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रेलवे मालगोदाम बना मौैरंग की कालाबाजारी का अड्डा

Tue, 18 Jul 2017 10:03 PM IST
Amarujala Bureau
Amarujala Bureau Updated Tue, 18 Jul 2017 10:03 PM IST
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Blackmarketing of sand near railway siding
उदासीन बना महकमा - फोटो : अमर उजाला

निर्माण कार्य के लिए लोगों को सस्ती और बढ़िया मौरंग सुलभ कराने की सरकार की मंशा जिले में तार-तार हो रही है। मौरंग बेचने का यहां कोई सिस्टम ही नहीं है। जरूरतमंद के बजाय व्यवसायी मौरंग खरीदकर डंप कर रहे हैं। हालत यह है कि मोलभाव करने के लिए नियम के विपरीत रैक को कहीं अधिक समय तक ट्रैक पर खड़ा रखना पड़ रहा है। झारखंड जपला से सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन के मालगोदाम पहुंची मौरंग की रैक 14 घंटे से अधिक का समय बीत जाने तक खाली नहीं की गई।

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टाइम ओवर होने तक रैक रिलीज न होने की जानकारी जब रेलवे विभाग को हुई तो हड़कंप मच गया।  रेलवे की ओर से फर्म पर 14 घंटे का डैमेज दिखाते हुए 1,21,800 रुपये का जुर्माना ठोंका गया है।            
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पिछली 16 जुलाई की शाम झारखंड जपला से 58 वैगन मौरंग की रैक सुल्तानपुर स्टेशन पहुंची थी। स्टेशन पहुंची मालगाड़ी को आनन-फानन में मालगोदाम पहुंचा दिया गया। मौरंग की रैक मालगोदाम पहुंचाने के बाद सेटिंग-गेटिंग का खेल शुरू हो गया। मौरंग मार्केट में सीधे नहीं पहुंच सकी। सूत्रों की मानें तो मालगोदाम पर मौरंग की रैक को डंप कर दिया गया। वहीं से चहेतों को ट्रकों से मौरंग दी जाने लगी। वह भी ओवरलोड।
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पूरे सूबे में जहां इस समय ओवरलोड को लेकर सख्ती है वहीं यहां से निकलने वाले ओवरलोड ट्रकों की जांच करने की परिवहन महकमा जहमत ही नहीं उठा रहा। रेलवे विभाग की ओर से रैक रिलीज कराने को लेकर कोई भी अधिकारी जांच करने नहीं पहुंचा। इसका फायदा उठाते हुए सीधे वैगन से मौरंग निर्धारित स्थल पर भेजी जाने लगी। रेलवे की ओर से संबंधित फर्म को मौरंग रिलीज करने के लिए नौ घंटे का समय दिया गया था। फर्म ने 17 जुलाई की शाम सवा छह बजे रेलवे को रैक रिलीज करने की जानकारी दी।


हालांकि तब भी रैक पूरी तहर से खाली नहीं की गई थी। फर्म की इस गलती पर रेलवे की ओर से 17 जुलाई की शाम सवा छह बजे तक 14 घंटे का डैमेज दिखाते हुए पेनल्टी लगाई गई। फर्म पर 58 वैगन की रैक को ब्रेक करने के लिए 1,21,800 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।            

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