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दवाओं के खेल में जन औषधि केंद्र फेल

Mon, 22 Aug 2022 11:27 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 22 Aug 2022 11:27 PM IST
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jan aushadhi kendra
जन औषधि केंद्र पर दवाओं की खरीदारी करते लोग। - फोटो : SULTANPUR
सुल्तानपुर। दवाओं के खेल में जिले में खुले जन औषधि केंद्र फेल साबित हो रहे हैं। जिले में खुले कई जन औषधि केंद्र बंद हो चुके हैं। अधिकतर केंद्रों पर सीमित दवाएं ही उपलब्ध हैं। जन औषधि केंद्र पर वही दवाएं उपलब्ध हैं, जिसे उस क्षेत्र विशेष के चिकित्सक आमतौर पर लिखते हैं। ऐसे में मरीजों व तीमारदारों को मजबूरी में बाहर की महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
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सरकार ने लोगों को सस्ती दर पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जन औषधि केंद्रों के संचालन की व्यवस्था की थी। शुरुआत में इसका जोर-शोर से प्रचार हुआ। इसके संचालन के लिए तमाम लोग सामने आए। देखते ही देखते जिले में करीब 20 जन औषधि केंद्र खुल गए। इसमें कुछ स्वास्थ्य केंद्र परिसर में खुले तो कई का बाजारों में संचालन शुरू हुआ। हालांकि दवाओं की प्रतिस्पर्धा में ये केंद्र लंबे समय तक टिक नहीं सके। वर्तमान समय में शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक आठ केंद्र बंद हो चुके हैं। बंद होने वाले केंद्रों में छह ग्रामीण अंचल के और दो शहर के हैं। 10 केंद्र अभी दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इसमें जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल के साथ ही शहर का एक केंद्र है जबकि सात ग्रामीण अंचल के हैं।
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ग्रामीण अंचल के केंद्रों में तीन अलग-अलग सीएचसी परिसर में चल रहे हैं जबकि चार बाजारों में खुले हैं। जन औषधि केंद्रों की नाकामी के पीछे इसका प्रचार-प्रसार नहीं हो पाना बड़ी वजह बना। केंद्रों से अपेक्षित मात्रा में दवाओं की बिक्री नहीं होने से संचालकों ने अपने हाथ खड़े कर रहे हैं। निजी चिकित्सकों के साथ ही सरकारी चिकित्सकों ने भी अपेक्षित सहयोग नहीं किया। अधिकतर चिकित्सकों के अपने तय मेडिकल स्टोर हैं। इसके साथ ही दवा कंपनियों से उनके कमीशन भी निर्धारित हैं।
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जिला मुख्यालय पर खुले जन औषधि केंद्रों की तुलना में ग्रामीण अंचल के केंद्रों में दवाओं की उपलब्धता कम रहती है। ऐसे में मरीज या तीमारदार भी उस स्थान पर जाना चाहते हैं, जहां उन्हें सारी दवाएं एक साथ मिल जाएं। एसीएमओ/जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एएन राय ने बताया कि इस मामले की जांच कराई जाएगी। चिकित्सकों को जन औषधि केंद्र की दवाएं लिखने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
475 प्रकार की दवाएं उपलब्ध
जिला अस्पताल के जन औषधि केंद्र के प्रबंधक मुकेश कुमार ने बताया कि केंद्र की दवाएं गुरुग्राम से आती हैं। हम जेनरिक दवा ही बेच सकते हैं। अपनी तरफ से कोई अतिरिक्त दवा नहीं रख सकते हैं। दवाओं पर 20 फीसदी कमीशन मिलता है। एक्सपायरी दवाओं की वापसी नहीं होने के कारण मजबूरी में कम दवाएं रखते हैं। वर्तमान समय में केंद्र पर 475 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं।
दो माह में डॉक्टरों ने नहीं लिखी एक भी दवा
सीएचसी कुड़वार में खुले जन औषधि केंद्र के संचालक अशोक शुक्ला ने बताया कि दो माह में चिकित्सकों ने औषधि केंद्र की एक भी दवा मरीजों को नहीं लिखी है। ऐसे में दवा की मांग ही बंद है। अगर यही हाल रहा तो केंद्र बंद करना पड़ सकता है।

चिकित्सक लिखते बाहर की दवा
कू्रेभार में जन औषधि केंद्र के संचालक शोभित श्रीवास्तव का कहना है कि चिकित्सक मरीजों को जन औषधि केंद्र की दवा लिखते ही नहीं हैं। अधिकतर चिकित्सक मरीजों को बाहर की ब्रांडेड दवाएं लिखते हैं। अगर किसी मरीज ने जन औषधि केंद्र की दवा खरीद भी ली तो चिकित्सक उसे वापस करवा देते हैं।
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