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कायम रहा सदर विधानसभा क्षेत्र का मिथक
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सुल्तानपुर। आजादी के बाद से सदर (जयसिंहपुर) विधानसभा क्षेत्र का चला आ रहा मिथक इस चुनाव में भी कायम रहा। सदर में भाजपा प्रत्याशी की जीत के साथ ही प्रदेश में भाजपा का स्पष्ट बहुमत मिलने से सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है।
सदर विधानसभा क्षेत्र के बारे में आजादी के बाद से ही यह मिथक चला आ रहा है कि यहां जिस पार्टी का विधायक चुना जाता है, प्रदेश में उसी की सरकार बनती है। ऐसा वर्ष 1951 से लेकर अब तक का चुनावी इतिहास बताता है। इस बार के चुनाव में सदर विधानसभा क्षेत्र का मिथक फिर कायम रहा है। सदर विधानसभा क्षेत्र से लगातार चुनाव में तीसरी बार तकदीर आजमाने वाले भाजपा प्रत्याशी राजप्रसाद उपाध्याय विजयी हुए हैं। राजप्रसाद उपाध्याय की जीत के साथ ही प्रदेश में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिल गया है। भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने से प्रदेश में सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है।
फायदेमंद साबित हुआ दलबदल
जिले के दो विधानसभा क्षेत्र के दो ऐसे प्रत्याशी ऐसे हैं, जिनके लिए दलबदल फायदेमंद साबित हुआ है। लगातार बसपा के टिकट से तीन बार तकदीर आजमा रहे पूर्व मंत्री विनोद सिंह को वर्ष 2007 में लंभुआ से एक बार जीत हासिल हुई थी। इसके बाद उन्होंने बसपा के टिकट पर लगातार वर्ष 2012 व 2017 में तकदीर आजमाई लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। दोनों बार वे रनर तक ही सीमित रहे। वर्ष 2022 में उन्होंने पार्टी व क्षेत्र बदलकर फिर तकदीर आजमाई। कड़े संघर्ष में उन्हें क्षेत्र व पार्टी बदलने का फायदा मिला। सदर विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीसरे प्रयास में भाजपा प्रत्याशी राजप्रसाद उपाध्याय को सफलता हाथ लगी है। इसके पहले राजप्रसाद उपाध्याय ने वर्ष 2012 व वर्ष 2017 में बसपा के टिकट पर तकदीर आजमाई थी लेकिन दोनों बार वे रनर ही रहे। इस बार पार्टी बदलकर उन्होंने तकदीर आजमाई और सफल हुए।
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सदर विधानसभा क्षेत्र के बारे में आजादी के बाद से ही यह मिथक चला आ रहा है कि यहां जिस पार्टी का विधायक चुना जाता है, प्रदेश में उसी की सरकार बनती है। ऐसा वर्ष 1951 से लेकर अब तक का चुनावी इतिहास बताता है। इस बार के चुनाव में सदर विधानसभा क्षेत्र का मिथक फिर कायम रहा है। सदर विधानसभा क्षेत्र से लगातार चुनाव में तीसरी बार तकदीर आजमाने वाले भाजपा प्रत्याशी राजप्रसाद उपाध्याय विजयी हुए हैं। राजप्रसाद उपाध्याय की जीत के साथ ही प्रदेश में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिल गया है। भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने से प्रदेश में सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है।
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फायदेमंद साबित हुआ दलबदल
जिले के दो विधानसभा क्षेत्र के दो ऐसे प्रत्याशी ऐसे हैं, जिनके लिए दलबदल फायदेमंद साबित हुआ है। लगातार बसपा के टिकट से तीन बार तकदीर आजमा रहे पूर्व मंत्री विनोद सिंह को वर्ष 2007 में लंभुआ से एक बार जीत हासिल हुई थी। इसके बाद उन्होंने बसपा के टिकट पर लगातार वर्ष 2012 व 2017 में तकदीर आजमाई लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। दोनों बार वे रनर तक ही सीमित रहे। वर्ष 2022 में उन्होंने पार्टी व क्षेत्र बदलकर फिर तकदीर आजमाई। कड़े संघर्ष में उन्हें क्षेत्र व पार्टी बदलने का फायदा मिला। सदर विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीसरे प्रयास में भाजपा प्रत्याशी राजप्रसाद उपाध्याय को सफलता हाथ लगी है। इसके पहले राजप्रसाद उपाध्याय ने वर्ष 2012 व वर्ष 2017 में बसपा के टिकट पर तकदीर आजमाई थी लेकिन दोनों बार वे रनर ही रहे। इस बार पार्टी बदलकर उन्होंने तकदीर आजमाई और सफल हुए।
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