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ईंट भट्ठे पर 23 मजदूरों को बनाया बंधक
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अमेठी। थाना क्षेत्र पीपरपुर में एक ईंट भट्ठे पर 23 मजदूरों को बंधक बनाकर काम कराने का मामला प्रकाश में आने से प्रशासन में हड़कंप मच गया। एससी/एसटी आयोग से हुई शिकायत के बाद घटना का खुलासा हुआ। एससी/एसटी आयोग की दखल पर प्रशासन ने ईंट भट्ठे पर छापा मारकर मजदूरों को मुक्त कराया। इसके साथ ही सभी मजदूरों की मजदूरी भुगतान कराकर घर भेज दिया गया।
पीपरपुर के मोचवा में एक ईंट भट्ठा संचालित है। भट्ठे पर शेखर माझी निवासी गोरा थाना लक्ष्मीपुर जमुई बिहार के साथ रिश्तेदारों समेत उनके गांव के 23 लोग काम करने आए थे।
मजदूरों में नेपाली, रिंकी देवी, टीटू, भोला, जितेंद्र, जवंती देवी, लूरी, राधा देवी, मिंडोरी, मुस्कान, नरेश, मुनिया, सकलदेव, सीता देवी, महेंद्र, भुलिया देवी, अनिल, कृष्णा, मंगल, दिनेश, मुकेश और लालू शामिल थे। शिकायती पत्र के अनुसार भट्ठे का मुंशी उनसे मजदूरी व कार्य तय कर लाया था।
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आरोप है कि मजदूरों के भट्ठे पर पहुंचने के बाद उनसे ईंट पथाई के अलावा अन्य कार्य लिया जाने लगा। मजदूरी मांगने पर उनके साथ गालीगलौज की गई। सभी मजदूरों को ईंट भट्ठे पर बंधक बना लिया गया।
घर जाने के बात तो दूर उनके कहीं आने-जाने पर भी पाबंदी लगा दी गई। इस बीच कहीं से मौका पाकर शेखर माझी ने मामले की शिकायत एससी/एसटी आयोग को भेज दी। एससी/एसटी आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दो जनवरी को जिला प्रशासन को अवगत कराकर कार्रवाई के निर्देश दिए।
मजदूरों को बंधक बनाने का मामला प्रकाश में आने से प्रशासन में हड़कंप मच गया। जिलाधिकारी ने टीम गठित कर मजदूरों को भट्ठे से मुक्त कराने का आदेश दिया। इस पर नायब तहसीलदार श्रीश मिश्र, श्रम प्रवर्तन अधिकारी शशिकला, पीपरपुर थानाध्यक्ष रवींद्र सिंह ने ईंट भट्ठे पर पहुंचकर सभी मजदूरों का बयान दर्ज किया। अधिकारियों ने मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान भी कराया।
पीपरपुर थानाध्यक्ष रवींद्र सिंह ने बताया कि मौके पर अधिकारियों की टीम गई थी। मजदूरों को बंधक नहीं बनाया गया था। मजदूर वहां काम नहीं करना चाहते थे। मजदूरों को मजदूरी दिलाकर घर भेज दिए गया है।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी शशिकला ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश के क्रम में नायब तहसीलदार के साथ टीम ने ईंट भट्ठे पर जाकर जांच की है। मजदूर वहां काम नहीं करना चाहते थे। उनकी मजदूरी दिलाकर उन्हें घर भेजा गया है। मजदूरों के बयान के साथ ही रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जा रही है।
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पीपरपुर के मोचवा में एक ईंट भट्ठा संचालित है। भट्ठे पर शेखर माझी निवासी गोरा थाना लक्ष्मीपुर जमुई बिहार के साथ रिश्तेदारों समेत उनके गांव के 23 लोग काम करने आए थे।
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मजदूरों में नेपाली, रिंकी देवी, टीटू, भोला, जितेंद्र, जवंती देवी, लूरी, राधा देवी, मिंडोरी, मुस्कान, नरेश, मुनिया, सकलदेव, सीता देवी, महेंद्र, भुलिया देवी, अनिल, कृष्णा, मंगल, दिनेश, मुकेश और लालू शामिल थे। शिकायती पत्र के अनुसार भट्ठे का मुंशी उनसे मजदूरी व कार्य तय कर लाया था।
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आरोप है कि मजदूरों के भट्ठे पर पहुंचने के बाद उनसे ईंट पथाई के अलावा अन्य कार्य लिया जाने लगा। मजदूरी मांगने पर उनके साथ गालीगलौज की गई। सभी मजदूरों को ईंट भट्ठे पर बंधक बना लिया गया।
घर जाने के बात तो दूर उनके कहीं आने-जाने पर भी पाबंदी लगा दी गई। इस बीच कहीं से मौका पाकर शेखर माझी ने मामले की शिकायत एससी/एसटी आयोग को भेज दी। एससी/एसटी आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दो जनवरी को जिला प्रशासन को अवगत कराकर कार्रवाई के निर्देश दिए।
मजदूरों को बंधक बनाने का मामला प्रकाश में आने से प्रशासन में हड़कंप मच गया। जिलाधिकारी ने टीम गठित कर मजदूरों को भट्ठे से मुक्त कराने का आदेश दिया। इस पर नायब तहसीलदार श्रीश मिश्र, श्रम प्रवर्तन अधिकारी शशिकला, पीपरपुर थानाध्यक्ष रवींद्र सिंह ने ईंट भट्ठे पर पहुंचकर सभी मजदूरों का बयान दर्ज किया। अधिकारियों ने मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान भी कराया।
पीपरपुर थानाध्यक्ष रवींद्र सिंह ने बताया कि मौके पर अधिकारियों की टीम गई थी। मजदूरों को बंधक नहीं बनाया गया था। मजदूर वहां काम नहीं करना चाहते थे। मजदूरों को मजदूरी दिलाकर घर भेज दिए गया है।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी शशिकला ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश के क्रम में नायब तहसीलदार के साथ टीम ने ईंट भट्ठे पर जाकर जांच की है। मजदूर वहां काम नहीं करना चाहते थे। उनकी मजदूरी दिलाकर उन्हें घर भेजा गया है। मजदूरों के बयान के साथ ही रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जा रही है।