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गांवों में नहीं हुआ काम, लाखों का कर लिया गया भुगतान
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जिले में सरकारी धन का बंदरबांट करने का सिलसिला जारी है। कई ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण, हैंडपंपों की मरम्मत आदि कार्य कराने के नाम पर लाखों रुपये का बंदरबांट कर लिया गया है। इसके अलावा अन्य कार्य कराने के नाम पर भी धन निकाल लिया गया है। इसका खुलासा चतरा और नगवां ब्लॉक के कई ग्राम पंचायतों में कराए गए कार्यों की सोशल ऑडिट करने पर पहुंची टीम की जांच में हुआ है। जांच के दौरान कई ग्राम पंचायत विभिन्न कार्यों का रिकार्ड तक उपलब्ध नहीं करा सके। टीमों की रिपोर्ट देने के बावजूद अभी तक सरकारी धन हजम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई न होना चर्चा का विषय बना हुआ है।
बता दें कि जिले में वर्ष 2007 से 2010 के बीच करीब तीन सौ करोड़ के मनरेगा घोटाले की सीबीआई अभी जांच कर ही रही है। इसके बावजूद कई ग्राम पंचायतों में मनरेगा से कराए जा रहे कार्यों में गड़बड़ी और घोटाले की शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। विकास विभाग के सूत्रों की मानें तो वर्ष 2020-21 में कराए गए और शुरू किए गए कार्यों की सोशल ऑडिट टीमों के जरिए कराई गई जांच और सत्यापन में गड़बड़ियां सामने आई थीं। सोशल ऑडिट टीमों की जांच के दौरान चतरा ब्लॉक के बिरधी गांव में वर्ष 2020-21 में आन द रिकार्ड अच्छा खासा पौधरोपण किया गया लेकिन अधिकांश पौधे किस जगह रोपे गए और वह कहां गए, यह किसी को नहीं मालूम। नगवां ब्लाक के सुअरसोत में नीबू की बागवानी में भी गड़बड़ी सामने आई है।
दूबेपुर और खलियारी ग्राम पंचायत में कराए गए कई कार्यों का अभिलेख ही नहीं मिल सका। चेरुई में टॉयलेट रूम निर्माण पर लाखों रुपये सामग्री पर व्यय दिखाया गया है लेकिन कार्य किस जगह और कब कराया गया यह न तो ग्रामीणों को मालूम है, न ही कार्यों का सत्यापन करने पहुंची सोशल ऑडिट टीम को ही हो सका। सिकरवार में सामुदायिक शौचालय निर्माण में हजारों रुपये मजदूरी पर व्यय हुए हैं लेकिन इसके अभिलेख हैं ही नहीं। भुसौलिया में नाली की मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए लेकिन इसका भी रिकार्ड नहीं है। इसी तरह से कई गांवों में विकास कार्य कराने के नाम पर गड़बड़ी सामने आई है। टीम ने रिपोर्ट दे दी है लेकिन कई माह रिपोर्ट दिए हो गए लेकिन अभी तक संबंधितों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। चर्चा है कि अन्य ब्लॉकों के भी कई ग्राम पंचायतों में कार्यों को कराने में अनियमितता बरती गई है। इसकी जिलास्तरीय अधिकारियों से जांच कराने पर सच्चाई का पता चल जाएगा।
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चहेते फर्मों को किया गया भुगतान
जिले में सिर्फ सीमेंटेड बेंचों लगाने में ही नहीं, हैंडपंप मरम्मत, फर्नीचर आपूर्ति और स्ट्रीट लाइट आपूर्ति के नाम पर भी सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। सूत्रों की मानें तो चतरा ब्लाक के महज दस ग्राम पंचायतों में सोशल ऑडिट टीम की जांच में लाखों का व्यारा-न्यारा करने का मामला उजागर हुआ है। हैंडपंप मरम्मत के नाम महज एक दो फर्मों को नियमों को ताख पर रख कर भुगतान कर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है। इसकी उच्च स्तरीय जांच होने पर सच्चाई खुलकर सामने आएगी।
किस फर्म को कितना भुगतान हुआ है, इसकी जांच कराई जाएगी। बगैर आपूर्ति के भुगतान किया गया होगा तो संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - सुधाकर राम, सहायक विकास अधिकारी पंचायत, चतरा ब्लॉक
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बता दें कि जिले में वर्ष 2007 से 2010 के बीच करीब तीन सौ करोड़ के मनरेगा घोटाले की सीबीआई अभी जांच कर ही रही है। इसके बावजूद कई ग्राम पंचायतों में मनरेगा से कराए जा रहे कार्यों में गड़बड़ी और घोटाले की शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। विकास विभाग के सूत्रों की मानें तो वर्ष 2020-21 में कराए गए और शुरू किए गए कार्यों की सोशल ऑडिट टीमों के जरिए कराई गई जांच और सत्यापन में गड़बड़ियां सामने आई थीं। सोशल ऑडिट टीमों की जांच के दौरान चतरा ब्लॉक के बिरधी गांव में वर्ष 2020-21 में आन द रिकार्ड अच्छा खासा पौधरोपण किया गया लेकिन अधिकांश पौधे किस जगह रोपे गए और वह कहां गए, यह किसी को नहीं मालूम। नगवां ब्लाक के सुअरसोत में नीबू की बागवानी में भी गड़बड़ी सामने आई है।
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दूबेपुर और खलियारी ग्राम पंचायत में कराए गए कई कार्यों का अभिलेख ही नहीं मिल सका। चेरुई में टॉयलेट रूम निर्माण पर लाखों रुपये सामग्री पर व्यय दिखाया गया है लेकिन कार्य किस जगह और कब कराया गया यह न तो ग्रामीणों को मालूम है, न ही कार्यों का सत्यापन करने पहुंची सोशल ऑडिट टीम को ही हो सका। सिकरवार में सामुदायिक शौचालय निर्माण में हजारों रुपये मजदूरी पर व्यय हुए हैं लेकिन इसके अभिलेख हैं ही नहीं। भुसौलिया में नाली की मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए लेकिन इसका भी रिकार्ड नहीं है। इसी तरह से कई गांवों में विकास कार्य कराने के नाम पर गड़बड़ी सामने आई है। टीम ने रिपोर्ट दे दी है लेकिन कई माह रिपोर्ट दिए हो गए लेकिन अभी तक संबंधितों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। चर्चा है कि अन्य ब्लॉकों के भी कई ग्राम पंचायतों में कार्यों को कराने में अनियमितता बरती गई है। इसकी जिलास्तरीय अधिकारियों से जांच कराने पर सच्चाई का पता चल जाएगा।
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चहेते फर्मों को किया गया भुगतान
जिले में सिर्फ सीमेंटेड बेंचों लगाने में ही नहीं, हैंडपंप मरम्मत, फर्नीचर आपूर्ति और स्ट्रीट लाइट आपूर्ति के नाम पर भी सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। सूत्रों की मानें तो चतरा ब्लाक के महज दस ग्राम पंचायतों में सोशल ऑडिट टीम की जांच में लाखों का व्यारा-न्यारा करने का मामला उजागर हुआ है। हैंडपंप मरम्मत के नाम महज एक दो फर्मों को नियमों को ताख पर रख कर भुगतान कर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है। इसकी उच्च स्तरीय जांच होने पर सच्चाई खुलकर सामने आएगी।
किस फर्म को कितना भुगतान हुआ है, इसकी जांच कराई जाएगी। बगैर आपूर्ति के भुगतान किया गया होगा तो संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - सुधाकर राम, सहायक विकास अधिकारी पंचायत, चतरा ब्लॉक