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Sultanpur News: मेधा-हाजिरी के दम पर तय होंगे परीक्षा केंद्र
Thu, 24 Sep 2026 11:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Thu, 24 Sep 2026 11:46 PM IST
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सुल्तानपुर। यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए अब केवल भवन और संसाधनों के आधार पर परीक्षा केंद्र बनना आसान नहीं होगा। विद्यालयों में विद्यार्थियों की नियमित ऑनलाइन उपस्थिति और उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को भी केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया में शामिल किया गया है। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वर्ष 2027 की बोर्ड परीक्षा के लिए नई नीति जारी की है। इसके तहत विद्यालयों की रैंकिंग के आधार पर परीक्षा केंद्रों का निर्धारण किया जाएगा।
पिछले वर्ष जिले में 122 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इन केंद्रों पर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के कुल 76,694 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी। इस बार केंद्र बनने के इच्छुक विद्यालयों को नई व्यवस्था में तय मानकों पर खरा उतरना होगा।
नई नीति में विद्यार्थियों की बायोमीट्रिक अथवा ऑनलाइन दर्ज होने वाली दैनिक उपस्थिति को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। लगातार 180 दिन ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने वाले विद्यालयों को परीक्षा केंद्र निर्धारण में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम और विद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों के प्रदर्शन को भी स्कूल की रेटिंग में शामिल किया जाएगा। यानी परीक्षा केंद्र के लिए विद्यालय की शैक्षणिक स्थिति और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
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राजकीय और एडेड स्कूलों को पहली वरीयता
सह जिला विद्यालय निरीक्षक जटाशंकर ने बताया कि परीक्षा केंद्र निर्धारण में राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों को पहली वरीयता दी जाएगी। वित्तविहीन विद्यालयों को तभी परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा, जब निर्धारित दूरी और अन्य मानकों के अनुसार राजकीय व सहायता प्राप्त विद्यालयों से आवश्यकता पूरी न हो सके।
180 दिन की ऑनलाइन हाजिरी जरूरी
डीआईओएस कार्यालय के परीक्षा प्रभारी जितेंद्र दुबे ने बताया कि नई नीति में लगातार 180 दिन ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने वाले विद्यालयों को केंद्र निर्धारण में प्राथमिकता मिलेगी। विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन को भी विद्यालय की रेटिंग का हिस्सा बनाया गया है।
बोर्ड परीक्षा केंद्र निर्धारण के लिए इस बार ऑनलाइन उपस्थिति पर विशेष जोर दिया जा रहा है। परिषद ने केंद्र निर्धारण की नई नीति जारी की है।
— सूर्य प्रकाश सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक
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पिछले वर्ष जिले में 122 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इन केंद्रों पर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के कुल 76,694 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी। इस बार केंद्र बनने के इच्छुक विद्यालयों को नई व्यवस्था में तय मानकों पर खरा उतरना होगा।
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नई नीति में विद्यार्थियों की बायोमीट्रिक अथवा ऑनलाइन दर्ज होने वाली दैनिक उपस्थिति को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। लगातार 180 दिन ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने वाले विद्यालयों को परीक्षा केंद्र निर्धारण में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम और विद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों के प्रदर्शन को भी स्कूल की रेटिंग में शामिल किया जाएगा। यानी परीक्षा केंद्र के लिए विद्यालय की शैक्षणिक स्थिति और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
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राजकीय और एडेड स्कूलों को पहली वरीयता
सह जिला विद्यालय निरीक्षक जटाशंकर ने बताया कि परीक्षा केंद्र निर्धारण में राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों को पहली वरीयता दी जाएगी। वित्तविहीन विद्यालयों को तभी परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा, जब निर्धारित दूरी और अन्य मानकों के अनुसार राजकीय व सहायता प्राप्त विद्यालयों से आवश्यकता पूरी न हो सके।
180 दिन की ऑनलाइन हाजिरी जरूरी
डीआईओएस कार्यालय के परीक्षा प्रभारी जितेंद्र दुबे ने बताया कि नई नीति में लगातार 180 दिन ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने वाले विद्यालयों को केंद्र निर्धारण में प्राथमिकता मिलेगी। विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन को भी विद्यालय की रेटिंग का हिस्सा बनाया गया है।
बोर्ड परीक्षा केंद्र निर्धारण के लिए इस बार ऑनलाइन उपस्थिति पर विशेष जोर दिया जा रहा है। परिषद ने केंद्र निर्धारण की नई नीति जारी की है।
— सूर्य प्रकाश सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक