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चोरों का भय : टूटी 44 साल की परंपरा, दिन में होगी रामलीला
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करौंदीकलां के बांगरकलां में रामलीला का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : करौंदीकलां के बांगरकलां में रामलीला का मंचन करते कलाकार।
करौंदीकला। बांगर कला में होने वाली रामलीला का इस बार दिन में मंचन किया जाएगा। 44 साल में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब परंपरा बदली गई है। वर्ष 1979 में महंत बहादुर सिंह के प्रयास से स्थापित रामलीला समिति ने इस बार दशहरे के बाद होने वाली रामलीला को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। दशहरे के अगले दिन से रात में होने वाली रामलीला का मंचन अब दिन में किया जाएगा। समिति के महामंत्री विजय उपाध्याय ने बताया कि क्षेत्र में हो रही लगातार चोरियों और ड्रोन की अफवाह से फैली दहशत के कारण सुरक्षा को देखते हुए मंचन का समय बदला गया है। अब यह रामलीला दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक होगी। रामलीला तीन से 10 अक्तूबर तक चलेगी, जबकि परंपरागत विजयदशमी व मेला 11 अक्तूबर को आयोजित किया जाएगा।
समिति की बैठक में लिया गया निर्णय
रामलीला का मंचन दिन में किए जाने के निर्णय से पहले समिति की बैठक हुई। इसमें समिति के अध्यक्ष अमरनाथ सिंह, उपाध्यक्ष रत्नाकर सिंह, प्रबंधक चंद्रदेव मिश्रा, कोषाध्यक्ष दिवाकर सिंह, उपनिदेशक अमर बहादुर, संगठन मंत्री अमित मिश्रा, संचालक कपिल देव यादव सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। समिति के पदाधिकारी व सदस्यों ने लोगों से अनुरोध किया कि वे समय पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर ऐतिहासिक रामलीला का हिस्सा बनें।
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समिति की बैठक में लिया गया निर्णय
रामलीला का मंचन दिन में किए जाने के निर्णय से पहले समिति की बैठक हुई। इसमें समिति के अध्यक्ष अमरनाथ सिंह, उपाध्यक्ष रत्नाकर सिंह, प्रबंधक चंद्रदेव मिश्रा, कोषाध्यक्ष दिवाकर सिंह, उपनिदेशक अमर बहादुर, संगठन मंत्री अमित मिश्रा, संचालक कपिल देव यादव सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। समिति के पदाधिकारी व सदस्यों ने लोगों से अनुरोध किया कि वे समय पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर ऐतिहासिक रामलीला का हिस्सा बनें।
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