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गंगा दशहरा पर लगाई आस्था की डुबकी
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लंभुआ (सुल्तानपुर)। गंगा दशहरा पर्व पर रिमझिम बरसात के बीच रविवार को बड़ी संख्या में लोगों ने आदि गंगा गोमती में आस्था की डुबकी लगाई।
वीकेंड लॉकडाउन के बाद भी हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ धोपाप पर जमा हुई। श्रद्धालुओं के उत्साह के आगे सोशल डिस्टेंसिंग तार-तार हो गई।
श्रद्धालुओं ने आदि गंगा में डुबकी लगाकर प्राचीन श्री राम जानकी मंदिर में पूजन-अर्चन किया।
पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में रावण वध के उपरांत भगवान श्रीराम ने धोपाप में आदि गंगा गोमती में स्नान करके ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति पाई थी। तभी से गंगा दशहरा के पर्व पर धोपाप घाट पर स्नान करने की परंपरा चली आ रही है।
धोपाप में गंगा दशहरा पर्व पर आसपास के लोगों के अलावा कई जिलों के श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। हर साल श्रद्धालुओं की भारी भीड़ गंगा दशहरा पर्व पर इकट्ठा होती रही है।
पिछले साल कोरोना महामारी की वजह से स्नान पर्व आयोजन पर रोक लगाई गई थी। इस बार प्रशासन ने कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हुए स्नान, पूजन की अनुमति दी थी।
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रविवार की भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ गोमती नदी में स्नान के लिए पहुंचने लगी। प्रशासन ने गोमती नदी में ही बांस व रस्सी से घेरा बनाकर स्नानार्थियों की सुरक्षा के इंतजाम किए थे।
पुलिस ने बीते स्नान पर्वों पर हुए हादसों से सबक लेते हुए तीन नौका पर स्थानीय मछुवारे भी तैनात किए थे। जो स्नान कर रहे लोगों पर नजर बनाए हुए थे। दोपहर तीन बजे तक लोगों का घाट पर पहुंचना जारी रहा।
श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद टीले पर मौजूद चार सदी पुराने श्री राम जानकी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। धोपाप में स्नान के बाद दान खासकर अन्न दान का भी खासा महत्व है। पर्व को सकुशल संपन्न कराने के लिए एसडीएम राम अवतार, तहसीलदार हरिश्चंद्र, एसओ सुनील कुमार पांडेय मौजूद रहे। एसओ ने बताया कि मेला पूरी तरह सकुशल संपन्न कराया गया।
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वीकेंड लॉकडाउन के बाद भी हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ धोपाप पर जमा हुई। श्रद्धालुओं के उत्साह के आगे सोशल डिस्टेंसिंग तार-तार हो गई।
श्रद्धालुओं ने आदि गंगा में डुबकी लगाकर प्राचीन श्री राम जानकी मंदिर में पूजन-अर्चन किया।
पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में रावण वध के उपरांत भगवान श्रीराम ने धोपाप में आदि गंगा गोमती में स्नान करके ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति पाई थी। तभी से गंगा दशहरा के पर्व पर धोपाप घाट पर स्नान करने की परंपरा चली आ रही है।
धोपाप में गंगा दशहरा पर्व पर आसपास के लोगों के अलावा कई जिलों के श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। हर साल श्रद्धालुओं की भारी भीड़ गंगा दशहरा पर्व पर इकट्ठा होती रही है।
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पिछले साल कोरोना महामारी की वजह से स्नान पर्व आयोजन पर रोक लगाई गई थी। इस बार प्रशासन ने कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हुए स्नान, पूजन की अनुमति दी थी।
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रविवार की भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ गोमती नदी में स्नान के लिए पहुंचने लगी। प्रशासन ने गोमती नदी में ही बांस व रस्सी से घेरा बनाकर स्नानार्थियों की सुरक्षा के इंतजाम किए थे।
पुलिस ने बीते स्नान पर्वों पर हुए हादसों से सबक लेते हुए तीन नौका पर स्थानीय मछुवारे भी तैनात किए थे। जो स्नान कर रहे लोगों पर नजर बनाए हुए थे। दोपहर तीन बजे तक लोगों का घाट पर पहुंचना जारी रहा।
श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद टीले पर मौजूद चार सदी पुराने श्री राम जानकी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। धोपाप में स्नान के बाद दान खासकर अन्न दान का भी खासा महत्व है। पर्व को सकुशल संपन्न कराने के लिए एसडीएम राम अवतार, तहसीलदार हरिश्चंद्र, एसओ सुनील कुमार पांडेय मौजूद रहे। एसओ ने बताया कि मेला पूरी तरह सकुशल संपन्न कराया गया।