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Sultanpur News: फर्जीवाड़े की आशंका में पशुपालन व्यवसाय से जुड़े 152 प्रोजेक्ट खारिज
Sat, 06 Jul 2024 02:26 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Sat, 06 Jul 2024 02:26 AM IST
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सुल्तानपुर।
वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन-2022-23 व 2023-24 में एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर करने वालों की पोल धीरे-धीरे खुलने लगी है। पशुपालन व्यवसाय के 152 प्रस्तावों को जांच के बाद खारिज कर दिया गया। उनके पास न तो पूंजी मिली और न ही भूमि। पशुपालन का पर्याप्त इंतजाम भी नहीं मिला। प्रथमदृष्टया फर्जीवाड़े की आशंका जताई गई। ऐसे में उद्योग विभाग ने प्रस्ताव खारिज कर रिपोर्ट शासन को भेज दी। दो साल के बीच अभी तक सिर्फ एक निवेशक ने उद्योग प्रारंभ करने की सूचना देते हुए ऑनलाइन सब्सिडी के लिए आवेदन किया है।
उद्योग विभाग की ओर से 26 उद्योगों के संचालन का दावा किया जा रहा है। इसमें पांच में उत्पादन शुरू होने की बात कही जा रही है, लेकिन अभी तक एक के अलावा किसी अन्य की ओर से सब्सिडी की मांग नहीं की गई है। ऐसे में अन्य को भी संदिग्ध माना जा रहा है।
विभाग के मुताबिक 185 करोड़ से संचालित 26 उद्योगों में करीब 1600 लोगों को रोजगार मिला है। सूत्रों के मुताबिक इन निवेशकों ने वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन में प्रस्ताव देकर बस अपनी क्षमतावृद्धि की है। इस कारण उद्योग विभाग निवेशकों की प्रतिमाह की प्रगति रिपोर्ट का खुलासा करने से बच रहा है।
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बचे बस 405 प्रस्ताव
वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन में अभी तक 557 ने एमओयू पर हस्ताक्षर करके उद्यमियों ने विभिन्न विभागों से जुड़े उद्योगों में निवेश करने की सहमति दी है। पशुपालन के क्षेत्र में व्यवसाय के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर करने वाले 152 प्रस्ताव खारिज होने के बाद अब करीब 405 प्रस्ताव ही बचे हैं। इनमें 139 को उद्योग विभाग करीब छह माह से तैयार बता रहा है, लेकिन अभी तक उद्योग संचालित करने का आंकड़ा 26 के आगे नहीं बढ़ पा रहा है। उद्यमी मित्र पीयूष दीक्षित के मुताबिक कुछ लोग वर्ष 2026, 2027 तक अपना उद्योग प्रारंभ करने की बात कह रहे हैं। विलंब से स्थापना के बारे में वह कुछ नहीं बता रहे।
100 बकरी व पांच बकरा पालन का था प्रयास
उद्योग विभाग के उपायुक्त अनूप श्रीवास्तव ने बताया कि एमओयू पर हस्ताक्षर करने वालों की ओर से सूचना नहीं दी जा रही है। पड़ताल में पशुपालन विभाग से जुड़े 152 की दावेदारी संदिग्ध पाई गई। इनमें अधिकांश लोग एक करोड़ का लोन लेकर सिर्फ 100 बकरी व पांच बकरा पालन करने के प्रयास में थे।
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वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन-2022-23 व 2023-24 में एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर करने वालों की पोल धीरे-धीरे खुलने लगी है। पशुपालन व्यवसाय के 152 प्रस्तावों को जांच के बाद खारिज कर दिया गया। उनके पास न तो पूंजी मिली और न ही भूमि। पशुपालन का पर्याप्त इंतजाम भी नहीं मिला। प्रथमदृष्टया फर्जीवाड़े की आशंका जताई गई। ऐसे में उद्योग विभाग ने प्रस्ताव खारिज कर रिपोर्ट शासन को भेज दी। दो साल के बीच अभी तक सिर्फ एक निवेशक ने उद्योग प्रारंभ करने की सूचना देते हुए ऑनलाइन सब्सिडी के लिए आवेदन किया है।
उद्योग विभाग की ओर से 26 उद्योगों के संचालन का दावा किया जा रहा है। इसमें पांच में उत्पादन शुरू होने की बात कही जा रही है, लेकिन अभी तक एक के अलावा किसी अन्य की ओर से सब्सिडी की मांग नहीं की गई है। ऐसे में अन्य को भी संदिग्ध माना जा रहा है।
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विभाग के मुताबिक 185 करोड़ से संचालित 26 उद्योगों में करीब 1600 लोगों को रोजगार मिला है। सूत्रों के मुताबिक इन निवेशकों ने वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन में प्रस्ताव देकर बस अपनी क्षमतावृद्धि की है। इस कारण उद्योग विभाग निवेशकों की प्रतिमाह की प्रगति रिपोर्ट का खुलासा करने से बच रहा है।
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बचे बस 405 प्रस्ताव
वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन में अभी तक 557 ने एमओयू पर हस्ताक्षर करके उद्यमियों ने विभिन्न विभागों से जुड़े उद्योगों में निवेश करने की सहमति दी है। पशुपालन के क्षेत्र में व्यवसाय के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर करने वाले 152 प्रस्ताव खारिज होने के बाद अब करीब 405 प्रस्ताव ही बचे हैं। इनमें 139 को उद्योग विभाग करीब छह माह से तैयार बता रहा है, लेकिन अभी तक उद्योग संचालित करने का आंकड़ा 26 के आगे नहीं बढ़ पा रहा है। उद्यमी मित्र पीयूष दीक्षित के मुताबिक कुछ लोग वर्ष 2026, 2027 तक अपना उद्योग प्रारंभ करने की बात कह रहे हैं। विलंब से स्थापना के बारे में वह कुछ नहीं बता रहे।
100 बकरी व पांच बकरा पालन का था प्रयास
उद्योग विभाग के उपायुक्त अनूप श्रीवास्तव ने बताया कि एमओयू पर हस्ताक्षर करने वालों की ओर से सूचना नहीं दी जा रही है। पड़ताल में पशुपालन विभाग से जुड़े 152 की दावेदारी संदिग्ध पाई गई। इनमें अधिकांश लोग एक करोड़ का लोन लेकर सिर्फ 100 बकरी व पांच बकरा पालन करने के प्रयास में थे।