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वीरांगना महारानी दुर्गावती का मनाया गया 457वां बलिदान दिवस
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डाला क्षेत्र में महारानी दुर्गावती के प्रतिमा पर दीप प्रज्जवलित कार्यक्रम का शुभारंभ करते ओबरा
- फोटो : SONBHADRA
चोपन विकास खंड के बाड़ी गांव में स्थित भाजपा कार्यालय पर बृहस्पतिवार को ओबरा विधायक संजीव कुमार गोंड़ के नेतृत्व में वीरांगना महारानी दुर्गावती का 457वां बलिदान दिवस मनाया गया। विधायक संजीव कुमार गोंड़ ने कहा कि महारानी दुर्गावती ने वीरता की मिसाल पेश की है। वह निडर, बहादुर महिला के साथ ही प्रजा हितैषी भी थी। उनकी शादी गढ़ मंडला के राजा दलपत शाह से हुई थी।
कहा कि रानी दुर्गावती के ऐश्वर्य की गाथा जब अकबर को पता चला कि गढ़ा मंडला की शासक एक स्त्री है, तो उसके आंखों में खटकने लगीं और वह कई बार गढ़ा मंडला पर आक्रमण किया लेकिन महारानी के आगे उसकी एक भी नहीं चली। अकबर द्वारा बार-बार हमला करने पर रानी ने वीरता से जवाब दिया। जब उन्हें लगा कि वह बंदी बना ली जाएंगी तब महारानी ने अपनी कटार से खुद का बलिदान कर दिया। गोंडवाना समाज के अध्यक्ष शम्भू गोंड, धर्मार्थ रघुराई, रामसागर खरवार, रामबरन, मिठाई लाल गोंड़, विजय यादव, मदन गोंड, टाटा चौधरी, ओम प्रकाश शर्मा, बबलू, आदि मौजूद रहे।
उधर विकास खंड दुद्धी के बैरखड़ गांव में बृहस्पतिवार को आदिवासी समाज के लोगों ने रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस मनाया। लाल मोहन उइके, आनंद कुमार शयामले, भीम सिंह मरकाम, हरिकिशुन उइके, रामकिशन मारबि, मोती लाल सहित गांव के अन्य आदिवासी समुदाय के लोग उपस्थित रहे। वहीं मल्देवा स्थित महारानी दुर्गावती स्मारक स्थल पर बलिदान दिवस मनाया गया। 52 गढ़ के देवी-देवताओं का स्मरण करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया। मुख्य धर्माचार्य अनिल सिंह ने पूजा पाठ करवाया। कार्यक्रम संयोजक अखिल भारतीय आदिवासी महासंघ के जिला अध्यक्ष फौजदार सिंह परस्ते, ललित सिंह,विजय सिंह, सदानंद, राजेश्वर, कमलेश, रामाश्रय, हीरामणि, ड्यूटी सिंह, समुंद्री देवी, शिवानी, दिव्या, ज्योति, दीपू, रामफल, विनय चेरो, आभा पनिका रहे। संचालन फौदार सिंह परस्ते ने किया।
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कहा कि रानी दुर्गावती के ऐश्वर्य की गाथा जब अकबर को पता चला कि गढ़ा मंडला की शासक एक स्त्री है, तो उसके आंखों में खटकने लगीं और वह कई बार गढ़ा मंडला पर आक्रमण किया लेकिन महारानी के आगे उसकी एक भी नहीं चली। अकबर द्वारा बार-बार हमला करने पर रानी ने वीरता से जवाब दिया। जब उन्हें लगा कि वह बंदी बना ली जाएंगी तब महारानी ने अपनी कटार से खुद का बलिदान कर दिया। गोंडवाना समाज के अध्यक्ष शम्भू गोंड, धर्मार्थ रघुराई, रामसागर खरवार, रामबरन, मिठाई लाल गोंड़, विजय यादव, मदन गोंड, टाटा चौधरी, ओम प्रकाश शर्मा, बबलू, आदि मौजूद रहे।
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उधर विकास खंड दुद्धी के बैरखड़ गांव में बृहस्पतिवार को आदिवासी समाज के लोगों ने रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस मनाया। लाल मोहन उइके, आनंद कुमार शयामले, भीम सिंह मरकाम, हरिकिशुन उइके, रामकिशन मारबि, मोती लाल सहित गांव के अन्य आदिवासी समुदाय के लोग उपस्थित रहे। वहीं मल्देवा स्थित महारानी दुर्गावती स्मारक स्थल पर बलिदान दिवस मनाया गया। 52 गढ़ के देवी-देवताओं का स्मरण करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया। मुख्य धर्माचार्य अनिल सिंह ने पूजा पाठ करवाया। कार्यक्रम संयोजक अखिल भारतीय आदिवासी महासंघ के जिला अध्यक्ष फौजदार सिंह परस्ते, ललित सिंह,विजय सिंह, सदानंद, राजेश्वर, कमलेश, रामाश्रय, हीरामणि, ड्यूटी सिंह, समुंद्री देवी, शिवानी, दिव्या, ज्योति, दीपू, रामफल, विनय चेरो, आभा पनिका रहे। संचालन फौदार सिंह परस्ते ने किया।

दुद्धी क्षेत्र में रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस मनाते आदिवासी।- फोटो : SONBHADRA
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