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प्रधान के कहने पर नहीं दिया वोट तो आवास की सूची से काट दिया गया नाम
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प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी की शिकायतें कम नहीं हो रहीं। पिछले दिनों पंचायती राज मंत्री की चौपाल के दौरान भी आवास योजना में मनमानी का आरोप लगा था। अब चतरा ब्लाक में रामगढ़ के कई लोगों ने अपनी पात्रता का दावा करते हुए अफसरों पर उन्हें योजना के लाभ से वंचित करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव में प्रधान के कहने पर एक विशेष राजनीतिक दल को वोट न देने पर उनका नाम पात्रों की सूची से हटा दिया गया है।
रामगढ़ गांव की पिंकी, सुशीला, इंद्रावती, पूनम, अर्चना, सरिता आदि ने बीडीओ को प्रार्थना पत्र दिया है। उनका आरोप है कि वे झुग्गी-झोपड़ी में गुजारा करती हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें भी पक्की छत मिलने की आस जगी थी। वर्ष 2020-21 में प्रधानमंत्री आवास योजना में उनका चयन किया गया था लेकिन अब सूची से उनका नाम हटा दिया गया है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान प्रधान ने विधानसभा चुनाव में एक राजनीतिक दल के पक्ष में मतदान करने का दबाव दिया था। उनकी बात न सुनने पर ही द्वेष वश आवास की सूची से नाम काटा गया है। उन्होंने मामले की जांच करने की मांग की। इस बाबत ग्राम प्रधान बलराज मौर्य का कहना था कि नाम काटने या जोड़ने में हमारी कोई भूमिका नहीं है। यह कार्य सेक्रेट्री और ब्लाक के कर्मचारियों के माध्यम से होता है। ग्रामीणों के आरोप निराधार हैं।
शिकायत की जांच कराई गई है। आवेदकों का नाम सूची से हटाया गया है। ऐसा क्यों किया गया, इस बारे में तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। समुचित जवाब न देने पर कार्रवाई की जाएगी। - उत्कर्ष सक्सेना, बीडीओ, चतरा।
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रामगढ़ गांव की पिंकी, सुशीला, इंद्रावती, पूनम, अर्चना, सरिता आदि ने बीडीओ को प्रार्थना पत्र दिया है। उनका आरोप है कि वे झुग्गी-झोपड़ी में गुजारा करती हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें भी पक्की छत मिलने की आस जगी थी। वर्ष 2020-21 में प्रधानमंत्री आवास योजना में उनका चयन किया गया था लेकिन अब सूची से उनका नाम हटा दिया गया है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान प्रधान ने विधानसभा चुनाव में एक राजनीतिक दल के पक्ष में मतदान करने का दबाव दिया था। उनकी बात न सुनने पर ही द्वेष वश आवास की सूची से नाम काटा गया है। उन्होंने मामले की जांच करने की मांग की। इस बाबत ग्राम प्रधान बलराज मौर्य का कहना था कि नाम काटने या जोड़ने में हमारी कोई भूमिका नहीं है। यह कार्य सेक्रेट्री और ब्लाक के कर्मचारियों के माध्यम से होता है। ग्रामीणों के आरोप निराधार हैं।
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शिकायत की जांच कराई गई है। आवेदकों का नाम सूची से हटाया गया है। ऐसा क्यों किया गया, इस बारे में तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। समुचित जवाब न देने पर कार्रवाई की जाएगी। - उत्कर्ष सक्सेना, बीडीओ, चतरा।
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