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Sultanpur News: सीएचसी से लेकर मेडिकल कॉलेज तक मंडरा रहा आग का खतरा
Sat, 13 Apr 2024 11:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Sat, 13 Apr 2024 11:47 PM IST
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सुल्तानपुर। यदि किसी अस्पताल या क्लीनिक को स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण कराना हो तो उसे सबसे पहले अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा। किंतु जिले की दो सीएचसी को छोड़कर बाकी सभी सीएचसी और यहां तक कि मेडिकल कॉलेज तक में आगजनी से बचने के पर्याप्त उपाय नहीं हैं। ऐसे में यहां हर वक्त खतरा मंडरा रहा है।
जिले में सबसे ज्यादा मरीज जिला पुरुष व महिला अस्पताल यानि मौजूदा मेडिकल कॉलेज में आते हैं। प्रतिदिन करीब 1200 मरीज यहां ओपीडी में आते हैं और लगभग 300 मरीज वार्डों में भर्ती रहते हैं। इसके अलावा इमरजेंसी से लेकर तीमारदारों और कर्मियों की संख्या जोड़ ली जाए तो दिन में हर वक्त यहां करीब ढाई हजार लोगों की आमदरफ्त बनी रहती है। किंतु इस पूरे परिसर में यदि कहीं आग लग जाए तो उससे बचने के उपाय नहीं हैं।
सबसे बड़ी समस्या तो गेट पर लगने वाला जाम है, जहां से अग्निशमन विभाग की गाड़ियों का आसानी से प्रवेश भी आसान नहीं है। अफसरों की मानें तो यहां का फायर ऑडिट पिछले वर्ष के अंत में ही हुआ था और अग्निशमन के जो उपाय बताए गए थे, उन उपकरणों को लगाए जाने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा जा चुका है। किंतु अभी तक शासन से कोई निर्णय नहीं हो सका है।
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एनओसी पर एक-दूसरे को गलत ठहरा रहे सीएमओ और सीएफओ
जिले की 14 सीएचसी में केवल दूबेपुर और कुड़वार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं, जिन्हें अग्निशमन विभाग की ओर से अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया गया है। यह कहना है जिले में अग्निशमन विभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी संजय शर्मा का। वे बताते हैं कि बाकी सीएचसी पर इंतजाम न होने की वजह से फायर एनओसी जारी नहीं की गई है। इस बारे में सीएमओ से लेकर अधीक्षकों तक को पत्र भेजे जा चुके हैं। उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी ओमप्रकाश चौधरी का दावा है कि सभी सीएचसी का फायर ऑडिट भी हो चुका है और उसके बाद फायर एनओसी भी जारी हो चुकी है। हालांकि जिस तरह मोतिगरपुर में लंबे समय से फायर अलार्म खराब पाया गया, उससे सीएफओ का दावा ज्यादा सटीक नजर आता है।
मेडिकल कॉलेज का फायर ऑडिट हो चुका है। उस अनुरूप जो उपकरण चाहिए, उसके लिए एस्टीमेट भी शासन को भेजा जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही सारी व्यवस्थाएं पूर्ण हो जाएंगी।
- डॉ. एसके गोयल, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज
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जिले में सबसे ज्यादा मरीज जिला पुरुष व महिला अस्पताल यानि मौजूदा मेडिकल कॉलेज में आते हैं। प्रतिदिन करीब 1200 मरीज यहां ओपीडी में आते हैं और लगभग 300 मरीज वार्डों में भर्ती रहते हैं। इसके अलावा इमरजेंसी से लेकर तीमारदारों और कर्मियों की संख्या जोड़ ली जाए तो दिन में हर वक्त यहां करीब ढाई हजार लोगों की आमदरफ्त बनी रहती है। किंतु इस पूरे परिसर में यदि कहीं आग लग जाए तो उससे बचने के उपाय नहीं हैं।
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सबसे बड़ी समस्या तो गेट पर लगने वाला जाम है, जहां से अग्निशमन विभाग की गाड़ियों का आसानी से प्रवेश भी आसान नहीं है। अफसरों की मानें तो यहां का फायर ऑडिट पिछले वर्ष के अंत में ही हुआ था और अग्निशमन के जो उपाय बताए गए थे, उन उपकरणों को लगाए जाने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा जा चुका है। किंतु अभी तक शासन से कोई निर्णय नहीं हो सका है।
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एनओसी पर एक-दूसरे को गलत ठहरा रहे सीएमओ और सीएफओ
जिले की 14 सीएचसी में केवल दूबेपुर और कुड़वार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं, जिन्हें अग्निशमन विभाग की ओर से अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया गया है। यह कहना है जिले में अग्निशमन विभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी संजय शर्मा का। वे बताते हैं कि बाकी सीएचसी पर इंतजाम न होने की वजह से फायर एनओसी जारी नहीं की गई है। इस बारे में सीएमओ से लेकर अधीक्षकों तक को पत्र भेजे जा चुके हैं। उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी ओमप्रकाश चौधरी का दावा है कि सभी सीएचसी का फायर ऑडिट भी हो चुका है और उसके बाद फायर एनओसी भी जारी हो चुकी है। हालांकि जिस तरह मोतिगरपुर में लंबे समय से फायर अलार्म खराब पाया गया, उससे सीएफओ का दावा ज्यादा सटीक नजर आता है।
मेडिकल कॉलेज का फायर ऑडिट हो चुका है। उस अनुरूप जो उपकरण चाहिए, उसके लिए एस्टीमेट भी शासन को भेजा जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही सारी व्यवस्थाएं पूर्ण हो जाएंगी।
- डॉ. एसके गोयल, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज