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165 पहुंचा जिले का एक्यूआई
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सुल्तानपुर। जिले में वायु प्रदूषण फिर खतरे की ओर बढ़ रहा है। तीन दिन से आसमान में छाई धुंध के बीच जिले का एक्यूआई बढ़कर 165 पहुंच गया है। इसके साथ ही हवा को जहरीली बनाने वाले कणिका तत्व की मौजूदगी 83.3 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक पहुंच गई है।
जिले की बिगड़ रही हवा को बचाने के लिए उपाय अभी तक नाकाफी साबित हुए हैं। जहरीली होती हवा से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ता जा रहा है। हालांकि शासन के आदेश पर पराली के बाद अब प्रशासन ने ईंट भट्ठों की चेकिंग के निर्देश जारी किये हैं।
शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण के लिए ईंट भट्ठों की चेकिंग का निर्देश उपजिलाधिकारियों को दिया है। अपर जिलाधिकारी प्रशासन हर्षदेव पांडेय ने पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड रायबरेली से बिना सहमति पत्र के ईंट भट्ठों की फुंकाई पर रोक लगा दी है।
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साथ ही जिला पंचायत से खनन के संबंध में अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करने का निर्देश ईंट भट्ठा संचालकों को दिया है। उन्होंने उपजिलाधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों के ईंट भट्ठों की जांच कर बिना प्रमाणपत्र के संचालित ईंट भट्ठों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है।
जिले में सर्वाधिक वायु प्रदूषण का कारक बने फोरलेन निर्माण के दौरान उड़ रही भीषण धूल पर अभी तक प्रतिबंध नहीं लग सका है। पयागीपुर से कोइरीपुर के बीच व प्रयागराज की तरफ चल रहे निर्माण के बीच वाहनों के आवागमन से भीषण धूल उड़ती है। धूल से मार्ग पर आने जाने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कूड़ा-करकट व कोयले की भट्ठियों को जलाने पर प्रतिबंध नहीं लग सका है। सुबह कूड़ा-करकट के ढेर और कोयले की भट्ठियां जलने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है। इसके साथ ही लोहरामऊ रेलवे क्रॉसिंग के पास कूड़ा डंपिंग स्थल पर फिर धुुआं सुलगने लगा है।
प्रदूषण नियंत्रण के ठोस उपाय नहीं होने से बुधवार को जिले का एक्यूआई 168 व हवा में कणिका तत्व की मौजूदगी 89.2 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक पहुंच गया था। बृहस्पतिवार को इसमें थोड़ी गिरावट हुई।
केएनआई के पर्यावरण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रकाशचंद्र त्रिपाठी ने बताया कि बृहस्पतिवार को प्रदूषण की हुई माप में जिले का एक्यूआई 165 व हवा में कणिका तत्व की मौजूदगी 83.3 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक पाया गया। उन्होंने इसे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया है।
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जिले की बिगड़ रही हवा को बचाने के लिए उपाय अभी तक नाकाफी साबित हुए हैं। जहरीली होती हवा से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ता जा रहा है। हालांकि शासन के आदेश पर पराली के बाद अब प्रशासन ने ईंट भट्ठों की चेकिंग के निर्देश जारी किये हैं।
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शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण के लिए ईंट भट्ठों की चेकिंग का निर्देश उपजिलाधिकारियों को दिया है। अपर जिलाधिकारी प्रशासन हर्षदेव पांडेय ने पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड रायबरेली से बिना सहमति पत्र के ईंट भट्ठों की फुंकाई पर रोक लगा दी है।
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साथ ही जिला पंचायत से खनन के संबंध में अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करने का निर्देश ईंट भट्ठा संचालकों को दिया है। उन्होंने उपजिलाधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों के ईंट भट्ठों की जांच कर बिना प्रमाणपत्र के संचालित ईंट भट्ठों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है।
जिले में सर्वाधिक वायु प्रदूषण का कारक बने फोरलेन निर्माण के दौरान उड़ रही भीषण धूल पर अभी तक प्रतिबंध नहीं लग सका है। पयागीपुर से कोइरीपुर के बीच व प्रयागराज की तरफ चल रहे निर्माण के बीच वाहनों के आवागमन से भीषण धूल उड़ती है। धूल से मार्ग पर आने जाने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कूड़ा-करकट व कोयले की भट्ठियों को जलाने पर प्रतिबंध नहीं लग सका है। सुबह कूड़ा-करकट के ढेर और कोयले की भट्ठियां जलने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है। इसके साथ ही लोहरामऊ रेलवे क्रॉसिंग के पास कूड़ा डंपिंग स्थल पर फिर धुुआं सुलगने लगा है।
प्रदूषण नियंत्रण के ठोस उपाय नहीं होने से बुधवार को जिले का एक्यूआई 168 व हवा में कणिका तत्व की मौजूदगी 89.2 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक पहुंच गया था। बृहस्पतिवार को इसमें थोड़ी गिरावट हुई।
केएनआई के पर्यावरण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रकाशचंद्र त्रिपाठी ने बताया कि बृहस्पतिवार को प्रदूषण की हुई माप में जिले का एक्यूआई 165 व हवा में कणिका तत्व की मौजूदगी 83.3 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक पाया गया। उन्होंने इसे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया है।