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पिता पुत्र को सात साल की कैद
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पिता-पुत्र समेत तीन को सात साल की कैद
सुल्तानपुर। जानलेवा हमला करने के मामले में बुधवार को एडीजे तृतीय उत्कर्ष चतुर्वेदी ने पिता-पुत्र समेत तीन अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कारावास व 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामला पीपरपुर थाने से जुड़ा है।
धम्मौर थाने के भाईं गांव निवासी सकलैन ने 22 जुलाई 2009 को पीपरपुर थाने के कानूपुर निवासी राम सुमिरन व संतोष और मोहद्दीपुर निवासी राम सागर व राज कुमार के खिलाफ पीपरपुर थाने में मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया था।
सकलैन का आरोपी राम सुमिरन से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। कानूपुर गांव में स्थित जमीन पर सकलैन निर्माण करा रहे थे।
21 जुलाई 2009 को आरोपी राम सुमिरन व संतोष और आरोपी राम सागर व उसका पुत्र राज कुमार लाठी डंडे से लैस होकर आए और गाली देते हुए निर्माण करने पर जान से मारने की धमकी दी थी।
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मना करने पर आरोपियों ने सकलैन के भतीजे रजनी जैदी, शाहिब अब्बास और मजदूर अमानत व सलीम को मारपीट कर चोटें पहुंचाई थी। आरोपियों ने सकलैन की दीवार गिरा दी थी।
मारपीट में रजनी का हाथ टूट गया था। चोटों के आधार पर पुलिस ने मामले में जानलेवा हमले की धारा बढ़ा दी थी। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी क्रिमिनल राम अचल मिश्र ने घटना को साबित करने के लिए आठ गवाहों को पेश किया।
मामले की सुनवाई कर रहे एडीजे तृतीय उत्कर्ष चतुर्वेदी ने दोनों पक्षों की बहस व साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद बुधवार को आरोपी राम सागर, उसके पुत्र राज कुमार और आरोपी संतोष को दोषी करार दिया।
कोर्ट ने तीनों आरोपियों को सात वर्ष की कैद व प्रत्येक को 10-10 हजार रुपये जुर्माना की सजा से दंड़ित कर जेल भेजने का आदेश दिया। एडीजीसी क्रिमिनल राम अचल मिश्र ने बताया कि आरोपी राम सुमिरन की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी।
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सुल्तानपुर। जानलेवा हमला करने के मामले में बुधवार को एडीजे तृतीय उत्कर्ष चतुर्वेदी ने पिता-पुत्र समेत तीन अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कारावास व 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामला पीपरपुर थाने से जुड़ा है।
धम्मौर थाने के भाईं गांव निवासी सकलैन ने 22 जुलाई 2009 को पीपरपुर थाने के कानूपुर निवासी राम सुमिरन व संतोष और मोहद्दीपुर निवासी राम सागर व राज कुमार के खिलाफ पीपरपुर थाने में मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया था।
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सकलैन का आरोपी राम सुमिरन से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। कानूपुर गांव में स्थित जमीन पर सकलैन निर्माण करा रहे थे।
21 जुलाई 2009 को आरोपी राम सुमिरन व संतोष और आरोपी राम सागर व उसका पुत्र राज कुमार लाठी डंडे से लैस होकर आए और गाली देते हुए निर्माण करने पर जान से मारने की धमकी दी थी।
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मना करने पर आरोपियों ने सकलैन के भतीजे रजनी जैदी, शाहिब अब्बास और मजदूर अमानत व सलीम को मारपीट कर चोटें पहुंचाई थी। आरोपियों ने सकलैन की दीवार गिरा दी थी।
मारपीट में रजनी का हाथ टूट गया था। चोटों के आधार पर पुलिस ने मामले में जानलेवा हमले की धारा बढ़ा दी थी। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी क्रिमिनल राम अचल मिश्र ने घटना को साबित करने के लिए आठ गवाहों को पेश किया।
मामले की सुनवाई कर रहे एडीजे तृतीय उत्कर्ष चतुर्वेदी ने दोनों पक्षों की बहस व साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद बुधवार को आरोपी राम सागर, उसके पुत्र राज कुमार और आरोपी संतोष को दोषी करार दिया।
कोर्ट ने तीनों आरोपियों को सात वर्ष की कैद व प्रत्येक को 10-10 हजार रुपये जुर्माना की सजा से दंड़ित कर जेल भेजने का आदेश दिया। एडीजीसी क्रिमिनल राम अचल मिश्र ने बताया कि आरोपी राम सुमिरन की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी।