UP Nikay Chunav: मौसम ने बरसाया सितम तो खामियों से भी ठिठके कदम, बूथ पर पहुंचकर भी निराश लौटे मतदाता
UP Nikay Chunav 2023: सोनभद्र जिले में निकाय चुनाव के लिए मतदान शुरू होते ही बूथों पर मतदाताओं की कतार बढ़ने लगी, लेकिन दिन चढ़ने के साथ यह छोटी होने लगी थी। तीखी धूप से बेहाल लोग घरों से बाहर निकलने से कतराते रहे।
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कुछ मौसम बेरहम था तो कुछ मतदाता सूची की खामियों ने भी मायूस किया। नतीजा चिलचिलाती धूप में तमाम मतदाता घरों से बाहर नहीं निकले और जो निकले भी तो उन्हें बूथ पर पहुंचकर निराश लौटना पड़ा। हाथ में मतदाता पहचान पत्र होने के बाद भी वह सूची में अपना नाम ढूंढते रहे। काफी प्रयास के बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिली। व्यवस्था की खामियों को कोसते हुए वह घर लौट गए। यह हाल रहा मिर्जापुर मंडल के सोनभद्र जिले का। जिले में शाम छह बजे तक 60.05 फीसदी मतदान हुआ।
निकाय चुनाव के लिए मतदान शुरू होते ही बूथों पर मतदाताओं की कतार बढ़ने लगी, लेकिन दिन चढ़ने के साथ यह छोटी होने लगी थी। तीखी धूप से बेहाल लोग घरों से बाहर निकलने से कतराते रहे। खासतौर से महिला मतदाताओं में मतदान के प्रति दोपहर में रूझान कम दिखा। बूथों के बाहर पर्याप्त छाया का इंतजाम न होने से भी दिक्कत आई।
दोपहर 12 बजे के बाद सन्नाटा पसरा
इसके चलते अधिकांश केंद्रों पर दोपहर 12 बजे के बाद सन्नाटा पसरा रहा। एक-दो वोटर ही वहां मौजूद रहे। दूसरी ओर कुछ मतदाता ऐसे भी रहे, जो लोकतंत्र के महापर्व में अपनी हिस्सेदारी निभाने के लिए पूरे उत्साह के साथ घरों से निकले, मगर बूथ पर पहुंचने के बाद पता चला कि लिस्ट में उनका नाम नहीं है।
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नगर के बढ़ौली चौराहा पर स्थित डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालक डॉ. रमाशंकर सिंह अपनी पत्नी जय लक्ष्मी सिंह के साथ सुबह ही राजकीय कन्या इंटर कॉलेज स्थित बूथ पर वोट देने पहुंचे थे। काफी देर तक लिस्ट खंगालते रहे, मगर लिस्ट में उनका नाम नहीं मिला। हाथ में मतदाता पहचान पत्र होने के बाद वह खुद को ठगा महसूस करते रहे। सेंट जोसेफ स्कूल की सिस्टर लिट्टी उच्च प्राथमिक विद्यालय राबर्ट्सगंज पर वोट करने पहुंची थीं। उनका भी नाम मतदाता सूची में नहीं था। अपना आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र सहित पहचान के अन्य दस्तावेज दिखाती रहीं, बावजूद उन्हें वोट करने का मौका नहीं मिल सका।
स्थानीय पता न होने पर भी वोट देने से रोका
शिवाजी मिनी स्टेडियम में वार्ड नंबर 11 के मतदाताओं के लिए बूथ बनाया गया था। यहां वोट देने पहुंचे बहुत से मतदाताओं को इसलिए रोक दिया गया कि उनके पहचान पत्र पर स्थानीय पता अंकित नहीं था। मतदाता सूची में नाम, मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड सब होने के बाद भी कुछ प्रत्याशियों के एजेंट उन्हें बाहरी बताते हुए वोट देने से रोकते रहे। इसे लेकर काफी देर तक बहस होती रही। कुछ लोगों ने हंगामा भी मचाया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बूथ के पास लगी भीड़ को खदेड़ा।
अनपरा के मतदाताओं को रास नहीं आया नगर में मतदान
नवसृजित अनपरा नगर पंचायत के मतदाताओं को नगर का चुनाव रास नहीं आया है। पहले चुनाव में मतदाताओं की उदासीनता का आलम यह रहा कि जिले की सबसे बड़ी यह निकाय सेकेंड डिविजन का आंकड़ा भी नहीं छू सकी। दूसरे निकायों में जहां मतदाताओं की लंबी कतारें लगी थी तो यहां सन्नाटा पसरा था। अपराह्न तीन बजे तक यहां सिर्फ 31 प्रतिशत ही वोट पड़ पाया। अनपरा में कर्मचारियों व प्रबुद्ध वर्ग के मतदाताओं का बड़ा समूह है।