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Sultanpur News: धनपतगंज में रोचक हुआ ब्लॉक प्रमुख का चुनाव
Mon, 19 Aug 2024 04:27 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Mon, 19 Aug 2024 04:27 AM IST
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सुल्तानपुर। धनपतगंज ब्लॉक प्रमुख पद एक बार फिर सुर्खियों में है। ब्लॉक प्रमुख के उपचुनाव में सत्ताधारी पार्टी की ओर से घेरेबंदी की जा रही है। इसके चलते चुनाव पहली बार रोचक मोड़ पर आ गया है क्योंकि मायंग परिवार को कड़ी चुनौती मिलती दिख रही है। हालांकि, भाजपा को छोड़कर अन्य राजनीतिक दलों ने प्रमुख के चुनाव को लेकर अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
आजादी के बाद से 1984 तक धनपतगंज में यशभद्र सिंह मोनू के बाबा शारदा प्रसाद सिंह ब्लॉक प्रमुख रहे। 1984 में मोनू के पिता इंद्रभद्र सिंह ने ब्लॉक प्रमुखी संभाली। 1989 में इसौली से विधायक चुने जाने के बाद उन्होंने अपने करीबी आद्या प्रसाद सिंह को ब्लॉक प्रमुख बनवाया। इसके बाद इंद्रभद्र सिंह के करीबी श्याम सुंदर सिंह ब्लॉक प्रमुख बने। 1999 में इंद्रभद्र सिंह की पत्नी उषा सिंह ब्लॉक प्रमुख चुनी गईं।
1999 में इंद्रभद्र सिंह की हत्या के बाद चंद्रभद्र सिंह सोनू और यशभद्र सिंह मोनू की राजनीति में इंट्री हुई। 2002 के चुनाव में सोनू विधायक निर्वाचित हुए तो 2005 में मोनू ने ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी संभाली। वे 10 साल लगातार प्रमुख रहे। 2015 में सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई तो मोनू की समर्थक जानकी देवी ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुईं।
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2021 में फिर से यशभद्र सिंह मोनू को निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख चुना गया। कोर्ट से सजा मिलने के बाद उनकी प्रमुखी गई तो सत्ताधारी पार्टी ने ब्लॉक प्रमुख के लिए नजर गड़ा दी हैं। दोनों तरफ से 22 अगस्त को होने वाले उपचुनाव से पहले ही क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अपने पाले में करने की कोशिश की जा रही हैं। आमतौर पर धनपतगंज में बीडीसी को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती, लेकिन इस बार क्षेत्र पंचायत सदस्यों की पूछ बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि कई बीडीसी अपना घर छोड़ कर परदेस सैर पर निकल लिए हैं।
प्रमुखी सिर्फ बहाना, लक्ष्य वर्चस्व तोड़ना
ब्लॉक प्रमुख का कार्यकाल बमुश्किल दो साल बचा हुआ है। इस दरम्यान बहुत अधिक विकास कार्य करा पाना संभव नहीं है। इसके उलट, ब्लॉक प्रमुख चुनाव में ठीकठाक रकम खर्च किए जाने की बात सामने आ रही है। धनपतगंज ब्लॉक में मायंग (भद्र परिवार का गांव) का दबदबा रहा है। इस दबदबे को तोड़ने को लेकर 2015 में भी कोशिशें हुईं, लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई थी। लोकसभा चुनाव में भद्र बंधु समाजवादी पार्टी के पाले में चले गए। चुनाव में सपा का प्रदर्शन ठीक रहा और सुल्तानपुर में पार्टी प्रत्याशी की जीत हुई तो उनके हौसले भी बढ़ गए हैं। सत्ताधारी पार्टी के विधायक और नेता अब इस वर्चस्व को तोड़ने की कोशिश में लग गए हैं। कई बीडीसी सत्तापक्ष की तरफ हो भी लिए हैं।
मां या चाचा के सामने कौन...
