सोनभद्र। सदर कोतवाली पुलिस ने फर्जी दिव्यांग पत्र जारी करने के मामले में कोर्ट के निर्देश पर चार लोगों के विरुद्ध जालसाजी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। आरोपियों में स्वास्थ्य विभाग का संविदा कर्मी भी शामिल है। सदर कोतवाली क्षेत्र के घुवासकला निवासी धर्मशंकर त्रिपाठी ने न्यायालय के समक्ष प्रार्थना पत्र देकर बताया कि वह श्रवण बाधित हैं। उनका स्वास्थ्य विभाग से 53 फीसदी दिव्यांगता का प्रमाण पत्र भी वर्ष 2007 से जारी है। बताया कि 2018 में बट्ट गांव निवासी राजू मौर्या उनके घर आया। दिव्यांग प्रमाण पत्र देखने के लिए लिया और चोरी से फोटो खींच ली। इसके बाद राजू ने उसके दिव्यांग प्रमाणपत्र कूटरचित ढंग से जारी कराकर उसका लाभ लेने लगा। सीएमओ कार्यालय सोनभद्र और वाराणसी के मेडिकल ऑफिसरों की मिलीभगत से उसने यह कृत्य किया। मामले की जानकारी उसे तब हुई, जब वह बनारस से राबर्ट्सगंज की यात्रा कर रहा था। बस कंडक्टर ने उसी नंबर पर राजू के नाम से प्रमाणपत्र जारी होने की बात कहते हुए उसे रास्ते में बस से उतार दिया। गत 14 जुलाई को सीएमओ कार्यालय में बाबू के पद पर तैनात संविदा कर्मी चंचल यादव ने उसे फोन कर पूरा पेपर लेकर सीएमओ कार्यालय मंगाया और प्रमाण पत्र अपने पास रख लिया। बाद में टालमटोल कर दौड़ाने लगे। बाद में इसे गायब कर दिया गया। उसे डराने धमकाने के साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी गई। थाने पर कोई सुनवाई न होने पर कोर्ट में अपील की। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने राजू मौर्या, सीएमओ कार्यालय में कार्यरत चंचल यादव, उसके साथी आयुष, अजय के साथ ही कुछ अज्ञात पर जालसाजी, कूटरचित अभिलेख बनाने, आपराधिक षड्यंत्र, जान से मारने की धमकी सहित अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है।