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अंडरपास के निर्माण से 25 हजार की आबादी को मिलेगी सहूलियत
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सुल्तानपुर। प्रदेश में 300 रेलवे क्रॉसिंगों पर ओवरब्रिज या अंडरपास बनाए जाने के सरकार के फैसले से भदैंया विकास खंड क्षेत्र के रमऊ का पुरवा गांव के लोगों में लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होने की आस जाग गई है। अंडरपास बन जाने से आसपास के 10 गांवों के करीब 25 हजार लोगों को सहूलियत होगी। खेतीबाड़ी का काम भी आसान होगा।
सुरक्षित व निर्बाध यात्रा सुनिश्चित कराने के लिए प्रदेश में 300 रेलवे क्रॉसिंगों पर ओवरब्रिज या अंडरपास बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। इसमें ऐसे स्थानों को चयनित किया जाएगा जहां बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। अभी शहर में करौंदिया, कुड़वार नाका, गभड़िया, दरियापुर रेलवे क्रॉसिंगों पर ओवरब्रिज का निर्माण किया गया है। इसके अलावा सौरमऊ व पयागीपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास फ्लाईओवर का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्थानों पर मानव रहित रेलवे क्रॉसिंगों पर अंडरपास बनाए गये हैं। कुछ स्थानों पर मानव रहित रेलवे क्रॉसिंगों पर अंडरपास के निर्माण की मांग अभी भी पूरी नहीं हो सकी है। प्रदेश सरकार की ओर से अंडरपास व ओवरब्रिज के निर्माण की घोषणा के बाद भदैंया विकास खंड क्षेत्र अंतर्गत लखनऊ-वाराणसी रेलपथ पर लाखीपुर गांव के पास स्थित रमऊ का पुरवा मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग के आसपास के करीब 10 गांवों के लोगों में अंडरपास बनने की उम्मीद जाग गई है।
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लखनऊ-वाराणसी रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण व विद्युतीकरण के बाद वर्ष 2010 में भदैंया व पखरौली रेलवे स्टेशन के बीच लाखीपुर गांव के पास स्थित मानव रहित रमऊ का पुरवा रेलवे क्रॉसिंग 67-सीके को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। इस पर आवाजाही बंद होने से रमऊ का पुरवा, लाखीपुर, पूरे बाघराय, सातनपुर, भिटहा गांव का संपर्क रेलवे लाइन की विपरीत दिशा में स्थित अभियाकलां, अभियाखुर्द, कुर्मियनवां, पन्नाटिकरी व टोर्डपुर गांव से पूरी तरह से टूट गया।
इन गांवों का संपर्क आपस में टूटने से यहां के लोगों के समक्ष कई तरह की समस्याएं खड़ी हो गईं। रेलवे ट्रैक के दोनों छोर पर स्थित गांवों के कई किसानों के खेत विपरीत दिशा में स्थित हैं। शुरुआत में ग्रामीणों की मांग पर रेलवे की ओर से रमऊ का पुरवा के पास अंडरपास बनवाने का आश्वासन दिया गया था। बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। करीब 10 साल बीत गये लेकिन अभी भी इन गांवों के लोगों को अपने खेतों तक पहुंचने के लिए करीब पांच किमी. की दूरी तय करनी पड़ती है।
सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में 300 रेलवे क्रॉसिगों पर अंडरपास व ओवरब्रिज के निर्माण के प्रस्ताव को सहमति मिलने के बाद ग्रामीणों ने खुशी जताई है। किसान राम अनुज, देवी प्रसाद, विनय कुमार, तिलकधारी, विष्णुदेव, नरसिंह व देवकी नंदन ने बताया कि पिछले 10 साल से ग्रामीण यहां अंडरपास के निर्माण की मांग कर रहे हैं। यहां अंडरपास बन जाने से करीब 25 हजार की आबादी को आवाजाही में सहूलियत मिलेगी।
रेलवे के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लखनऊ-वाराणसी रेलखंड की कई क्रॉसिंगों पर ओवरब्रिज व अंडरपास के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। बजट न होने की वजह से इन प्रोजेक्टों पर काम नहीं हो सका है। यदि बजट मिलेगा तो कार्य करवाया जाएगा।
भदैंया। लाखीपुर रमऊ का पूरा गांव के पास अंडरपास के निर्माण के लिए रिटायर्ड फौजी सुनील मिश्र ने तत्कालीन सांसद वरुण गांधी, वर्तमान सांसद मेनका गांधी व रेलवे अधिकारियों से कई बार मांग की।