भद्र परिवार से निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह की मां उषा सिंह और चाचा ऋषिभद्र सिंह क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए हैं। इन दोनों का नोड्यूज तैयार कराया जा रहा है। दोनों में से किसी एक चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है जबकि सत्ताधारी पार्टी ने पार्वती देवी को प्रत्याशी घोषित कर दिया है।
पार्टी प्रत्याशी की जीत के लिए लगी पार्टी
भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. आरए वर्मा ने कहा कि पार्टी प्रत्याशी का चुनाव में विजय दिलाने के लिए पार्टी के लोग जुटे हैं। लोग बराबर बीडीसी से संपर्क कर रहे हैं।
जल्द होगी घोषणा
सपा जिलाध्यक्ष रघुवीर यादव ने कहा कि प्रत्याशी की घोषणा को लेकर मंथन चल रहा है। जल्द ही प्रत्याशी की घोषणा कर दी जाएगी।
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आजादी के बाद से 1984 तक धनपतगंज में यशभद्र सिंह मोनू के बाबा शारदा प्रसाद सिंह ब्लॉक प्रमुख रहे। 1984 में मोनू के पिता इंद्रभद्र सिंह ने ब्लॉक प्रमुखी संभाली। 1989 में इसौली से विधायक चुने जाने के बाद उन्होंने अपने करीबी आद्या प्रसाद सिंह को ब्लॉक प्रमुख बनवाया। इसके बाद इंद्रभद्र सिंह के करीबी श्याम सुंदर सिंह ब्लॉक प्रमुख बने। 1999 में इंद्रभद्र सिंह की पत्नी उषा सिंह ब्लॉक प्रमुख चुनी गईं।
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1999 में इंद्रभद्र सिंह की हत्या के बाद चंद्रभद्र सिंह सोनू और यशभद्र सिंह मोनू की राजनीति में इंट्री हुई। 2002 के चुनाव में सोनू विधायक निर्वाचित हुए तो 2005 में मोनू ने ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी संभाली। वे 10 साल लगातार प्रमुख रहे। 2015 में सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई तो मोनू की समर्थक जानकी देवी ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुईं।
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2021 में फिर से यशभद्र सिंह मोनू को निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख चुना गया। कोर्ट से सजा मिलने के बाद उनकी प्रमुखी गई तो सत्ताधारी पार्टी ने ब्लॉक प्रमुख के लिए नजर गड़ा दी हैं। दोनों तरफ से 22 अगस्त को होने वाले उपचुनाव से पहले ही क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अपने पाले में करने की कोशिश की जा रही हैं। आमतौर पर धनपतगंज में बीडीसी को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती, लेकिन इस बार क्षेत्र पंचायत सदस्यों की पूछ बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि कई बीडीसी अपना घर छोड़ कर परदेस सैर पर निकल लिए हैं।
प्रमुखी सिर्फ बहाना, लक्ष्य वर्चस्व तोड़ना
ब्लॉक प्रमुख का कार्यकाल बमुश्किल दो साल बचा हुआ है। इस दरम्यान बहुत अधिक विकास कार्य करा पाना संभव नहीं है। इसके उलट, ब्लॉक प्रमुख चुनाव में ठीकठाक रकम खर्च किए जाने की बात सामने आ रही है। धनपतगंज ब्लॉक में मायंग (भद्र परिवार का गांव) का दबदबा रहा है। इस दबदबे को तोड़ने को लेकर 2015 में भी कोशिशें हुईं, लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई थी। लोकसभा चुनाव में भद्र बंधु समाजवादी पार्टी के पाले में चले गए। चुनाव में सपा का प्रदर्शन ठीक रहा और सुल्तानपुर में पार्टी प्रत्याशी की जीत हुई तो उनके हौसले भी बढ़ गए हैं। सत्ताधारी पार्टी के विधायक और नेता अब इस वर्चस्व को तोड़ने की कोशिश में लग गए हैं। कई बीडीसी सत्तापक्ष की तरफ हो भी लिए हैं।
मां या चाचा के सामने कौन...
भद्र परिवार से निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह की मां उषा सिंह और चाचा ऋषिभद्र सिंह क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए हैं। इन दोनों का नोड्यूज तैयार कराया जा रहा है। दोनों में से किसी एक चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है जबकि सत्ताधारी पार्टी ने पार्वती देवी को प्रत्याशी घोषित कर दिया है।
पार्टी प्रत्याशी की जीत के लिए लगी पार्टी
भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. आरए वर्मा ने कहा कि पार्टी प्रत्याशी का चुनाव में विजय दिलाने के लिए पार्टी के लोग जुटे हैं। लोग बराबर बीडीसी से संपर्क कर रहे हैं।
जल्द होगी घोषणा
सपा जिलाध्यक्ष रघुवीर यादव ने कहा कि प्रत्याशी की घोषणा को लेकर मंथन चल रहा है। जल्द ही प्रत्याशी की घोषणा कर दी जाएगी।