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राष्ट्राभाषा के बगैर देश रहता है गूंगा
Updated Fri, 14 Sep 2018 11:17 PM IST
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अमेठी। क्षेत्र में शुक्रवार को हिंदी दिवस के मौके पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। वक्ताओं ने राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रति स्वाभिमानी होने पर बल दिया।
शहर के आरआर पीजी कॉलेज में हिंदी विभाग की ओर से हिंदी दिवस पर दो दिवसीय ‘हिंदी शब्द-अर्थ प्रयोग’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि केएनआई के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. राधेश्याम सिंह ने कहा कि, जिस देश में राष्ट्रभाषा नहीं वह देश गूंगा है। देशवासियों में हिंदी भाषा के प्रति स्वाभिमान का अभाव चिंता का विषय है।
हिंदी को क्रियात्मक रूप देना होगा तभी ये विश्व क्षितिज पर स्थापित हो सकेगी। प्राचार्य डॉ. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि, हिंदी ही पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में बांध सकती है। आज हम राष्ट्र के प्रति चिंतन करते समय परिवार को दूर रखते हैं। इससे हमारा चिंतन एकांगी हो जाता है। वही स्थिति भाषा के प्रति भी है।
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डॉ. जेके शास्त्री ने छात्र-छात्राओं को हिंदी की वर्तनी व व्याकरण की जानकारी दी। डॉ. धनंजय सिंह ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ. दिलीप सिंह व डॉ. सीमा सिंह ने किया। रानी सुषमा देवी महिला महाविद्यालय में भी हिंदी दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. माधव प्रसाद पांडेय ने हिंदी के मर्म और विकास पर व्याख्यान दिया। प्राचार्य डॉ. पूनम सिंह ने हिंदी के उत्थान के प्रति बच्चों को प्रेरित किया। संग्रामपुर स्थित गूजीपुर, बड़गांव आदि विद्यालयों में निबंध सुलेख की प्रतियोगिता हुई। इसमें बच्चों को पुरस्कृत भी किया गया।
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शहर के आरआर पीजी कॉलेज में हिंदी विभाग की ओर से हिंदी दिवस पर दो दिवसीय ‘हिंदी शब्द-अर्थ प्रयोग’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि केएनआई के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. राधेश्याम सिंह ने कहा कि, जिस देश में राष्ट्रभाषा नहीं वह देश गूंगा है। देशवासियों में हिंदी भाषा के प्रति स्वाभिमान का अभाव चिंता का विषय है।
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हिंदी को क्रियात्मक रूप देना होगा तभी ये विश्व क्षितिज पर स्थापित हो सकेगी। प्राचार्य डॉ. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि, हिंदी ही पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में बांध सकती है। आज हम राष्ट्र के प्रति चिंतन करते समय परिवार को दूर रखते हैं। इससे हमारा चिंतन एकांगी हो जाता है। वही स्थिति भाषा के प्रति भी है।
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डॉ. जेके शास्त्री ने छात्र-छात्राओं को हिंदी की वर्तनी व व्याकरण की जानकारी दी। डॉ. धनंजय सिंह ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ. दिलीप सिंह व डॉ. सीमा सिंह ने किया। रानी सुषमा देवी महिला महाविद्यालय में भी हिंदी दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. माधव प्रसाद पांडेय ने हिंदी के मर्म और विकास पर व्याख्यान दिया। प्राचार्य डॉ. पूनम सिंह ने हिंदी के उत्थान के प्रति बच्चों को प्रेरित किया। संग्रामपुर स्थित गूजीपुर, बड़गांव आदि विद्यालयों में निबंध सुलेख की प्रतियोगिता हुई। इसमें बच्चों को पुरस्कृत भी किया गया।