाभकारी बताया। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी दावों का वैज्ञानिक आधार अलग-अलग हो सकता है।
सादे से ढाई गुना तक महंगे लेजर डिजाइन
बर्तन कारोबारी दिनेश सेठ ने बताया कि दिवाली तक बिक्री में और तेजी आने की उम्मीद है। सादे पीतल और कांसे के बर्तन 1000 से 1500 रुपये किलो बिक रहे हैं। वहीं लेजर डिजाइन वाले बर्तनों की कीमत 2500 से 4000 रुपये किलो तक है। कीमत डिजाइन और कारीगरी के आधार पर तय होती है।
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बर्तन व्यापारी अनिल कुमार कसौधन ने बताया कि लेजर विधि से बने आधुनिक डिजाइन और आकर्षक नक्काशी वाले बर्तनों की मांग इस बार अधिक है। कई परिवार दिवाली पर नए बर्तन खरीदने की परंपरा के तहत पीतल और कांसे के बर्तन पसंद कर रहे हैं। आधुनिक कुकवेयर के दौर में पारंपरिक धातुओं के बर्तनों का आकर्षण बना है।
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रीसेल में भी मिलती है अच्छी कीमत
धनपतगंज के चकिया निवासी काली सहाय ने बताया कि पीतल और कांसे के बर्तनों को इस्तेमाल के बाद बेचने पर भी अच्छी कीमत मिल जाती है। धातुओं की कीमत बढ़ने के कारण इनकी रीसेल वैल्यू भी लोगों को आकर्षित कर रही है।
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स्वास्थ्य पर भी बढ़ी जागरूकता
पुनीत पांडेय ने बताया कि लंबे समय से लोग पीतल-कांसे के बर्तनों का इस्तेमाल कम कर रहे थे। अब इनके इस्तेमाल को लेकर जानकारी बढ़ने से लोगों का रुझान फिर इनकी ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कांसे और पीतल के बर्तनों में बने खाद्य पदार्थों को वात-कफ के लिए लाभकारी बताया। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी दावों का वैज्ञानिक आधार अलग-अलग हो सकता है।
सादे से ढाई गुना तक महंगे लेजर डिजाइन
बर्तन कारोबारी दिनेश सेठ ने बताया कि दिवाली तक बिक्री में और तेजी आने की उम्मीद है। सादे पीतल और कांसे के बर्तन 1000 से 1500 रुपये किलो बिक रहे हैं। वहीं लेजर डिजाइन वाले बर्तनों की कीमत 2500 से 4000 रुपये किलो तक है। कीमत डिजाइन और कारीगरी के आधार पर तय होती है।