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Sonebhadra News: तीन जिलों के आदिवासियों ने कोतवाली में किया हंगामा, जमीन से कब्जा हटाने और मारपीट के लगाया आरोप
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कोतवाली में प्रदर्शन करते आधिवासी समुदाय के लोग। संवाद
- फोटो : संवाद
सोनभद्र। वन विभाग की तरफ से सदर तहसील के कुछ हिस्सों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और कुछ आदिवासियों का शांतिभंग की आशंका में किए गए चालान के मामले ने तूल पकड़ लिया है। रविवार को सैकड़ों आदिवासी सदर कोतवाली पहुंचे। बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोगों के पहुंचने का कारण पुलिस के अफसर कुछ समझ पाते। इससे पहले अगुवाई कर रहे शंभूनाथ गोंड ने कुछ पुलिसकर्मियों पर सादे वेश में पहुंचकर घर से लाने, उसकी पिटाई करने और गलत तरीके से चालान करने का आरोप लगाकर एकबारगी पुलिस को असहज कर दिया।
मामला 18 फरवरी का है। शंभूनाथ ने दावा किया कि उस दिन सादे वेश में कुछ लोग पहुंचे और उसे लाकर चालान कर दिया गया। उसके साथ कई बार मारपीट की गई। चालान के बाद कचहरी जाकर जमानत करानी पड़ी। आदिवासियों में गुस्सा इस बात का था उनके साथ मारपीट क्यों की गई। मारपीट किस मामले में और क्यों की गई? इसका सटीक जवाब नहीं मिल सका। कुछ देर बाद जब स्थिति सामान्य हुई तब पता चला कि असल मसला वन विभाग की जमीनों पर की जा रही जोतकोड़ से बेदखल किए जाने का है।
इसी बात को लेकर सोनभद्र के साथ ही मिर्जापुर, चंदौली के भी ढेरों ग्रामीण पहुंचे हुए थे। पहले एसडीएम से मिलने की तैयारी थी। जब उन्हें यह पता चला कि रविवार को मुलाकात नहीं हो पाएगी तब सदर कोतवाली पर धमक पड़े। अचानक बड़ी संख्या में आदिवासियों के पहुंचने से वहां मौजूद हर कोई हतप्रभ रह गया। देर तक यहां पहुंचने का असल कारण जानने की कोशिश होती रही।
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प्रभारी निरीक्षक रामस्वरूप वर्मा ने बताया कि आदिवासियों को डर था कि वन विभाग की जिन जमीनों पर उनका कब्जा है उससे उन्हें बेदखल कर दिया जाएगा। इसी मसले को लेकर वह अफसरों से मिलने के लिए पहुंचे हुए थे। रविवार का दिन होने के कारण अफसर नहीं मिले तो अगुवाई कर रहे लोग उन्हें लेकर कोतवाली पहुंच गए। सभी को समझा-बुझाकर वापस कर दिया गया।
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मामला 18 फरवरी का है। शंभूनाथ ने दावा किया कि उस दिन सादे वेश में कुछ लोग पहुंचे और उसे लाकर चालान कर दिया गया। उसके साथ कई बार मारपीट की गई। चालान के बाद कचहरी जाकर जमानत करानी पड़ी। आदिवासियों में गुस्सा इस बात का था उनके साथ मारपीट क्यों की गई। मारपीट किस मामले में और क्यों की गई? इसका सटीक जवाब नहीं मिल सका। कुछ देर बाद जब स्थिति सामान्य हुई तब पता चला कि असल मसला वन विभाग की जमीनों पर की जा रही जोतकोड़ से बेदखल किए जाने का है।
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इसी बात को लेकर सोनभद्र के साथ ही मिर्जापुर, चंदौली के भी ढेरों ग्रामीण पहुंचे हुए थे। पहले एसडीएम से मिलने की तैयारी थी। जब उन्हें यह पता चला कि रविवार को मुलाकात नहीं हो पाएगी तब सदर कोतवाली पर धमक पड़े। अचानक बड़ी संख्या में आदिवासियों के पहुंचने से वहां मौजूद हर कोई हतप्रभ रह गया। देर तक यहां पहुंचने का असल कारण जानने की कोशिश होती रही।
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प्रभारी निरीक्षक रामस्वरूप वर्मा ने बताया कि आदिवासियों को डर था कि वन विभाग की जिन जमीनों पर उनका कब्जा है उससे उन्हें बेदखल कर दिया जाएगा। इसी मसले को लेकर वह अफसरों से मिलने के लिए पहुंचे हुए थे। रविवार का दिन होने के कारण अफसर नहीं मिले तो अगुवाई कर रहे लोग उन्हें लेकर कोतवाली पहुंच गए। सभी को समझा-बुझाकर वापस कर दिया गया।