{"_id":"127-47133","slug":"Sultanpur-47133-127","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोर्ट ने सीओ को मुल्जिम के रूप में किया तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोर्ट ने सीओ को मुल्जिम के रूप में किया तलब
Sultanpur
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुलतानपुर। दलित सिपाही को अपमानित करने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सीओ उदयनारायन राय को गाली व धमकी देने और दलित उत्पीड़न करने का प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए मुल्जिम के रूप में अदालत में तलब किया है। सीजेएम ने सीओ की कोर्ट में हाजिरी के लिए आगामी चार फरवरी की तिथि नियत की है। सीजेएम ने ये आदेश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ की अदालत पर तैनात कोर्ट मुहर्रिर की याचिका पर किया।
वर्ष 2010 में क्षेत्राधिकारी उदयनारायन राय सीओ लाइन के पद पर तैनात थे। 30 अप्रैल 2010 को दलित सिपाही लालता प्रसाद सरोज पुलिस लाइन में अपनी बीमारी व परेड माफी का प्रमाण पत्र लेकर सीओ उदयनारायन राय को दिखाने गया था। सिपाही लालता का कहना था कि उसे बीमारी के चलते परेड की छूट मिली है।
आरोप है कि जैसे ही लालता ने सीओ उदयनारायन राय को अभिलेख दिखाना चाहा, वे भड़क उठे। सीओ ने सिपाही ललता प्रसाद सरोज को गाली देते हुए कहा कि उसे ऐसे थाने पर ड्यूटी पर भेज दिया जाए, जहां पानी भी न मिले। आरोप है कि सीओ ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए पुलिस परेड में मौजूद पुलिसकर्मियों के सामने सिपाही को अपमानित किया। मामले में पीड़ित सिपाही लालता प्रसाद ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में सीओ उदयनारायन राय के खिलाफ याचिका दायर की थी।
विज्ञापन
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद कुमार सिंह ने अभिलेखीय व मौखिक साक्ष्य का अवलोकन करने के बाद सीओ उदयनारायन राय को प्रथम दृष्टया आईपीसी की धारा 504/506 व एससी/एसटी एक्ट की धारा 3 (1) (10) के तहत विचारण के लिए तलब किए जाने का पर्याप्त आधार पाया। सीजेएम ने सीओ को विचारण के लिए अदालत में तलब करने का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने सीओ की अदालत में हाजिरी के लिए चार फरवरी 2013 की तिथि नियत की है।
विज्ञापन
वर्ष 2010 में क्षेत्राधिकारी उदयनारायन राय सीओ लाइन के पद पर तैनात थे। 30 अप्रैल 2010 को दलित सिपाही लालता प्रसाद सरोज पुलिस लाइन में अपनी बीमारी व परेड माफी का प्रमाण पत्र लेकर सीओ उदयनारायन राय को दिखाने गया था। सिपाही लालता का कहना था कि उसे बीमारी के चलते परेड की छूट मिली है।
विज्ञापन
आरोप है कि जैसे ही लालता ने सीओ उदयनारायन राय को अभिलेख दिखाना चाहा, वे भड़क उठे। सीओ ने सिपाही ललता प्रसाद सरोज को गाली देते हुए कहा कि उसे ऐसे थाने पर ड्यूटी पर भेज दिया जाए, जहां पानी भी न मिले। आरोप है कि सीओ ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए पुलिस परेड में मौजूद पुलिसकर्मियों के सामने सिपाही को अपमानित किया। मामले में पीड़ित सिपाही लालता प्रसाद ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में सीओ उदयनारायन राय के खिलाफ याचिका दायर की थी।
विज्ञापन
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद कुमार सिंह ने अभिलेखीय व मौखिक साक्ष्य का अवलोकन करने के बाद सीओ उदयनारायन राय को प्रथम दृष्टया आईपीसी की धारा 504/506 व एससी/एसटी एक्ट की धारा 3 (1) (10) के तहत विचारण के लिए तलब किए जाने का पर्याप्त आधार पाया। सीजेएम ने सीओ को विचारण के लिए अदालत में तलब करने का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने सीओ की अदालत में हाजिरी के लिए चार फरवरी 2013 की तिथि नियत की है।