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Sultanpur News: विद्यार्थियों ने ली मिट्टी के पोषक तत्वों की जानकारी
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सुल्तानपुर। राजकीय इंटर कॉलेज विद्युत नगर टांडा के बच्चों ने कमला नेहरू भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान के कृषि संकाय का शैक्षिक भ्रमण किया। विद्यार्थियों को फसल उत्पादन, मिट्टी के पोषक तत्वों, डेयरी फार्म पद्धति, जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया, स्ट्राबेरी की खेती, औषधीय पौधों की खेती के बारे में जानकारी दी गई।
जीआईसी टांडा के कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों को केएनआईपीएसएस के प्राचार्य प्रोफेसर आलोक कुमार सिंह ने संबोधित किया। कृषि क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाओं से परिचित कराया। छात्र-छात्राओं को कृषि संकाय के विभिन्न विभागों, उनकी शैक्षिक गतिविधियों, नवाचारी अनुसंधान, उपयोगिता से अवगत कराया गया।
मृदा विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. केएन राय ने मिट्टी के पोषक तत्वों के बारे में जानकारी दी। फसल उत्पादन में मिट्टी के पोषक तत्वों की भूमिका के बारे में बताया। अनुवांशिकी विभाग के प्राध्यापक डॉ. एसएन त्रिपाठी ने बच्चों को सरसों, चना व मटर में अनुवांशिकी सुधार की विभिन्न विधियों के बारे में जानकारी दी।
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शस्य विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. आरडी त्रिपाठी ने जैविक व प्राकृतिक खेती के बारे में बताया। दुग्ध विज्ञान विभाग के प्राध्यापक डॉ. एके त्रिपाठी ने डेयरी फार्म पद्धति के बारे में जानकारी दी।
उद्यान विभाग के प्राध्यापकों ने औषधीय पौधों की खेती व स्ट्राबेरी की खेती के बारे में बताया। कीट विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. नवीन विक्रम सिंह ने मधुमक्खी पालन से शहद उत्पादन के बारे में जानकारी दी। डॉ. एनके गुप्ता ने केचुआ से जैविक खाद बनाने की जानकारी दी। डॉ. नीरज सिंह व लैब टेक्नीशियन मो. आसिफ ने प्रयोगशाला से संबंधित जानकारियां बच्चों से साझा कीं।
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जीआईसी टांडा के कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों को केएनआईपीएसएस के प्राचार्य प्रोफेसर आलोक कुमार सिंह ने संबोधित किया। कृषि क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाओं से परिचित कराया। छात्र-छात्राओं को कृषि संकाय के विभिन्न विभागों, उनकी शैक्षिक गतिविधियों, नवाचारी अनुसंधान, उपयोगिता से अवगत कराया गया।
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मृदा विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. केएन राय ने मिट्टी के पोषक तत्वों के बारे में जानकारी दी। फसल उत्पादन में मिट्टी के पोषक तत्वों की भूमिका के बारे में बताया। अनुवांशिकी विभाग के प्राध्यापक डॉ. एसएन त्रिपाठी ने बच्चों को सरसों, चना व मटर में अनुवांशिकी सुधार की विभिन्न विधियों के बारे में जानकारी दी।
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शस्य विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. आरडी त्रिपाठी ने जैविक व प्राकृतिक खेती के बारे में बताया। दुग्ध विज्ञान विभाग के प्राध्यापक डॉ. एके त्रिपाठी ने डेयरी फार्म पद्धति के बारे में जानकारी दी।
उद्यान विभाग के प्राध्यापकों ने औषधीय पौधों की खेती व स्ट्राबेरी की खेती के बारे में बताया। कीट विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. नवीन विक्रम सिंह ने मधुमक्खी पालन से शहद उत्पादन के बारे में जानकारी दी। डॉ. एनके गुप्ता ने केचुआ से जैविक खाद बनाने की जानकारी दी। डॉ. नीरज सिंह व लैब टेक्नीशियन मो. आसिफ ने प्रयोगशाला से संबंधित जानकारियां बच्चों से साझा कीं।