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Sultanpur News: जेब पर बोझ, बच्चों की सुरक्षा भी दांव पर

Mon, 13 Apr 2026 11:16 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर Updated Mon, 13 Apr 2026 11:16 PM IST
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Burden on the pocket, safety of children also at stake
धम्मौर क्षेत्र में बच्चों को लेकर जाती स्कूली बस।
सुल्तानपुर। जिले में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। करीब 320 निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 60 हजार से अधिक बच्चों के अभिभावकों ने स्कूली परिवहन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
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अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन किताबों और यूनिफॉर्म के बाद अब वैन और बस के नाम पर भी मनमाना शुल्क वसूल रहे हैं, जबकि बच्चों की सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है। अभिभावक रमेश मिश्र का कहना है कि अधिकांश स्कूल ठेके पर चलने वाली वैन और बसों से बच्चों को लाते-ले जाते हैं, जिनमें जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होता।
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कई वाहनों की फिटनेस संदिग्ध है लेकिन इसकी जानकारी अभिभावकों को नहीं दी जाती। उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्कूल अन्य सभी व्यवस्थाएं खुद तय करते हैं तो परिवहन को दूसरे के हाथों में क्यों छोड़ दिया जाता है। अभिभावक राजमणि ने बताया कि उनके बच्चों के स्कूल की दूरी करीब 10 किलोमीटर है, लेकिन हर महीने 2000 रुपये तक किराया लिया जाता है। इसके बावजूद वैन में बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जाता है, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।
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अभिभावक मनोज कुमार ने बताया कि दो बच्चों को स्कूल भेजते समय सुरक्षा की चिंता बनी रहती है। घर से स्कूल की दूरी सिर्फ दो किलोमीटर है, महीने का बस का किराया 1000 रुपये देना पड़ रहा है। अभिभावकों ने यह भी सवाल उठाए कि एक ही रूट पर अलग-अलग स्कूलों का किराया अलग क्यों है।

स्कूली वाहनों के लिए सुरक्षा मानक
स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने वाहनों के लिए जरूरी मानक तय किए हैं। वाहन में वैध रजिस्ट्रेशन, प्रदूषण, इंश्योरेंस और फिटनेस प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। अग्निशमन यंत्र, जीपीएस, स्पीड गवर्नर, सीसीटीवी कैमरा और स्पीड कंट्रोल डिवाइस लगे होना चाहिए। तय क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना नियमों के खिलाफ है। चालक का लाइसेंस और पुलिस सत्यापन जरूरी है।



नियमों की अनदेखी पर होगी कार्रवाई
एआरटीओ प्रशासन अलका शुक्ला ने कहा कि सभी स्कूली वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। स्कूलों को परिवहन व्यवस्था और शुल्क की जानकारी पारदर्शी तरीके से अभिभावकों को देनी होगी। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी।
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