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जिले में विकसित होगा 5.5 हेक्टेयर अतिरिक्त जलक्षेत्र
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गौरीगंज। मत्स्य उत्पादन में वृद्धि के लिए जिले में 5.5 हेक्टेयर अतिरिक्त जल क्षेत्र विकसित किया जाएगा। अतिरिक्त जल क्षेत्र में पंगेशियस मछली का उत्पादन किया जा सकेगा।
शासन के इस निर्णय से मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को सुविधा के साथ स्वरोजगार मिल सकेगा। इसके लिए विभाग ने पालकों/किसानों से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन करने को कहा है।
किसानों की आय बढ़ाने के लिये प्रदेश सरकार ने कृषि के साथ उन्हें मत्स्य पालन में भी प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। इसके लिए निदेशक मत्स्य एसके सिंह ने जिले में 5.50 हेक्टेयर में अतिरिक्त जल क्षेत्र आच्छादित कर रीसर्कुलरी एक्वा कल्चर सिस्टम के तहत पंगेशियस मत्स्य पालन को बढ़ावा देने का निर्देश दिया है।
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निदेशक का पत्र मिलने के बाद मत्स्य विभाग ने किसानों/पालकों से विभागीय वेबसाइट पर राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मत्स्य उत्पादन के लिए ऑनलाइन आवेदन करने को कहा है।
आवेदन के बाद विभाग पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर किसानों/पालकों का चयन करते हुए उन्हें अतिरिक्त जल क्षेत्र आच्छादित करेगा। मत्स्य उत्पादन करने पर मत्स्य बीज, रियरिंग यूनिट निर्माण व उसके निवेश, रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम में पंगेशियस मछली पालन करने पर अनुदान की राशि डीबीटी के माध्यम से खाते में ट्रांसफर करेगा।
अतिरिक्त जल क्षेत्र आच्छादित कर मत्स्य उत्पादन परियोजना की कुल लागत प्रति हेक्टेयर 61 लाख रुपये आएगी। इसमें अतिरिक्त जल क्षेत्र आच्छादित करने की कुल लागत 3.5 लाख रुपये है।
मत्स्य बीज रियरिंग यूनिट निर्माण पर 7.5 लाख रुपये व रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम पर 50 लाख रुपये लागत आएगी। इसमें अनुदान की राशि 40 प्रतिशत होगी, जिसे तीन किस्तों में डीबीटी के माध्यम से पालक के अकाउंट में भेजा जाएगा।
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शासन के इस निर्णय से मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को सुविधा के साथ स्वरोजगार मिल सकेगा। इसके लिए विभाग ने पालकों/किसानों से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन करने को कहा है।
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किसानों की आय बढ़ाने के लिये प्रदेश सरकार ने कृषि के साथ उन्हें मत्स्य पालन में भी प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। इसके लिए निदेशक मत्स्य एसके सिंह ने जिले में 5.50 हेक्टेयर में अतिरिक्त जल क्षेत्र आच्छादित कर रीसर्कुलरी एक्वा कल्चर सिस्टम के तहत पंगेशियस मत्स्य पालन को बढ़ावा देने का निर्देश दिया है।
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निदेशक का पत्र मिलने के बाद मत्स्य विभाग ने किसानों/पालकों से विभागीय वेबसाइट पर राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मत्स्य उत्पादन के लिए ऑनलाइन आवेदन करने को कहा है।
आवेदन के बाद विभाग पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर किसानों/पालकों का चयन करते हुए उन्हें अतिरिक्त जल क्षेत्र आच्छादित करेगा। मत्स्य उत्पादन करने पर मत्स्य बीज, रियरिंग यूनिट निर्माण व उसके निवेश, रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम में पंगेशियस मछली पालन करने पर अनुदान की राशि डीबीटी के माध्यम से खाते में ट्रांसफर करेगा।
अतिरिक्त जल क्षेत्र आच्छादित कर मत्स्य उत्पादन परियोजना की कुल लागत प्रति हेक्टेयर 61 लाख रुपये आएगी। इसमें अतिरिक्त जल क्षेत्र आच्छादित करने की कुल लागत 3.5 लाख रुपये है।
मत्स्य बीज रियरिंग यूनिट निर्माण पर 7.5 लाख रुपये व रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम पर 50 लाख रुपये लागत आएगी। इसमें अनुदान की राशि 40 प्रतिशत होगी, जिसे तीन किस्तों में डीबीटी के माध्यम से पालक के अकाउंट में भेजा जाएगा।