Sonbhadra: जमीन का हक मिलने पर आदिवासियों ने जताई खुशी, बोले- 40 वर्षों से हक मिलने का था इंतजार
सोनभद्र के बभनी पहुंचे केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने वनाधिकार कानून के तहत पट्टे का प्रमाण पत्र वितरित किया। आदिवासियों के कल्याण को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए उनके पिछड़ेपन के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की नीतियों को जिम्मेदार बताया।
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केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे रविवार को सोनभद्र के बभनी पहुंचे। यहां सेवा समर्पण संस्थान सेवाकुंज आश्रम कारीडाड़ चपकी में 32वें अंतर राज्यीय स्वास्थ्य मेले का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने वनाधिकार कानून के तहत पट्टे का प्रमाण पत्र भी वितरित किया। आदिवासियों के कल्याण को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए उनके पिछड़ेपन के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की नीतियों को जिम्मेदार बताया।
भूमि पर पट्टे के लिए करीब 40 वर्षों से लड़ रहे आदिवासी वनवासियों को अब वनाधिकार के तहत पट्टा मिलना शुरू हुआ है। इस लड़ाई में कई पीढ़ियां गुजर गईं। वनाधिकार की लड़ाई लड़ते हुए किसी के पिता तो किसी के ससुर मृतक हो गए। अब उनकी संतानों को वनाधिकार के तहत पट्टा मिल रहा है। पट्टा मिलने के बाद खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
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इस दिन को जीवन पर्यंत नहीं भुलाया जा सकता
कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों ने बताया कि वर्षों बाद पट्टा मिला, जो आजीवन यादगार रहेगा। कांचन गांव निवासी रामचंद्र ने बताया कि उनके पिता ने इसके लिए लड़ाई लड़ना शुरू किया और आज पट्टा मिला। सालेनाग गांव निवासी भागीरथी ने बताया कि पिता हीराशाय पट्टा की लड़ाई लड़ते-लड़ते चल बसे और अब सेवाकुंज के प्रयास से हमे पट्टा मिला।
जौराही गांव निवासी रामकिशुन ने बताया कि 40 वर्षों बाद भूमि का पट्टा मिला, इस दिन को जीवन पर्यंत नहीं भुलाया जा सकता। बघाडू गांव की राजमती का कहना है कि उनके ससुर ने वनाधिकार के तहत पट्टा की लड़ाई शुरू की, लेकिन अब वह इस दुनिया में नहीं है। उनके स्थान पर आज हमें पट्टा मिला। सतबहनी गांव निवासी रामसुंदर ने भी बताया कि पिता ने आवेदन किया था, जिसका आज हमें पट्टा मिल रहा है। सतबहनी गांव निवासी छोटेलाल की भी कहानी कुछ इसी तरह है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में पिता ने पट्टा के लिए वनाधिकार के तहत आवेदन किया था। इसके बाद आज वनाधिकार के तहत पट्टा मिल पाया। पट्टा मिलने पर आदिवासियों ने खुशी का इजहार किया।
आदिवासी समाज का कल्याण सरकार की प्राथमिकता
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि यहां के आदिवासी व परंपरागत मूल निवासियों के उत्थान के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार तत्पर है। इसके लिए हर संभव प्रयास भी किया जा रहा है। वनवासी कल्याण आश्रम ने 13 बच्चों के साथ प्रकल्प शुरू किया था, आज वह वृहद रूप में पूरी दुनिया को लोहा मनवा रहा है। आदिवासी-वनवासी समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य और नागरिकों को मुख्य धारा में जोड़ने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को प्रत्येक व्यक्ति की चिंता है। कोविड काल में भी कोई व्यक्ति भूखा न रहे इसके लिए प्रधानमंत्री ने गरीबों को मुफ्त अनाज बांटा। सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य पर लगातार जोर दे रही है। इसी के तहत स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
कांग्रेस की सरकाराें ने आदिवासियों के सम्मान नहीं दिया
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में आदिवासी समाज ने भी प्रमुख भूमिका निभाई, लेकिन आजादी के बाद बनी कांग्रेस की सरकाराें ने इस समाज को उनका सम्मान नहीं दिया। इसका नतीजा रहा कि दशकों तक आदिवासी समाज बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहा। भाजपा सरकार उनके सभी सपनों को पूरा कर रही है। आवास, शौचालय, पेंशन, निशुल्क उपचार, पट्टा सहित अन्य योजनाओं के माध्यम से उन्हें लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्य वनाधिकार के तहत वनवासियों को लाभ दे रहे हैं। यूपी सरकार भी वनाधिकार के तहत आने वाली समस्याओं को दूर कर सभी को पट्टा वितरित करेगी। इसमें जो समस्या है, उसे शीघ्र दूर कराएंगे। कोई भी आदिवासी निराश न हो, सभी दावेदारों को पट्टा मिलेगा।
इससे पहले मंत्री ने स्वास्थ मेले में आए डॉक्टरों से सीधा संवाद किया। मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही दवाओं की जानकारी ली। आश्रम परिसर में अमृत सरोवर का शिलान्यास व पौध रोपण भी किया। इस मौके पर आश्रम के प्रांतीय चिकित्सा प्रमुख डॉ विद्यासागर पांडेय, सेवा समर्पण संस्थान के अध्यक्ष डॉ एसएन राय, समाज कल्याण विभाग के राज्य मंत्री संजीव सिंह गोंड, राज्यसभा सांसद रामसकल, विधायक दुद्धी राम दुलार गोंड, सह क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद जी आदि मौजूद रहे।