ऑनलाइन शिकायत के बाद 11 सितंबर 2020 को जिला प्रशासन की टीम ने अंडरपास निर्माण के लिए सर्वे भी किया था। लोक निर्माण विभाग ने यहां अधिगामी सेतु के निर्माण के लिए शासन को पत्र भी भेजा है। ग्रामीणों की मांग पर सांसद मेनका गांधी ने 5.10 करोड़ रुपये अपनी निधि से देने की लिखा-पढ़ी भी की है। यहां अंडरपास निर्माण की फाइल राज्य सरकार के पास लंबित है।
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सुरक्षित व निर्बाध यात्रा सुनिश्चित कराने के लिए प्रदेश में 300 रेलवे क्रॉसिंगों पर ओवरब्रिज या अंडरपास बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। इसमें ऐसे स्थानों को चयनित किया जाएगा जहां बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। अभी शहर में करौंदिया, कुड़वार नाका, गभड़िया, दरियापुर रेलवे क्रॉसिंगों पर ओवरब्रिज का निर्माण किया गया है। इसके अलावा सौरमऊ व पयागीपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास फ्लाईओवर का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
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इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्थानों पर मानव रहित रेलवे क्रॉसिंगों पर अंडरपास बनाए गये हैं। कुछ स्थानों पर मानव रहित रेलवे क्रॉसिंगों पर अंडरपास के निर्माण की मांग अभी भी पूरी नहीं हो सकी है। प्रदेश सरकार की ओर से अंडरपास व ओवरब्रिज के निर्माण की घोषणा के बाद भदैंया विकास खंड क्षेत्र अंतर्गत लखनऊ-वाराणसी रेलपथ पर लाखीपुर गांव के पास स्थित रमऊ का पुरवा मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग के आसपास के करीब 10 गांवों के लोगों में अंडरपास बनने की उम्मीद जाग गई है।
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लखनऊ-वाराणसी रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण व विद्युतीकरण के बाद वर्ष 2010 में भदैंया व पखरौली रेलवे स्टेशन के बीच लाखीपुर गांव के पास स्थित मानव रहित रमऊ का पुरवा रेलवे क्रॉसिंग 67-सीके को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। इस पर आवाजाही बंद होने से रमऊ का पुरवा, लाखीपुर, पूरे बाघराय, सातनपुर, भिटहा गांव का संपर्क रेलवे लाइन की विपरीत दिशा में स्थित अभियाकलां, अभियाखुर्द, कुर्मियनवां, पन्नाटिकरी व टोर्डपुर गांव से पूरी तरह से टूट गया।
इन गांवों का संपर्क आपस में टूटने से यहां के लोगों के समक्ष कई तरह की समस्याएं खड़ी हो गईं। रेलवे ट्रैक के दोनों छोर पर स्थित गांवों के कई किसानों के खेत विपरीत दिशा में स्थित हैं। शुरुआत में ग्रामीणों की मांग पर रेलवे की ओर से रमऊ का पुरवा के पास अंडरपास बनवाने का आश्वासन दिया गया था। बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। करीब 10 साल बीत गये लेकिन अभी भी इन गांवों के लोगों को अपने खेतों तक पहुंचने के लिए करीब पांच किमी. की दूरी तय करनी पड़ती है।
सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में 300 रेलवे क्रॉसिगों पर अंडरपास व ओवरब्रिज के निर्माण के प्रस्ताव को सहमति मिलने के बाद ग्रामीणों ने खुशी जताई है। किसान राम अनुज, देवी प्रसाद, विनय कुमार, तिलकधारी, विष्णुदेव, नरसिंह व देवकी नंदन ने बताया कि पिछले 10 साल से ग्रामीण यहां अंडरपास के निर्माण की मांग कर रहे हैं। यहां अंडरपास बन जाने से करीब 25 हजार की आबादी को आवाजाही में सहूलियत मिलेगी।
रेलवे के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लखनऊ-वाराणसी रेलखंड की कई क्रॉसिंगों पर ओवरब्रिज व अंडरपास के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। बजट न होने की वजह से इन प्रोजेक्टों पर काम नहीं हो सका है। यदि बजट मिलेगा तो कार्य करवाया जाएगा।
भदैंया। लाखीपुर रमऊ का पूरा गांव के पास अंडरपास के निर्माण के लिए रिटायर्ड फौजी सुनील मिश्र ने तत्कालीन सांसद वरुण गांधी, वर्तमान सांसद मेनका गांधी व रेलवे अधिकारियों से कई बार मांग की।
ऑनलाइन शिकायत के बाद 11 सितंबर 2020 को जिला प्रशासन की टीम ने अंडरपास निर्माण के लिए सर्वे भी किया था। लोक निर्माण विभाग ने यहां अधिगामी सेतु के निर्माण के लिए शासन को पत्र भी भेजा है। ग्रामीणों की मांग पर सांसद मेनका गांधी ने 5.10 करोड़ रुपये अपनी निधि से देने की लिखा-पढ़ी भी की है। यहां अंडरपास निर्माण की फाइल राज्य सरकार के पास लंबित है।