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बच्ची के गले से फंसी गोली निकाल दी नई जिंदगी
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
Updated Sun, 14 Jun 2015 11:34 PM IST
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सुल्तानपुर। जयसिंहपुर कोतवाली क्षेत्र के मसीदपुर गांव में एक छह साल की मासूम बच्ची को गोली लग गई। डॉक्टरों ने किसी तरह गले में कपड़े के साथ फंसी गोली को किसी तरह निकाल कर राखी को एक नई जिंदगी बख्शी। इस बाबत नगर कोतवाल वीपी सिंह ने बताया कि अभी वे बाहर हैं। लिखित सूचना कोतवाली पहुंची होगी। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
जयसिंहपुर कोतवाली क्षेत्र के मसीदपुर गांव निवासी पवन विश्वकर्मा की पत्नी अनीता बीते दिनों अपनी छह वर्षीय बेटी राखी के साथ अपने मायके बनकेगांव कोतवाली कादीपुर निवासी राजपति विश्वकर्मा के घर गई थी। 11 जून की रात अनीता अपनी बेटी राखी के साथ घर के बाहर चारपाई पर लेटी थी। देर रात करीब दो बजे अचानक गोली लगने के बाद राखी जोर से चिल्लाने लगी। नींद से जागी अनीता ने बच्ची को गोद में उठाया तो उसके कपड़े खून से सने थे। गले पर गहरा जख्म था। अनीता ने अपने पिता राजपति और भाई राजेश विश्वकर्मा को आवाज देकर बुलाया। परिवारीजन रात में ही राखी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने राखी को ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया था। आर्थिक तंगी के कारण परिवारीजन राखी को लेकर लखनऊ नहीं जा सकते थे। परिवारीजन जख्मी बच्ची को लेकर सर्जन डॉ. एके सिंह के पास पहुंचे। बच्ची के गले पर जख्म कैसे हुआ यह बताने की स्थिति में परवारीजन भी नहीं थे। जख्म के बाहर महज एक कपड़े का टुकड़ा दिख रहा था। चिकित्सक ने राखी का एक्स-रे कराया तो दंग रह गए। एक्स-रे में राखी के गले में गोली फंसी थी। गोली से पहले कपड़ा घुसा था लगातार खून रिस रहा था। चिकित्सक ने राखी का देर रात ही ऑपरेशन किया। करीब घंटे भर चले ऑपरेशन के बाद चिकित्सक ने राखी के गले से गोली बाहर निकाल ली। दूसरे दिन चिकित्सक किसी काम से लखनऊ चले गए। रविवार को लखनऊ से वापस अस्पताल पहुंचे चिकित्सक डॉ. एके सिंह ने लिखित सूचना पुलिस को दी है। इस घटना में बच्ची की जिंदगी तो बच गई लेकिन गोली लगने का सवाल बना हुआ है।
कपड़े ने बचा ली जान
सुल्तानपुर। राखी के कपड़े ने गोली की रफ्तार काफी हद तक धीमा कर दिया, जिसकी वजह से उसकी जान बच गई। गोली राखी के कपड़े को भेदते हुए गले में फंसी थी। गोली कपड़े के बड़े टुकड़े के साथ अंदर थी। चिकित्सक भी मानते हैं कि यदि कपड़ा नही होता तो राखी के गले की नस पूरी तरह से नष्ट हो जाती।
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जयसिंहपुर कोतवाली क्षेत्र के मसीदपुर गांव निवासी पवन विश्वकर्मा की पत्नी अनीता बीते दिनों अपनी छह वर्षीय बेटी राखी के साथ अपने मायके बनकेगांव कोतवाली कादीपुर निवासी राजपति विश्वकर्मा के घर गई थी। 11 जून की रात अनीता अपनी बेटी राखी के साथ घर के बाहर चारपाई पर लेटी थी। देर रात करीब दो बजे अचानक गोली लगने के बाद राखी जोर से चिल्लाने लगी। नींद से जागी अनीता ने बच्ची को गोद में उठाया तो उसके कपड़े खून से सने थे। गले पर गहरा जख्म था। अनीता ने अपने पिता राजपति और भाई राजेश विश्वकर्मा को आवाज देकर बुलाया। परिवारीजन रात में ही राखी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने राखी को ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया था। आर्थिक तंगी के कारण परिवारीजन राखी को लेकर लखनऊ नहीं जा सकते थे। परिवारीजन जख्मी बच्ची को लेकर सर्जन डॉ. एके सिंह के पास पहुंचे। बच्ची के गले पर जख्म कैसे हुआ यह बताने की स्थिति में परवारीजन भी नहीं थे। जख्म के बाहर महज एक कपड़े का टुकड़ा दिख रहा था। चिकित्सक ने राखी का एक्स-रे कराया तो दंग रह गए। एक्स-रे में राखी के गले में गोली फंसी थी। गोली से पहले कपड़ा घुसा था लगातार खून रिस रहा था। चिकित्सक ने राखी का देर रात ही ऑपरेशन किया। करीब घंटे भर चले ऑपरेशन के बाद चिकित्सक ने राखी के गले से गोली बाहर निकाल ली। दूसरे दिन चिकित्सक किसी काम से लखनऊ चले गए। रविवार को लखनऊ से वापस अस्पताल पहुंचे चिकित्सक डॉ. एके सिंह ने लिखित सूचना पुलिस को दी है। इस घटना में बच्ची की जिंदगी तो बच गई लेकिन गोली लगने का सवाल बना हुआ है।
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कपड़े ने बचा ली जान
सुल्तानपुर। राखी के कपड़े ने गोली की रफ्तार काफी हद तक धीमा कर दिया, जिसकी वजह से उसकी जान बच गई। गोली राखी के कपड़े को भेदते हुए गले में फंसी थी। गोली कपड़े के बड़े टुकड़े के साथ अंदर थी। चिकित्सक भी मानते हैं कि यदि कपड़ा नही होता तो राखी के गले की नस पूरी तरह से नष्ट हो जाती।
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