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चालकों ने थामे एंबुलेंस के पहिए, मरीजों की अटकी जान
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सुल्तानपुर। आकस्मिक चिकित्सा सेवा के लिए रखे गए चालकों की हड़ताल से सोमवार को एंबुलेंस के पहिए थम गए। चालकों की हड़ताल से ग्रामीण क्षेत्र, सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक हाहाकार मच गया।
सीएचसी व जिला अस्पताल से हायर सेंटर रेफर किए गए मरीजों की जान अटकी रही। सरकारी एंबुलेंस नहीं मिलने से तीमारदार अपने मरीजों को लेकर निजी साधनों से हायर सेंटर पहुंचे।
हड़ताल से अस्पतालों में दिन भर अफरा-तफरी का माहौल रहा। मांगों को लेकर एंबुलेंस चालकों ने अमहट हवाई पट्टी पर वाहनों को खड़ा करके प्रदर्शन किया। दोपहर बाद शासन की ओर से एंबुलेंस चालकों की हड़ताल अवैध घोषित करते हुए एस्मा लगाने से प्रशासन से सक्रिय हो गया।
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तीन माह से वेतन नहीं मिलने समेत अन्य मांगों को लेकर सोमवार को 102 व 108 के एंबुलेंस चालकों ने अपने वाहनों के पहिए थाम दिए। चालकों ने एंबुलेंस को अमहट स्थित हवाई पट्टी पर खड़ा करके प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शन कर रहे चालकों का कहना है कि उन्हें तीन माह से कंपनी ने मानदेय नहीं दिया है। कंपनी मानदेय भी नहीं बढ़ा रही है। चालक पायलट प्रोजेक्ट के तहत कमीशन के आधार पर रखे जाने का भी विरोध जता रहे थे।
साथ ही समय पर मानदेय नहीं देने वाली कंपनी की करार खत्म करने की मांग कर रहे थे। चालकों के प्रदर्शन के दौरान उन्हें अधिकारियों ने समझा कर हड़ताल खत्म करने को कहा लेकिन शाम तक बात नहीं बनी।
जिले में एंबुलेंस चालकों एवं एमटी की कुल संख्या करीब 250 है। एंबुलेंस चालकों व एमटी की हड़ताल से सोमवार को मरीजों को खासी परेशानी हुई। मरीजों व उनके परिवारीजनों की जान साधन नहीं मिलने तक अटकी रही।
लोग निजी साधनों से अपने मरीजों को गांव से सीएचसी, सीएचसी से रेफर मरीजों को जिला अस्पताल व जिला अस्पताल से रेफर मरीजों को लखनऊ लेकर गए। स्थिति साफ नहीं होने से दोपहर तक मरीज के परिवारीजन एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। 108 व 102 नंबर पर दोपहर तक एंबुलेंस व्यस्त होने की बात बताई जाती रही।
प्रसूताओं व प्रसव पीड़ित महिलाओं को अस्पताल व घर पहुंचाने के लिए 102 एंबुलेेंस की व्यवस्था है। सोमवार की हड़ताल से 12 प्रसव पीड़ित महिलाओं को जिला महिला अस्पताल पहुंचने में परेशानी हुई।
महिलाओं के परिवारीजन निजी साधनों से लेकर उन्हें जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचे। सीएमएस डॉ. उर्मिला चौधरी के मुताबिक एक दिन मेें करीब 20 से 24 प्रसव पीड़ित महिलाएं अस्पताल आती हैं।
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सीएचसी व जिला अस्पताल से हायर सेंटर रेफर किए गए मरीजों की जान अटकी रही। सरकारी एंबुलेंस नहीं मिलने से तीमारदार अपने मरीजों को लेकर निजी साधनों से हायर सेंटर पहुंचे।
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हड़ताल से अस्पतालों में दिन भर अफरा-तफरी का माहौल रहा। मांगों को लेकर एंबुलेंस चालकों ने अमहट हवाई पट्टी पर वाहनों को खड़ा करके प्रदर्शन किया। दोपहर बाद शासन की ओर से एंबुलेंस चालकों की हड़ताल अवैध घोषित करते हुए एस्मा लगाने से प्रशासन से सक्रिय हो गया।
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तीन माह से वेतन नहीं मिलने समेत अन्य मांगों को लेकर सोमवार को 102 व 108 के एंबुलेंस चालकों ने अपने वाहनों के पहिए थाम दिए। चालकों ने एंबुलेंस को अमहट स्थित हवाई पट्टी पर खड़ा करके प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शन कर रहे चालकों का कहना है कि उन्हें तीन माह से कंपनी ने मानदेय नहीं दिया है। कंपनी मानदेय भी नहीं बढ़ा रही है। चालक पायलट प्रोजेक्ट के तहत कमीशन के आधार पर रखे जाने का भी विरोध जता रहे थे।
साथ ही समय पर मानदेय नहीं देने वाली कंपनी की करार खत्म करने की मांग कर रहे थे। चालकों के प्रदर्शन के दौरान उन्हें अधिकारियों ने समझा कर हड़ताल खत्म करने को कहा लेकिन शाम तक बात नहीं बनी।
जिले में एंबुलेंस चालकों एवं एमटी की कुल संख्या करीब 250 है। एंबुलेंस चालकों व एमटी की हड़ताल से सोमवार को मरीजों को खासी परेशानी हुई। मरीजों व उनके परिवारीजनों की जान साधन नहीं मिलने तक अटकी रही।
लोग निजी साधनों से अपने मरीजों को गांव से सीएचसी, सीएचसी से रेफर मरीजों को जिला अस्पताल व जिला अस्पताल से रेफर मरीजों को लखनऊ लेकर गए। स्थिति साफ नहीं होने से दोपहर तक मरीज के परिवारीजन एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। 108 व 102 नंबर पर दोपहर तक एंबुलेंस व्यस्त होने की बात बताई जाती रही।
प्रसूताओं व प्रसव पीड़ित महिलाओं को अस्पताल व घर पहुंचाने के लिए 102 एंबुलेेंस की व्यवस्था है। सोमवार की हड़ताल से 12 प्रसव पीड़ित महिलाओं को जिला महिला अस्पताल पहुंचने में परेशानी हुई।
महिलाओं के परिवारीजन निजी साधनों से लेकर उन्हें जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचे। सीएमएस डॉ. उर्मिला चौधरी के मुताबिक एक दिन मेें करीब 20 से 24 प्रसव पीड़ित महिलाएं अस्पताल आती हैं।