{"_id":"59ee204b4f1c1b68678b72de","slug":"111508778059-sultanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एडवाइजरी डाला छठ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एडवाइजरी डाला छठ
Updated Mon, 23 Oct 2017 10:47 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सीताकुंड पर डाला छठ की तैयारी शुरू
क्रासर-
पहले दिन नहाय खाय का होगा कार्यक्रम
फोटो संख्या-
अमर उजाला ब्यूरो
सुल्तानपुर। दीपावली के बाद छठ महापर्व आता है। चार दिन का तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत मंगलवार से हो रही है। मंगलवार को नहाय खाय है। बुधवार को खरना, बृहस्पतिवार को सांझ का अर्घ्य और शुक्रवार को भोर के अर्घ्य के साथ यह त्योहार संपन्न होगा। छठ भगवान सूर्य की उपासना का पर्व है। ऐसा माना जाता है कि छठ पूजा करने वाले को सुख-समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है और व्रती की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। छठ पूजा को मन्नतों का पर्व भी कहा जाता है। छठ का व्रत रखने वाली महिलाओं को परवैतिन कहा जाता है। छठ करने वाले लगातार 36 घंटों तक उपवास रखते हैं। इस दौरान खाना तो क्या, पानी तक नहीं पिया जाता है। डाला छठ पर्व को देखते हुए नगर पालिका परिषद के अधिशाषी अधिकारी दुर्गेश्वर तिवारी ने सीताकुंड घाट के आसपास साफ-सफाई का निर्देश दिया है। वहीं, छठ को लेकर बाजार में भी खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है। सोमवार को चौक इलाके में रौनक रही। छठ में गन्ना, फल, कच्ची हल्दी, सिंघाड़ा, नींबू, मूली आदि का प्रयोग किया जाता है।
बॉक्स
महिलाओं ने बताया डाला छठ का महत्व
फोटो संख्या-17/18
गुड़िया सोनी ने बताया कि भगवान सूर्य की उपासना के साथ डाला छठ पर्व की शुरुआत होती है। किसी भी पर्व की शुरुआत स्नान के साथ ही होती है। कहा कि जब से वे छठ पर्व का व्रत रख रही हैं, उनके घर में धन-धान्य की कोई कमी नहीं है। मीरा सोनी बताती हैं कि छठ पूजा में भगवान सूर्य की पूजा अर्चना का प्रावधान है। उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इस व्रत की शुरुआत की जाती है। कहा कि जो भी व्यक्ति श्रद्धा भाव से छठ मइया की पूजा करता है, उसकी संतान की छठ माता हमेशा रक्षा करती हैं।
क्रासर-
पहले दिन नहाय खाय का होगा कार्यक्रम
फोटो संख्या-
अमर उजाला ब्यूरो
सुल्तानपुर। दीपावली के बाद छठ महापर्व आता है। चार दिन का तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत मंगलवार से हो रही है। मंगलवार को नहाय खाय है। बुधवार को खरना, बृहस्पतिवार को सांझ का अर्घ्य और शुक्रवार को भोर के अर्घ्य के साथ यह त्योहार संपन्न होगा। छठ भगवान सूर्य की उपासना का पर्व है। ऐसा माना जाता है कि छठ पूजा करने वाले को सुख-समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है और व्रती की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। छठ पूजा को मन्नतों का पर्व भी कहा जाता है। छठ का व्रत रखने वाली महिलाओं को परवैतिन कहा जाता है। छठ करने वाले लगातार 36 घंटों तक उपवास रखते हैं। इस दौरान खाना तो क्या, पानी तक नहीं पिया जाता है। डाला छठ पर्व को देखते हुए नगर पालिका परिषद के अधिशाषी अधिकारी दुर्गेश्वर तिवारी ने सीताकुंड घाट के आसपास साफ-सफाई का निर्देश दिया है। वहीं, छठ को लेकर बाजार में भी खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है। सोमवार को चौक इलाके में रौनक रही। छठ में गन्ना, फल, कच्ची हल्दी, सिंघाड़ा, नींबू, मूली आदि का प्रयोग किया जाता है।
बॉक्स
महिलाओं ने बताया डाला छठ का महत्व
फोटो संख्या-17/18
गुड़िया सोनी ने बताया कि भगवान सूर्य की उपासना के साथ डाला छठ पर्व की शुरुआत होती है। किसी भी पर्व की शुरुआत स्नान के साथ ही होती है। कहा कि जब से वे छठ पर्व का व्रत रख रही हैं, उनके घर में धन-धान्य की कोई कमी नहीं है। मीरा सोनी बताती हैं कि छठ पूजा में भगवान सूर्य की पूजा अर्चना का प्रावधान है। उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इस व्रत की शुरुआत की जाती है। कहा कि जो भी व्यक्ति श्रद्धा भाव से छठ मइया की पूजा करता है, उसकी संतान की छठ माता हमेशा रक्षा करती हैं।
विज्ञापन