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बर्ड फ्लू को लेकर जिले में हाई अलर्ट
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सुल्तानपुर। देश के कई राज्यों में फैले बर्ड फ्लू को लेकर जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। इसे लेकर शुक्रवार को जिलाधिकारी ने हाई अलर्ट घोषित किया।
डीएम ने एसडीएम की अध्यक्षता में तहसील स्तरीय छह सदस्यीय टीम के साथ और खुद की अगुवाई में 10 सदस्यीय जिला स्तरीय टीम गठित की है। सीवीओ कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है।
जिले में बर्ड फ्लू को लेकर जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी रवीश गुप्ता ने बैठक के बाद मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रमाशंकर सिंह को निर्देश दिया कि वे बर्ड फ्लू के बारे में लोगों को अवगत कराएं। सतर्कता को लेकर जिला व तहसील स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है।
इसके साथ ही पशु चिकित्साधिकारियों को पोल्ट्री फार्मों के नियमित निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय में कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है। कोई भी व्यक्ति कंट्रोल रूम के 05362-241047 नंबर बर्ड फ्लू से संबंधित सूचना दे सकता है। सूचना मिलते ही चिकित्सक और पशु चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंचेगी।
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डीएम की अध्यक्षता में जिला स्तरीय टीम करेगी कार्य
बर्ड फ्लू से निपटने के लिए जिलाधिकारी ने जिला व तहसील स्तरीय रैपिड रिस्पांस टीम गठित की है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय टीम में सीएमओ, सीवीओ, डीएफओ, एडीएम वित्त, सीआरओ, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, एक्सईएन सिंचाई, डीपीआरओ व सूचना अधिकारी को रखा गया है।
उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित तहसील स्तरीय टीम में उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सीएमओ की ओर से नामित चिकित्साधिकारी, क्षेत्रीय वन अधिकारी, सहायक अभियंता सिंचाई, नगर निकाय, पंचायत राज्य, कर व निबंधन, पर्यावरण के साथ तहसील या ब्लॉक के अधिकारी शामिल किए गए हैं।
कैसे होता है बर्ड फ्लू
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रमाशंकर सिंह के मुताबिक बर्ड फ्लू एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस (एच5 एन1) की वजह से होता है। यह एक वायरल इंफेक्शन है, जो संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले अन्य पक्षियों, जानवरों और इंसानों में फैलता है। इसके बढ़ते मामलों को देखते हुए कई राज्यों में पक्षियों को मारने का अभियान शुरू किया गया है।
बर्ड फ्लू कई तरह के होते हैं लेकिन एच5 एल1 पहला ऐसा एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस है जो इंसानों को संक्रमित करता है। बर्ड फ्लू प्रवासी जलीय पक्षियों खासतौर से जंगली बतख से प्राकृतिक रूप से फैलता है। ये पालतू मुर्गियों में आसानी से फैल जाता है।
ये बीमारी संक्रमित पक्षी के मल, नाक के स्राव, मुंह के लार या आंखों से निकलने वाले पानी के संपर्क में आने से होती है। संक्रमित जगहों पर जाने वाले, संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले, कच्चा या अधपका मुर्गा-अंडा खाने वाले या संक्रमित मरीजों की देखभाल करने वाले लोगों को भी बर्ड फ्लू हो सकता है।
बर्ड फ्लू के लक्षण
सीएमओ-डॉ. डीके त्रिपाठी के मुताबिक बर्ड फ्लू होने पर कफ, डायरिया, बुखार, सांस से जुड़ी दिक्कत, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, पेट दर्द, उल्टी, निमोनिया गले में खरास, नाक बहना, बेचैनी, आंखों में इंफेक्शन जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर किसी और के संपर्क में आने से पहले चिकित्सक को दिखाएं। जिले की सभी सीएचसी पर चिकित्सकों को अलर्ट पर रखा गया है।
कैसे करें बचाव
सीएमओ डॉ. डीके त्रिपाठी ने बताया कि बर्ड फ्लू से बचने के लिए हाथों को बार-बार साबुन से धोएं। हाथ न धो पाने की स्थिति में सैनिटाइज करें। संक्रमित पोल्ट्री फार्म में जाने और वहां काम कर रहे लोगों के संपर्क में आने से बचें। पोल्ट्री फार्म में काम करने या जाने वाले लोगों को पीपीई किट पहन कर जाना चाहिए।
डिस्पोजेबल ग्लव्स पहनें और इस्तेमाल के बाद इन्हें नष्ट कर दें। पूरे बाजू के कपड़े पहनें और अपने जूतों को डिस्इनफेक्ट करते रहें। छींकने या खांसने से पहले मुंह को अच्छे से कवर करें। सांस के संक्रमण से बचने के लिए मास्क पहनें। इस्तेमाल के बाद टिश्यू पेपर को डस्टबिन में डालें। बर्ड फ्लू की कोई वैक्सीन नहीं है। इसलिए बचाव के लिए फ्लू की वैक्सीन भी लगवा सकते हैं।
बर्ड फ्लू से निपटने के लिए जिले में टास्क फोर्स टीम का गठन कर दिया गया है। पक्षियों पर नजर रखने का निर्देश पशु पालन विभाग को दिया गया है। पशु पालन विभाग की टीम पक्षियों का टीकाकरण कराते हुए संक्रमण की रोकथाम करेगी। -रवीश गुप्ता, डीएम
