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मुकाबले में भी नहीं रहे कांग्रेस प्रत्याशी
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सुल्तानपुर। विधानसभा चुनाव में जिले की पांचों सीटों पर बृहस्पतिवार को हुई मतगणना में कांग्रेस प्रत्याशियों की शर्मनाक पराजय हुई है। कांग्रेस प्रत्याशी पार्टी की लाज बचा पाने में नाकाम रहे। चुनाव में जीत हासिल करने की बात तो दूर, वे मुख्य मुकाबले में भी नहीं आ पाए है। युवा चेहरे पर दांव लगाना पार्टी को महंगा पड़ गया है। पार्टी की उम्मीदों पर युवा चेहरे खरे नहीं उतर पाए।
कांग्रेस ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव को एक चुनौती के रूप में लेते हुए पार्टी की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी वाड्रा को यूपी का प्रभारी बनाया था। वे प्रदेश में काफी दिनों से सक्रिय भी रही थी। उनके दिशा-निर्देश पर प्रदेश से लेकर जिले में विभिन्न जन समस्याओं को लेकर कांग्रेस धरना-प्रदर्शन करती रही है। केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार को कांग्रेसी लगभग सभी मुद्दों पर घेरते रहे हैं। संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने की कवायद काफी दिनों से कांग्रेस में चल रही थी। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में इसौली के अलावा चारों सीटों पर युवा चेहरों पर दांव लगाया था। पार्टी ने सदर से जिलाध्यक्ष अभिषेक सिंह राणा को, सुल्तानपुर से फिरोज अहमद को, कादीपुर से जिला पंचायत सदस्य निकलेश सरोज को और लंभुआ से विनय विक्रम को चुनाव लड़ाया।
पार्टी को भरोसा था कि ये प्रत्याशी युवा होने के नाते मतदाताओं को अपने पाले में करने में कामयाब हो जाएंगे। बृहस्पतिवार को हुई मतगणना में चारों सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों की हार हुई है। पार्टी का युवा चेहरों पर दांव लगाने का निर्णय गलत साबित हुआ। इसौली क्षेत्र में सपा में काफी दिनों से सक्रिय रहे बीएम यादव को इस बार भी टिकट नहीं मिला। ऐन वक्त पर कांग्रेस ने उन्हें टिकट देकर मैदान में उतार दिया था। वे भी चुनाव में कोई खास प्रदर्शन नहीं कर पाए। जिले की पांचों सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों की शर्मनाक पराजय हुई। कांग्रेस का कोई भी प्रत्याशी पार्टी की लाज नहीं बचा पाया। जीत हासिल करने की बात तो दूर रही, कोई भी प्रत्याशी मुख्य मुकाबले में भी दूर-दूर तक नहीं रहा।
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कांग्रेस ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव को एक चुनौती के रूप में लेते हुए पार्टी की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी वाड्रा को यूपी का प्रभारी बनाया था। वे प्रदेश में काफी दिनों से सक्रिय भी रही थी। उनके दिशा-निर्देश पर प्रदेश से लेकर जिले में विभिन्न जन समस्याओं को लेकर कांग्रेस धरना-प्रदर्शन करती रही है। केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार को कांग्रेसी लगभग सभी मुद्दों पर घेरते रहे हैं। संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने की कवायद काफी दिनों से कांग्रेस में चल रही थी। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में इसौली के अलावा चारों सीटों पर युवा चेहरों पर दांव लगाया था। पार्टी ने सदर से जिलाध्यक्ष अभिषेक सिंह राणा को, सुल्तानपुर से फिरोज अहमद को, कादीपुर से जिला पंचायत सदस्य निकलेश सरोज को और लंभुआ से विनय विक्रम को चुनाव लड़ाया।
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पार्टी को भरोसा था कि ये प्रत्याशी युवा होने के नाते मतदाताओं को अपने पाले में करने में कामयाब हो जाएंगे। बृहस्पतिवार को हुई मतगणना में चारों सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों की हार हुई है। पार्टी का युवा चेहरों पर दांव लगाने का निर्णय गलत साबित हुआ। इसौली क्षेत्र में सपा में काफी दिनों से सक्रिय रहे बीएम यादव को इस बार भी टिकट नहीं मिला। ऐन वक्त पर कांग्रेस ने उन्हें टिकट देकर मैदान में उतार दिया था। वे भी चुनाव में कोई खास प्रदर्शन नहीं कर पाए। जिले की पांचों सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों की शर्मनाक पराजय हुई। कांग्रेस का कोई भी प्रत्याशी पार्टी की लाज नहीं बचा पाया। जीत हासिल करने की बात तो दूर रही, कोई भी प्रत्याशी मुख्य मुकाबले में भी दूर-दूर तक नहीं रहा।
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