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Sonebhadra News: नशे से युवाओं को बाहर निकाल रहा तंबाकू निषेध केंद्र
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तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तंबाकू सेवन निषेध केंद्र का संचालन शुरू हो गया है। जहां पांच महीने में 145 से अधिक युवाओं ने तंबाकू उत्पादों के सेवन से दूरी बनाई है।
आधुनिकता की दौड़ और लाइफ स्टाइल को प्रभावी बनाने के चक्कर में युवा नशे की चपेट में आ रहे हैं। बुजुर्गों से इतर युवा और किशोर अपनी जिंदगी को तंबाकू का सेवन कर खतरे में डाल रहे हैं। जिले के अस्पतालों में तंबाकू का सेवन करने से बीमार होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
इसके सेवन से मुंह, फेफड़े, पेशाब की नली का कैंसर, हृदयघात, अधरंग, उच्च रक्तचाप, सांस की बीमारी और हृदय रोग होने की आशंका रहती है। तंबाकू शरीर के हर अंग पर गंभीर असर डालता है।
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ओपीडी में रोजाना मरीज उपचार करवाने आ रहे हैं। ऐसे में मेडिकल कालेज अस्पताल में प्राचार्य प्रो. एसके सिंह की पहल पर मेडिकल कॉलेजों के एलटू अस्पताल में तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों से निपटने और जन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए तंबाकू सेवन निषेध केंद्र की स्थापना की गई है।
केंद्र के संचालन की जिम्मेदारी एसोसिएट प्रो.ज्योति अग्रवाल को दी गई है। यहां जागरूकता और मजबूत इच्छा शक्ति से पांच महीने में 145 लोगों ने तंबाकू के सेवन से दूरी बनाया है। प्रो. ज्योति अग्रवाल का कहना है कि यदि कोई तंबाकू या नशा छोड़ना चाहता है तो वह एलटू अस्पताल में स्थापित केंद्र में काउंसलिंग करवा सकता है।
केंद्र में महिला और पुरुष दोनों वर्गों के मरीजों का उपचार किया जाता है। इसके सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में भी वीडियो और पोस्टर के जरिए बताया जाता है।
27 प्रतिशत कैंसर तंबाकू के कारण
केंद्र के विशेषज्ञों की माने तो जिले के लोगों में होने वाले सभी कैंसरों में से लगभग 27 प्रतिशत तंबाकू के सेवन के कारण होते हैं। इससे इतर तंबाकू धूम्रपान करने वालों को टीबी होने और बीमारी के अधिक गंभीर रूपों का सामना करने का अधिक जोखिम होता है।
कक्षा पांच में लगी थी नशे की लत
मारकुंडी क्षेत्र के एक गांव निवासी 18 वर्षीय युवक को बचपन में जब वो कक्षा पांच का छात्र था। उसी दौरान वे घर वालों के चोरी छिपके गुटखा खाने लगा। पता चलने पर परिजनों ने कई बार समझाया पर नहीं माना। इस बीच दांत का इलाज कराने आने पर उसकी काउंसलिंग की गई। दुष्प्रभाव के वीडियो दिखाए गए। अब उसने धीरे-धीरे कर तंबाकू का सेवन बंद कर दिया।
महिला ने छोड़ा बीड़ी पीना
केंद्र में काउंसलिंग के जरिए चतरा विकास खंड के पड़री गांव निवासी महिला को बीड़ी की लत लग गई थी। जहां उसकी कई चरणों में काउंसलिंग हुई। दवाएं भी दी गई। अब उसे इस आदत से निजात मिल गई है।
दस साल की लत हुई दूर
राॅबर्ट्सगज के मेन चौक निवासी 27 वर्षीय युवक को इंटर के दौरान लत लगी थी। वे दिन में 20 से 23 गुटखा खाने लगे थे। हालांकि केंद्र में काउंसलिंग के दौरान धीरे-धीरे उनका नशा छूट गया।
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आधुनिकता की दौड़ और लाइफ स्टाइल को प्रभावी बनाने के चक्कर में युवा नशे की चपेट में आ रहे हैं। बुजुर्गों से इतर युवा और किशोर अपनी जिंदगी को तंबाकू का सेवन कर खतरे में डाल रहे हैं। जिले के अस्पतालों में तंबाकू का सेवन करने से बीमार होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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इसके सेवन से मुंह, फेफड़े, पेशाब की नली का कैंसर, हृदयघात, अधरंग, उच्च रक्तचाप, सांस की बीमारी और हृदय रोग होने की आशंका रहती है। तंबाकू शरीर के हर अंग पर गंभीर असर डालता है।
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ओपीडी में रोजाना मरीज उपचार करवाने आ रहे हैं। ऐसे में मेडिकल कालेज अस्पताल में प्राचार्य प्रो. एसके सिंह की पहल पर मेडिकल कॉलेजों के एलटू अस्पताल में तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों से निपटने और जन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए तंबाकू सेवन निषेध केंद्र की स्थापना की गई है।
केंद्र के संचालन की जिम्मेदारी एसोसिएट प्रो.ज्योति अग्रवाल को दी गई है। यहां जागरूकता और मजबूत इच्छा शक्ति से पांच महीने में 145 लोगों ने तंबाकू के सेवन से दूरी बनाया है। प्रो. ज्योति अग्रवाल का कहना है कि यदि कोई तंबाकू या नशा छोड़ना चाहता है तो वह एलटू अस्पताल में स्थापित केंद्र में काउंसलिंग करवा सकता है।
केंद्र में महिला और पुरुष दोनों वर्गों के मरीजों का उपचार किया जाता है। इसके सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में भी वीडियो और पोस्टर के जरिए बताया जाता है।
27 प्रतिशत कैंसर तंबाकू के कारण
केंद्र के विशेषज्ञों की माने तो जिले के लोगों में होने वाले सभी कैंसरों में से लगभग 27 प्रतिशत तंबाकू के सेवन के कारण होते हैं। इससे इतर तंबाकू धूम्रपान करने वालों को टीबी होने और बीमारी के अधिक गंभीर रूपों का सामना करने का अधिक जोखिम होता है।
कक्षा पांच में लगी थी नशे की लत
मारकुंडी क्षेत्र के एक गांव निवासी 18 वर्षीय युवक को बचपन में जब वो कक्षा पांच का छात्र था। उसी दौरान वे घर वालों के चोरी छिपके गुटखा खाने लगा। पता चलने पर परिजनों ने कई बार समझाया पर नहीं माना। इस बीच दांत का इलाज कराने आने पर उसकी काउंसलिंग की गई। दुष्प्रभाव के वीडियो दिखाए गए। अब उसने धीरे-धीरे कर तंबाकू का सेवन बंद कर दिया।
महिला ने छोड़ा बीड़ी पीना
केंद्र में काउंसलिंग के जरिए चतरा विकास खंड के पड़री गांव निवासी महिला को बीड़ी की लत लग गई थी। जहां उसकी कई चरणों में काउंसलिंग हुई। दवाएं भी दी गई। अब उसे इस आदत से निजात मिल गई है।
दस साल की लत हुई दूर
राॅबर्ट्सगज के मेन चौक निवासी 27 वर्षीय युवक को इंटर के दौरान लत लगी थी। वे दिन में 20 से 23 गुटखा खाने लगे थे। हालांकि केंद्र में काउंसलिंग के दौरान धीरे-धीरे उनका नशा छूट गया।