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धरोहर बनेंगे जिले के सैकड़ों वर्ष पुराने पेड़
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सुल्तानपुर। सरकार मंशा साकार हुई तो जिले के भी तमाम पुराने पेड़ धरोहर के श्रेणी में शामिल होंगे। पुराने बरगद, पीपल के अलावा कल्पवृक्ष के दिन बहुरने की उम्मीद जाग गई है।
वृक्षारोपण महाकुंभ में जिले के कल्पवृक्ष समेत सैकड़ों पुराने पेड़ों को हेरिटेज (धरोहर) में शामिल कर उनकी स्मारिका तैयार की जाएगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों की आस्था भी पेड़ों के प्रति बढ़ेगी। वन विभाग की ओर से जिले के प्राचीन पेड़ों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने वृक्षारोपण महाकुंभ में वर्षों पुराने पेड़ों को संरक्षित करने के लिए उन्हें हेरिटेज बनाकर उनकी स्मारिका बनाने की घोषणा की है।
जिले में भी पुराने बरगद, पीपल समेत अन्य कई प्रजातियों के कई साल पुराने ऐसे पेड़ हैं, जहां आज भी लोगों की आस्था जुड़ी है। यहां पर लोग पूजा-पाठ करते हैं। शहर के सिविल लाइंस स्थित कल्पवृक्ष के पेड़ का इतिहास भी सदियों पुराना है।
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जिले के शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे पेड़ों की जानकारियां वन विभाग पता करेगा। इन पेड़ों को हेरिटेज में शामिल करते हुए उनकी स्मारिका तैयार कराई जाएगी। इससे पुराने पेड़ों की सुरक्षा व संरक्षण भी होगा।
शहर के पर्यावरण पार्क के निकट स्थित कल्पवृक्ष सैकड़ों वर्ष पुराना है। इसके संबंध में तमाम मान्यताएं हैं। इसी प्रजाति का पेड़ बाराबंकी जनपद में भी है। पिछले कुछ वर्षो में यह पेड़ सूखने की कगार पर पहुंच गया था।
हालांकि कुछ समाजसेवी संगठनों के प्रयास से इसे पुन: संरक्षित किया जा सका है। इस समय इसकी देखरेख कल्पवृक्ष सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट कर रहा है। ट्रस्ट के अंकित श्रीवास्तव ने बताया कि कल्पवृक्ष पर प्रत्येक एकादशी को धार्मिक अनुष्ठान होता है।
स्थानीय कस्बे में स्थित शिव मंदिर के पास पुराना पीपल के पेड़ भी लोगों की आस्था का केंद्र है। स्थानीय लोग विशेष अवसरों व सामान्य दिनों में भी इस पेड़ पर पूजा-पाठ कर जल चढ़ाते हैं । गांव के बुजुर्ग इसकी आयु सैकड़ों वर्ष बताते हैं। इस विशालकाय पीपल के पेड़ पर शादी विवाह में भी माथा टेकने की परंपरा है।
क्षेत्रीय वनाधिकारी अमरजीत मिश्र ने बताया कि जिले में भी बड़ी संख्या में प्राचीन पेड़ है। इनके संरक्षण के बारे में अभी कोई आदेश मुख्यालय से प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश मिलने पर प्राचीन पेड़ों के बारे में रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
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वृक्षारोपण महाकुंभ में जिले के कल्पवृक्ष समेत सैकड़ों पुराने पेड़ों को हेरिटेज (धरोहर) में शामिल कर उनकी स्मारिका तैयार की जाएगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों की आस्था भी पेड़ों के प्रति बढ़ेगी। वन विभाग की ओर से जिले के प्राचीन पेड़ों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी।
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने वृक्षारोपण महाकुंभ में वर्षों पुराने पेड़ों को संरक्षित करने के लिए उन्हें हेरिटेज बनाकर उनकी स्मारिका बनाने की घोषणा की है।
जिले में भी पुराने बरगद, पीपल समेत अन्य कई प्रजातियों के कई साल पुराने ऐसे पेड़ हैं, जहां आज भी लोगों की आस्था जुड़ी है। यहां पर लोग पूजा-पाठ करते हैं। शहर के सिविल लाइंस स्थित कल्पवृक्ष के पेड़ का इतिहास भी सदियों पुराना है।
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जिले के शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे पेड़ों की जानकारियां वन विभाग पता करेगा। इन पेड़ों को हेरिटेज में शामिल करते हुए उनकी स्मारिका तैयार कराई जाएगी। इससे पुराने पेड़ों की सुरक्षा व संरक्षण भी होगा।
शहर के पर्यावरण पार्क के निकट स्थित कल्पवृक्ष सैकड़ों वर्ष पुराना है। इसके संबंध में तमाम मान्यताएं हैं। इसी प्रजाति का पेड़ बाराबंकी जनपद में भी है। पिछले कुछ वर्षो में यह पेड़ सूखने की कगार पर पहुंच गया था।
हालांकि कुछ समाजसेवी संगठनों के प्रयास से इसे पुन: संरक्षित किया जा सका है। इस समय इसकी देखरेख कल्पवृक्ष सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट कर रहा है। ट्रस्ट के अंकित श्रीवास्तव ने बताया कि कल्पवृक्ष पर प्रत्येक एकादशी को धार्मिक अनुष्ठान होता है।
स्थानीय कस्बे में स्थित शिव मंदिर के पास पुराना पीपल के पेड़ भी लोगों की आस्था का केंद्र है। स्थानीय लोग विशेष अवसरों व सामान्य दिनों में भी इस पेड़ पर पूजा-पाठ कर जल चढ़ाते हैं । गांव के बुजुर्ग इसकी आयु सैकड़ों वर्ष बताते हैं। इस विशालकाय पीपल के पेड़ पर शादी विवाह में भी माथा टेकने की परंपरा है।
क्षेत्रीय वनाधिकारी अमरजीत मिश्र ने बताया कि जिले में भी बड़ी संख्या में प्राचीन पेड़ है। इनके संरक्षण के बारे में अभी कोई आदेश मुख्यालय से प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश मिलने पर प्राचीन पेड़ों के बारे में रिपोर्ट तैयार की जाएगी।