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त्वरित न्याय दिलाने में कारगर साबित हो रहीं लोक अदालतें: डीजे
Updated Thu, 14 Sep 2017 10:31 PM IST
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त्वरित न्याय दिलाने में कारगर लोक अदालतें
राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारण के लिए चिह्नित किए गए 5,465 वाद
फोटो संख्या-6
अमर उजाला ब्यूरो
सुल्तानपुर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रमोद कुमार ने कहा कि लोग अदालत वादकारियों को त्वरित न्याय दिलाने में कारगर साबित हो रही है। छोटे अपराधों व अन्य वादों का निस्तारण लोक अदालत में होने से वादकारियों को वर्षों कोर्ट का चक्कर काटने से मुक्ति मिल जाती है। वे बृहस्पतिवार को अपने विश्राम कक्ष में 17 सितंबर को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों के बारे में मीडिया को जानकारी दे रहे थे।
जिला जज ने कहा कि छोटे-छोटे मुकदमों के लिए वादकारी वर्षों तक अदालत में परेशान होते हैं। वादकारी फौजदारी के छोटे अपराध से जुड़े मुकदमे सुलह-समझौते के जरिए अदालत में निस्तारित कराकर लाभ पा रहे हैं। एमवी एक्ट, गुजारा भत्ता, श्रम संबंधी वाद और दीवानी वादों को निस्तारित कराने के लिए चिह्नित किया जा रहा है। बताया कि फौजदारी के 3707, दीवानी के 321, एमवी एक्ट के 67, श्रम संबंधी 120 और वैवाहिक विवाद से जुड़े 50 केस राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए चिह्नित किए गए हैं। इसके अलावा अमेठी व सुल्तानपुर के प्रशासनिक अफसरों की कोर्ट में लंबित 1200 केस चिह्नित किए गए हैं। बैंक ऋण से संबंधित 2500 वादों को प्रीलीटिगेशन के तहत नियत कराया गया है। राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी/ एडीजे अभयकृष्ण तिवारी ने बताया कि वादकारियों को राष्ट्रीय लोक अदालत में केस निस्तारित कराने पर कई फायदे मिलेंगे। सिविल केस व बैनामा निरस्तीकरण के केस का फैसला होने पर वादी को कोर्ट फीस वापस मिल जाएगी। इसके लिए संबंधित पक्षकार को केस निस्तारण की नकल एडीएम वित्त एवं राजस्व के पास प्रस्तुत करनी होगी और वहां से उन्हें कोर्ट फीस वापस मिल जाएगी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव/सिविल जज सीनियर डिवीजन विजय कुमार द्वितीय ने बताया कि सभी विभागों के विभागाध्यक्षों को पत्र भेजकर ज्यादा से ज्यादा केस निस्तारण कराने के लिए समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
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राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारण के लिए चिह्नित किए गए 5,465 वाद
फोटो संख्या-6
अमर उजाला ब्यूरो
सुल्तानपुर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रमोद कुमार ने कहा कि लोग अदालत वादकारियों को त्वरित न्याय दिलाने में कारगर साबित हो रही है। छोटे अपराधों व अन्य वादों का निस्तारण लोक अदालत में होने से वादकारियों को वर्षों कोर्ट का चक्कर काटने से मुक्ति मिल जाती है। वे बृहस्पतिवार को अपने विश्राम कक्ष में 17 सितंबर को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों के बारे में मीडिया को जानकारी दे रहे थे।
जिला जज ने कहा कि छोटे-छोटे मुकदमों के लिए वादकारी वर्षों तक अदालत में परेशान होते हैं। वादकारी फौजदारी के छोटे अपराध से जुड़े मुकदमे सुलह-समझौते के जरिए अदालत में निस्तारित कराकर लाभ पा रहे हैं। एमवी एक्ट, गुजारा भत्ता, श्रम संबंधी वाद और दीवानी वादों को निस्तारित कराने के लिए चिह्नित किया जा रहा है। बताया कि फौजदारी के 3707, दीवानी के 321, एमवी एक्ट के 67, श्रम संबंधी 120 और वैवाहिक विवाद से जुड़े 50 केस राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए चिह्नित किए गए हैं। इसके अलावा अमेठी व सुल्तानपुर के प्रशासनिक अफसरों की कोर्ट में लंबित 1200 केस चिह्नित किए गए हैं। बैंक ऋण से संबंधित 2500 वादों को प्रीलीटिगेशन के तहत नियत कराया गया है। राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी/ एडीजे अभयकृष्ण तिवारी ने बताया कि वादकारियों को राष्ट्रीय लोक अदालत में केस निस्तारित कराने पर कई फायदे मिलेंगे। सिविल केस व बैनामा निरस्तीकरण के केस का फैसला होने पर वादी को कोर्ट फीस वापस मिल जाएगी। इसके लिए संबंधित पक्षकार को केस निस्तारण की नकल एडीएम वित्त एवं राजस्व के पास प्रस्तुत करनी होगी और वहां से उन्हें कोर्ट फीस वापस मिल जाएगी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव/सिविल जज सीनियर डिवीजन विजय कुमार द्वितीय ने बताया कि सभी विभागों के विभागाध्यक्षों को पत्र भेजकर ज्यादा से ज्यादा केस निस्तारण कराने के लिए समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
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