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डीएम ने एसडीएम की अध्यक्षता में तहसील स्तरीय छह सदस्यीय टीम के साथ और खुद की अगुवाई में 10 सदस्यीय जिला स्तरीय टीम गठित की है। सीवीओ कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है।
जिले में बर्ड फ्लू को लेकर जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी रवीश गुप्ता ने बैठक के बाद मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रमाशंकर सिंह को निर्देश दिया कि वे बर्ड फ्लू के बारे में लोगों को अवगत कराएं। सतर्कता को लेकर जिला व तहसील स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है।
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इसके साथ ही पशु चिकित्साधिकारियों को पोल्ट्री फार्मों के नियमित निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय में कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है। कोई भी व्यक्ति कंट्रोल रूम के 05362-241047 नंबर बर्ड फ्लू से संबंधित सूचना दे सकता है। सूचना मिलते ही चिकित्सक और पशु चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंचेगी।
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डीएम की अध्यक्षता में जिला स्तरीय टीम करेगी कार्य
बर्ड फ्लू से निपटने के लिए जिलाधिकारी ने जिला व तहसील स्तरीय रैपिड रिस्पांस टीम गठित की है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय टीम में सीएमओ, सीवीओ, डीएफओ, एडीएम वित्त, सीआरओ, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, एक्सईएन सिंचाई, डीपीआरओ व सूचना अधिकारी को रखा गया है।
उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित तहसील स्तरीय टीम में उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सीएमओ की ओर से नामित चिकित्साधिकारी, क्षेत्रीय वन अधिकारी, सहायक अभियंता सिंचाई, नगर निकाय, पंचायत राज्य, कर व निबंधन, पर्यावरण के साथ तहसील या ब्लॉक के अधिकारी शामिल किए गए हैं।
कैसे होता है बर्ड फ्लू
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रमाशंकर सिंह के मुताबिक बर्ड फ्लू एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस (एच5 एन1) की वजह से होता है। यह एक वायरल इंफेक्शन है, जो संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले अन्य पक्षियों, जानवरों और इंसानों में फैलता है। इसके बढ़ते मामलों को देखते हुए कई राज्यों में पक्षियों को मारने का अभियान शुरू किया गया है।
बर्ड फ्लू कई तरह के होते हैं लेकिन एच5 एल1 पहला ऐसा एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस है जो इंसानों को संक्रमित करता है। बर्ड फ्लू प्रवासी जलीय पक्षियों खासतौर से जंगली बतख से प्राकृतिक रूप से फैलता है। ये पालतू मुर्गियों में आसानी से फैल जाता है।
ये बीमारी संक्रमित पक्षी के मल, नाक के स्राव, मुंह के लार या आंखों से निकलने वाले पानी के संपर्क में आने से होती है। संक्रमित जगहों पर जाने वाले, संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले, कच्चा या अधपका मुर्गा-अंडा खाने वाले या संक्रमित मरीजों की देखभाल करने वाले लोगों को भी बर्ड फ्लू हो सकता है।
बर्ड फ्लू के लक्षण
सीएमओ-डॉ. डीके त्रिपाठी के मुताबिक बर्ड फ्लू होने पर कफ, डायरिया, बुखार, सांस से जुड़ी दिक्कत, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, पेट दर्द, उल्टी, निमोनिया गले में खरास, नाक बहना, बेचैनी, आंखों में इंफेक्शन जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर किसी और के संपर्क में आने से पहले चिकित्सक को दिखाएं। जिले की सभी सीएचसी पर चिकित्सकों को अलर्ट पर रखा गया है।
कैसे करें बचाव
सीएमओ डॉ. डीके त्रिपाठी ने बताया कि बर्ड फ्लू से बचने के लिए हाथों को बार-बार साबुन से धोएं। हाथ न धो पाने की स्थिति में सैनिटाइज करें। संक्रमित पोल्ट्री फार्म में जाने और वहां काम कर रहे लोगों के संपर्क में आने से बचें। पोल्ट्री फार्म में काम करने या जाने वाले लोगों को पीपीई किट पहन कर जाना चाहिए।
डिस्पोजेबल ग्लव्स पहनें और इस्तेमाल के बाद इन्हें नष्ट कर दें। पूरे बाजू के कपड़े पहनें और अपने जूतों को डिस्इनफेक्ट करते रहें। छींकने या खांसने से पहले मुंह को अच्छे से कवर करें। सांस के संक्रमण से बचने के लिए मास्क पहनें। इस्तेमाल के बाद टिश्यू पेपर को डस्टबिन में डालें। बर्ड फ्लू की कोई वैक्सीन नहीं है। इसलिए बचाव के लिए फ्लू की वैक्सीन भी लगवा सकते हैं।
बर्ड फ्लू से निपटने के लिए जिले में टास्क फोर्स टीम का गठन कर दिया गया है। पक्षियों पर नजर रखने का निर्देश पशु पालन विभाग को दिया गया है। पशु पालन विभाग की टीम पक्षियों का टीकाकरण कराते हुए संक्रमण की रोकथाम करेगी। -रवीश गुप्ता, डीएम