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अविश्वास प्रस्ताव को उलझाने में जुटे जिम्मेदार
Updated Sat, 01 Jul 2017 01:47 AM IST
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अविश्वास प्रस्ताव को
उलझाने में जुटे जिम्मेदार
क्रासर
भादर के सपा ब्लॉक प्रमुख से जुड़ा मामला
छह जुलाई को होनी थी अविश्वास की बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
गौरीगंज। भादर ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव पर अनिश्चितता के बादल घने होते जा रहे हैं। आलम यह है कि अविश्वास पर बहस व मतदान के लिए पूर्व में नियत तिथि छह जुलाई को यह बैठक होगी भी या नहीं कहना मुश्किल हो गया है। जिम्मेदार अधिकारी मामले को जान-बूझकर उलझाते नजर आ रहे हैं।
भादर के सपा ब्लॉक प्रमुख विनय कुमार यादव उर्फ अखिलेश के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव दो जून को आया था। दो जून को कृष्ण कुमार जायसवाल और प्रवीन कुमार के नेतृत्व में डीएम से मिलने पहुंचे 43 क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने नोटरीयुक्त शपथपत्र देकर ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास पर बहस के लिए बैठक की तिथि नियत करने की मांग की थी। हालांकि शपथ पत्र के साथ दिए गए प्रार्थना पत्र के निर्धारित प्रारूप पर नहीं होने के चलते इन सदस्यों ने दोबारा 12 जून को प्रार्थना पत्र दिया था। 12 जून को दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर डीएम ने अविश्वास पर बैठक के लिए छह जुलाई की तिथि नियत की थी। तिथि नियत होने की जानकारी मिलने के बाद हड़कंप में आए ब्लॉक प्रमुख पक्ष ने लॉबिंग शुरू की। मामले को उलझाने के लिए ब्लॉक प्रमुख पक्ष ने एक बीडीसी सदस्य को डीएम के सामने पेश कर सदस्यों का सत्यापन कराने को कहा। यहीं से मामले में गड़बड़ी शुरू हुई। शिकायत मिलने के बाद डीएम ने बैठक स्थगित करते हुए शपथपत्र देने वालों का सत्यापन करने के लिए 24 जून की तिथि नियत कर दी। इतना ही नहीं 24 जून को सत्यापन से ऐन पहले अधिकारियों ने बीडीसी सदस्यों से निर्वाचन प्रमाण पत्र मांगकर मामले को उलझाने की राह आसान कर दी। मौजूदा समय हालात यह हैं कि छह जुलाई को नियत बैठक होगी भी या नहीं इस पर अनिश्चितता बनी हुई है।
इनसेट
दर्ज होनी चाहिए प्राथमिकी
मामले को उलझाने में अहम रोल निभाने का काम कुछ ऐसे क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने किया जो दोनों पक्षों को साधे रखने की कोशिश में थे। ऐसे सदस्यों की वजह से न सिर्फ प्रशासन का समय जाया हुआ बल्कि उसे जलालत भी झेलनी पड़ी। प्रशासन को चाहिए कि वह दोनों तरफ से शपथ पत्र देने वाले सदस्यों के हस्ताक्षर का मिलान कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए और जेल भेजे।
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उलझाने में जुटे जिम्मेदार
क्रासर
भादर के सपा ब्लॉक प्रमुख से जुड़ा मामला
छह जुलाई को होनी थी अविश्वास की बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
गौरीगंज। भादर ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव पर अनिश्चितता के बादल घने होते जा रहे हैं। आलम यह है कि अविश्वास पर बहस व मतदान के लिए पूर्व में नियत तिथि छह जुलाई को यह बैठक होगी भी या नहीं कहना मुश्किल हो गया है। जिम्मेदार अधिकारी मामले को जान-बूझकर उलझाते नजर आ रहे हैं।
भादर के सपा ब्लॉक प्रमुख विनय कुमार यादव उर्फ अखिलेश के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव दो जून को आया था। दो जून को कृष्ण कुमार जायसवाल और प्रवीन कुमार के नेतृत्व में डीएम से मिलने पहुंचे 43 क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने नोटरीयुक्त शपथपत्र देकर ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास पर बहस के लिए बैठक की तिथि नियत करने की मांग की थी। हालांकि शपथ पत्र के साथ दिए गए प्रार्थना पत्र के निर्धारित प्रारूप पर नहीं होने के चलते इन सदस्यों ने दोबारा 12 जून को प्रार्थना पत्र दिया था। 12 जून को दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर डीएम ने अविश्वास पर बैठक के लिए छह जुलाई की तिथि नियत की थी। तिथि नियत होने की जानकारी मिलने के बाद हड़कंप में आए ब्लॉक प्रमुख पक्ष ने लॉबिंग शुरू की। मामले को उलझाने के लिए ब्लॉक प्रमुख पक्ष ने एक बीडीसी सदस्य को डीएम के सामने पेश कर सदस्यों का सत्यापन कराने को कहा। यहीं से मामले में गड़बड़ी शुरू हुई। शिकायत मिलने के बाद डीएम ने बैठक स्थगित करते हुए शपथपत्र देने वालों का सत्यापन करने के लिए 24 जून की तिथि नियत कर दी। इतना ही नहीं 24 जून को सत्यापन से ऐन पहले अधिकारियों ने बीडीसी सदस्यों से निर्वाचन प्रमाण पत्र मांगकर मामले को उलझाने की राह आसान कर दी। मौजूदा समय हालात यह हैं कि छह जुलाई को नियत बैठक होगी भी या नहीं इस पर अनिश्चितता बनी हुई है।
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दर्ज होनी चाहिए प्राथमिकी
मामले को उलझाने में अहम रोल निभाने का काम कुछ ऐसे क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने किया जो दोनों पक्षों को साधे रखने की कोशिश में थे। ऐसे सदस्यों की वजह से न सिर्फ प्रशासन का समय जाया हुआ बल्कि उसे जलालत भी झेलनी पड़ी। प्रशासन को चाहिए कि वह दोनों तरफ से शपथ पत्र देने वाले सदस्यों के हस्ताक्षर का मिलान कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए और जेल भेजे।
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